गांव के लोग मगरमच्छ पालकर बन रहे करोड़पति, चमड़ी-पित्त से हो रही भारी कमाई

मगरमच्छ पालन आज एक लाभकारी व्यवसाय बन चुका है. इसकी त्वचा, मांस और पित्त से कई महंगे उत्पाद और औषधियां बनाई जाती हैं. थाईलैंड जैसे देशों में लोग इससे लाखों-करोड़ों रुपये की कमाई कर रहे हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 17 Aug, 2025 | 07:04 PM

आज के समय में खेती और पशुपालन के पारंपरिक तरीकों से हटकर लोग ऐसे पशुओं का पालन कर रहे हैं, जिनसे कमाई के मौके कहीं अधिक हैं. आपने गाय-भैंस, बकरी या मुर्गी पालन के बारे में तो सुना होगा, लेकिन क्या आपने कभी मगरमच्छ पालन के बारे में सुना है? जी हां, आज मगरमच्छ पालन एक बड़ा व्यवसाय बन चुका है. खासतौर पर थाईलैंड जैसे देशों में यह उद्योग लोगों को कुछ ही वर्षों में लाखों-करोड़ों की कमाई करवा रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह है मगरमच्छ से मिलने वाले बहुमूल्य उत्पाद जैसे कि चमड़ा, मांस, पित्त और खून, जिनकी मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से बढ़ रही है.

थाईलैंड बना मगरमच्छ पालन का केंद्र

मगरमच्छ पालन की बात करें तो थाईलैंड इस क्षेत्र में सबसे आगे है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, वहां करीब 12 लाख से ज्यादा मगरमच्छों का पालन किया जा रहा है. थाईलैंड में लगभग 1000 से अधिक फार्म हैं जहां मगरमच्छों को वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से पाला जाता है. इन फार्मों में कुछ ऐसे भी हैं जो दशकों से इस व्यवसाय में हैं और अब करोड़ों की कमाई कर रहे हैं. स्थानीय लोग और व्यवसायी इसे एक लाभकारी उद्योग के रूप में तेजी से अपना रहे हैं.

मगरमच्छ से बनते हैं ये कीमती उत्पाद

मगरमच्छ का पालन मुख्य रूप से उनकी त्वचा, मांस और पित्त के लिए किया जाता है. मगरमच्छ की त्वचा बहुत मजबूत और आकर्षक होती है, जिससे हैंडबैग, बेल्ट, शूज, वॉलेट और लेदर जैकेट जैसे प्रोडक्ट बनाए जाते हैं. ये सभी उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहद महंगे बिकते हैं. इसके अलावा, मगरमच्छ के मांस की भी कुछ देशों में मांग है. सबसे खास बात यह है कि मगरमच्छ के पित्त और खून का उपयोग औषधीय प्रोडक्ट्स में किया जाता है. यह पित्त आयुर्वेदिक और पारंपरिक चिकित्सा में उपयोग होता है और इसकी कीमत लगभग 75,000 रुपये प्रति किलो तक जाती है. यही कारण है कि मगरमच्छ पालन को कई लोग ‘लाखों-करोड़ों कमाने का जरिया’ मानते हैं.

भारत में भी बढ़ रही है दिलचस्पी

हालांकि भारत में अभी मगरमच्छ पालन कानून सीमित और सख्त नियमों के तहत आता है, लेकिन लोगों में इसकी जानकारी और रुचि तेजी से बढ़ रही है. यदि सरकार से अनुमति मिल जाए, तो यह उद्योग देश में भी रोजगार और आय का बड़ा स्रोत बन सकता है. भारत में कुछ क्षेत्रों में मगरमच्छ संरक्षण के लिए प्रयास हो रहे हैं, और भविष्य में अगर नीतियां लचीली बनती हैं तो मगरमच्छ पालन एक संभावनाशील व्यवसाय बन सकता है.

सावधानी और प्रशिक्षण जरूरी

मगरमच्छ पालन जितना फायदेमंद है, उतना ही जोखिम भरा भी. इसके लिए विशेष प्रशिक्षण और सुरक्षा उपायों की जरूरत होती है. फार्म को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि मगरमच्छों को पर्याप्त जगह, सही तापमान और भोजन मिल सके. साथ ही, पालनकर्ता को जानवरों की आदतों और व्यवहार की पूरी जानकारी होनी चाहिए.

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