पश्चिम बंगाल में पशु वध को लेकर सरकार ने बदले नियम, जेल और जुर्माना समेत डिटेल्स पढ़ें

पश्चिम बंगाल सरकार ने पशु वध को लेकर नए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं. अब बिना आधिकारिक प्रमाणपत्र किसी पशु का वध नहीं किया जा सकेगा. सरकार ने खुले में पशु वध पर भी पूरी तरह रोक लगा दी है. नए नियमों को लेकर राज्य में चर्चा तेज हो गई है और लोगों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर बनी हुई है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Updated On: 14 May, 2026 | 01:25 PM

West Bengal News: पश्चिम बंगाल सरकार ने पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 के तहत नया संशोधित सार्वजनिक नोटिस जारी किया है. इस नोटिस में पशु वध को लेकर कई सख्त नियम लागू किए गए हैं. सरकार ने साफ कहा है कि किसी भी पशु या भैंस का वध बिना आधिकारिक प्रमाणपत्र के नहीं किया जा सकेगा. सरकार के अनुसार यह कदम कानून व्यवस्था बनाए रखने, पशु वध प्रक्रिया को नियंत्रित करने और अदालत के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है. नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सार्वजनिक स्थानों पर खुले में पशु वध पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा. यह निर्देश कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेशों के पालन में जारी किए गए हैं. सरकार ने सभी संबंधित लोगों और संस्थाओं को इन नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा है.

प्रमाणपत्र मिलने के बाद ही होगा पशु वध

नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक कोई भी व्यक्ति सांड, बैल, गाय, भैंसा, नर या मादा भैंस और भैंस के बच्चे का वध तब तक नहीं कर सकेगा, जब तक यह प्रमाणित न हो जाए कि पशु वध के योग्य  है. नोटिस में कहा गया है कि ये प्रमाणपत्र नगरपालिका के चेयरमैन या पंचायत समिति के अध्यक्ष और सरकारी पशु चिकित्सक की संयुक्त सहमति से जारी किया जाएगा. दोनों अधिकारियों को लिखित रूप से ये मानना होगा कि पशु की उम्र 14 साल से अधिक हो चुकी है या फिर वह गंभीर बीमारी, चोट, विकृति या वृद्धावस्था के कारण स्थायी रूप से काम करने योग्य नहीं रहा. अगर किसी व्यक्ति का प्रमाणपत्र आवेदन खारिज किया जाता है, तो वह 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार के पास अपील कर सकता है.

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पशु वध कानून पर बंगाल सरकार ने जारी किए नए नियम.

सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पूरी तरह प्रतिबंधित

सरकार ने नोटिस में साफ किया है कि जिन पशुओं के लिए प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा, उनका वध केवल अधिकृत बूचड़खानों में ही किया जा सकेगा. इसके लिए नगरपालिका या स्थानीय प्रशासन द्वारा तय किए गए बूचड़खानों का ही इस्तेमाल करना होगा. खुले में, सड़क किनारे या किसी सार्वजनिक स्थान पर पशु वध करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा. सरकार का कहना है कि इस नियम का उद्देश्य स्वच्छता बनाए रखना और सार्वजनिक व्यवस्था  को सुरक्षित रखना है. इसके अलावा निरीक्षण के दौरान किसी भी अधिकारी या सरकारी पशु चिकित्सक के काम में बाधा डालना भी कानून का उल्लंघन माना जाएगा. प्रशासन ने चेतावनी दी है कि नियमों का पालन नहीं करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

नियम तोड़ने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान

नोटिस के अनुसार यदि कोई व्यक्ति पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 के नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई  की जाएगी. सरकार ने कहा है कि दोषी पाए जाने पर व्यक्ति को छह महीने तक की जेल, 1,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजा दी जा सकती है. इसके अलावा इस अधिनियम के तहत होने वाले अपराधों को संज्ञेय अपराध माना जाएगा, यानी पुलिस बिना वारंट कार्रवाई कर सकती है. सरकार ने यह भी बताया कि इस मामले से जुड़े सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया और कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं. राज्य सरकार का कहना है कि इन नियमों का मकसद कानून का पालन सुनिश्चित करना और पशु वध प्रक्रिया को नियंत्रित करना है. वहीं इस नोटिस के बाद राज्य में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है और लोग इसके अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं.

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Published: 14 May, 2026 | 01:21 PM
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