Fish Production: 95 लाख टन से 197 लाख टन तक पहुंचा उत्पादन, मछुआरों की बदली किस्मत

मत्स्यपालन विभाग के अनुसार पिछले दस वर्षों में भारत का मछली उत्पादन 95.79 लाख टन से बढ़कर 197.75 लाख टन हो गया है. सरकारी योजनाओं, बेहतर बुनियादी ढांचे और मजबूत बाजार व्यवस्था से इस क्षेत्र में तेजी आई है. इससे लाखों लोगों को रोजगार मिला और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 3 Mar, 2026 | 05:54 PM

Fish Production: समंदर हो या गांव का तालाब, अब मछली पालन सिर्फ परंपरा नहीं बल्कि कमाई का मजबूत जरिया बन चुका है. पिछले दस साल में भारत का मत्स्य क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ा है. मत्स्यपालन विभाग के अनुसार देश में मछली उत्पादन 95.79 लाख टन से बढ़कर 197.75 लाख टन हो गया है. यानी लगभग दोगुना बढ़ोतरी. सरकार की योजनाएं, बेहतर सुविधाएं और मजबूत बाजार व्यवस्था ने इस क्षेत्र को नई ऊंचाई दी है.

उत्पादन में ऐतिहासिक बढ़ोतरी

मत्स्यपालन विभाग के मुताबिक, बीते एक दशक में मछली उत्पादन  में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है. पहले जहां उत्पादन 95.79 लाख टन था, वहीं अब यह 197.75 लाख टन तक पहुंच गया है. यह बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई. इसके पीछे लगातार योजना, किसानों को प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल है. आज कई राज्यों में मछली पालन खेती जितना ही महत्वपूर्ण बन गया है. इससे लाखों परिवारों को रोजगार मिला है.

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सरकारी योजनाओं से बढ़ा उत्पादन और रोजगार.

PMMSY और सरकारी योजनाओं का बड़ा रोल

सरकार ने मत्स्य क्षेत्र को मजबूत  करने के लिए कई योजनाएं चलाई हैं. इनमें प्रमुख है प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY). इस योजना के तहत तालाब निर्माण, फीड, बीज और कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाओं के लिए मदद दी जाती है इसके अलावा बुनियादी ढांचे पर भी जोर दिया गया है. मछली पकड़ने वाले बंदरगाह, आइस प्लांट और प्रोसेसिंग यूनिट बनाए गए हैं. इससे मछुआरों को अपनी मछली सही दाम पर बेचने में आसानी हुई है.

मजबूत वैल्यू चेन और नई सुविधाएं

मत्स्यपालन विभाग का कहना है कि अब सिर्फ उत्पादन पर नहीं, बल्कि पूरी वैल्यू चेन पर ध्यान दिया जा रहा है. यानी तालाब से बाजार तक हर कदम को मजबूत किया जा रहा है. कोल्ड चेन, ट्रांसपोर्ट और पैकेजिंग की बेहतर सुविधा से मछली खराब होने का खतरा कम हुआ है. इससे किसानों की कमाई बढ़ी है. पहले जहां मछली जल्दी खराब हो जाती थी, अब उसे दूर-दराज के बाजारों तक आसानी से पहुंचाया जा रहा है.

गांवों में बढ़ा रोजगार और आत्मनिर्भरता

मत्स्य क्षेत्र की इस प्रगति का सीधा फायदा गांवों को मिला है. तालाब आधारित मछली पालन से छोटे किसान भी अच्छी कमाई कर रहे हैं. महिलाएं भी इस काम में आगे आ रही हैं. सरकार का कहना है कि मत्स्य पालन से पोषण  भी बेहतर हुआ है. मछली प्रोटीन का अच्छा स्रोत है, जिससे लोगों की सेहत में सुधार हुआ है. ग्रामीण इलाकों में यह क्षेत्र आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.

मदद और जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर

मत्स्यपालन विभाग ने मछुआरों और किसानों की मदद के लिए टोल फ्री नंबर भी जारी किया है. जिस नंबर पर कॉल कर योजनाओं, प्रशिक्षण और सहायता से जुड़ी जानकारी ली जा सकती है. विभाग लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस क्षेत्र से जुड़ सकें. डिजिटल प्लेटफॉर्म  और सोशल मीडिया के जरिए भी जानकारी साझा की जा रही है.

आगे भी जारी रहेगा विकास का सिलसिला

कुल मिलाकर पिछले दस साल में भारत का मत्स्य क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ा है. उत्पादन लगभग दोगुना हो चुका है और लाखों लोगों को रोजगार मिला है. मत्स्यपालन विभाग का कहना है कि आने वाले वर्षों में भी बुनियादी ढांचे, तकनीक और योजनाओं पर जोर दिया जाएगा. लक्ष्य है कि भारत दुनिया के प्रमुख मछली उत्पादक देशों में और मजबूत स्थान बनाए. सरकार की कोशिश है कि मछली पालन को आसान, लाभदायक और सुरक्षित बनाया जाए. अगर यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले समय में मत्स्य क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था  का और बड़ा सहारा बन सकता है.

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