CJP Jantar Mantar Protest: नई दिल्ली में सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के दौरान पूरे दिन जंतर-मंतर और आसपास का इलाका राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना रहा. सुबह से प्रदर्शनकारियों की भीड़ जुटनी शुरू हुई और देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया. संसद की ओर बढ़ने की कोशिश, बैरिकेडिंग, आंसू गैस, लाठीचार्ज, नेताओं की एंट्री और सरकार के साथ बातचीत तक पूरे दिन कई बड़े घटनाक्रम देखने को मिले.
दिनभर क्या-क्या हुआ? जानें बड़े अपडेट
- सुबह से ही जंतर-मंतर पर भीड़ जुटनी शुरू हो गई, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने पूरे इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी.
- सुरक्षा के मद्देनजर दिल्ली के पांच मेट्रो स्टेशन (राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट और सेवा तीर्थ) अगले आदेश तक बंद कर दिए गए.
- करीब 10 बजे प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया.
- शास्त्री भवन के पास कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठियों का इस्तेमाल किया.
- कुछ प्रदर्शनकारियों ने कनॉट प्लेस में कई बसों में तोड़फोड़ की.
- झड़प के दौरान कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए, जबकि कुछ प्रदर्शनकारियों को भी चोटें आईं.
- आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और आतिशी जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शन में शामिल हुए.
- सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी भूख हड़ताल खत्म की, जबकि संगठन की ओर से सरकार के साथ बातचीत की प्रक्रिया भी शुरू हुई.
- सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात के लिए पहुंचे. मुलाकात से पहले सौरव दास ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत जारी है.
- पूरे घटनाक्रम के बाद जंतर-मंतर, संसद मार्ग और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था देर शाम तक कड़ी रही.
जेपी नड्डा से सीजेपी प्रवक्ता की मुलाकात
आशुतोष रांका और सौरव दास दोपहर 12 बजे से जेपी नड्डा के आवास पर मौजूद हैं. इस दौरान उन्होंने अपनी सभी मांगें सरकार के सामने रखीं, जिनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग भी शामिल है. बताया गया कि जेपी नड्डा ने आश्वासन दिया है कि वह इस मुद्दे पर उचित स्तर पर चर्चा करेंगे, लेकिन फिलहाल कोई ठोस फैसला या वादा नहीं किया गया है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, उनका शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा.
उन्होंने ये भी कहा कि, मंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया है कि जंतर-मंतर और उसके आसपास प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आगे कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी. हालांकि, अब तक ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है कि पुलिस ने लोगों को रोकने की कार्रवाई पूरी तरह बंद कर दी हो.
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🚨#ImportantAnnouncement: @AshutoshRanka and I have been at J.P. Nadda’s residence since 12 noon. The demands have been conveyed, including immediate resignation/sacking of Dharmendra Pradhan.
The Minister assured us he will discuss this at the appropriate level. However, no… pic.twitter.com/vzLluczbkV
— Saurav Das (@SauravDassss) July 20, 2026
विपक्ष ने सरकार को घेरा
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि, शिक्षा नीति और छात्रों के मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय छात्रों पर आंसू गैस और लाठीचार्ज किया गया. वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार विरोध की आवाज को दबाने के लिए बल प्रयोग कर रही है.
समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव ने इसे लोकतंत्र का ‘काला दिन’ बताया और आरोप लगाया कि छात्रों के साथ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग हुआ. साथ ही सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि छात्रों को न्याय मिलना चाहिए और सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए.
दुसरी तरफ, आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था सुधारने की बजाय युवाओं पर कार्रवाई कर रही है.
विपक्ष ने शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करने और पूरे मामले की जांच की मांग भी उठाई. विपक्षी दलों ने कहा कि संसद में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा कराई जानी चाहिए. कई नेताओं ने आरोप लगाया कि, शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती की गई.
सरकार का क्या कहना है?
सरकार की ओर से प्रदर्शन को लेकर संयम बरतने और संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की गई.
भाजपा सांसद हेमा मालिनी ने कहा कि, किसी भी समस्या का समाधान बातचीत और संसद में चर्चा से निकल सकता है, सड़क पर प्रदर्शन से नहीं. वहीं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि, लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन भूख हड़ताल या टकराव की बजाय बातचीत बेहतर तरीका है. भाजपा सांसद कंगना रनौत ने भी कहा कि संसद सभी मुद्दों पर चर्चा का मंच है. उन्होंने कहा कि. सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन संसद की कार्यवाही बाधित करना उचित नहीं है.
फिलहाल पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर सरकार पर निशाना साध रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि हर मुद्दे का समाधान संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया के तहत ही होना चाहिए.