कश्मीर में हर साल फेंक दिए जाते हैं 25,000 टन सेब.. पर्यावरण को ऐसे पहुंचा रहे नुकसान

कश्मीर में हर साल 25,000 टन खराब सेब बिना उचित वेस्ट मैनेजमेंट के फेंके जा रहे हैं, जिससे पर्यावरण और पानी के स्रोतों को प्रदूषित होने खतरा बढ़ रहा है. हालांकि, इसका इस्तेमाल पशु आहार के रूप में भी किया जा सकता है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 3 Jul, 2025 | 11:08 PM

Kashmiri Apple: कश्मीर की कीमती सेब इंडस्ट्री एक बड़ी समस्या का सामना कर रही है. हर साल करीब 25,000 टन खराब हुए सेब बिना किसी ठोस वेस्ट मैनेजमेंट प्लान के इधर-उधर फेंक दिए जाते हैं, जिससे पर्यावरण और सेहत को खतरा बढ़ रहा है. वहीं, कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर (CA) स्टोरेज यूनिट्स में हर साल सैकड़ों टन सेब सड़ जाते हैं. लेकिन इन्हें निपटाने के लिए कोई तय व्यवस्था नहीं है, इसलिए ऑपरेटर इन्हें खुले में, बागों या नदी किनारे फेंक देते हैं. इससे गंदगी और प्रदूषण बढ़ रहा है.

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, कश्मीर में 100 से ज्यादा CA स्टोरेज यूनिट्स हैं, जिनमें कुल 5 लाख मीट्रिक टन सेब स्टोर करने की क्षमता है. इनमें रखे गए करीब 5 फीसदी सेब ज्यादातर C-ग्रेड हैं, जो छह महीने बाद खराब हो जाते हैं और कचरे में बदल जाते हैं. एक CA ऑपरेटर ने कहा कि मौजूदा स्टोरेज क्षमता के हिसाब से हर साल 25,000 टन से ज्यादा खराब सेब वेस्ट के रूप में निकलता है.

वेस्ट मैनेजमेंट की सुविधा की उठ रही मांग

जम्मू-कश्मीर फ्रूट एंड वेजिटेबल प्रोसेसिंग एंड इंटीग्रेटेड कोल्ड चेन एसोसिएशन (JKPICCA) के प्रवक्ता इजहान जावेद ने कहा कि स्टोरेज ऑपरेटर लंबे समय से सरकार से वेस्ट मैनेजमेंट की सुविधा की मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था की स्थापना हमारी पुरानी मांग रही है. इस बीच जम्मू-कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JKPCB) ने कई स्टोरेज ऑपरेटरों को नोटिस जारी किए हैं. उनसे पूछा गया है कि पर्यावरण नियमों के उल्लंघन पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और जुर्माना क्यों न लगाया जाए. यह कदम स्थानीय लोगों की शिकायतों और मीडिया रिपोर्ट्स के बाद उठाया गया, जिनमें सड़े हुए सेबों के ढेर नदी किनारे और खुले इलाकों में फेंके जाने की बात सामने आई थी.

कीटनाशकों के अवशेष पानी को बनाते हैं जहरीला

शेर-ए-कश्मीर कृषि विश्वविद्यालय (SKUAST), कश्मीर के फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. सज्जाद मोहम्मद वानी ने कहा कि अगर सड़े हुए सेबों का सही तरीके से निपटान न हो तो यह पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं. डॉ. सज्जाद मोहम्मद वानी ने चेतावनी दी कि अगर सेब के कचरे को खासकर पानी के स्रोतों के पास गलत तरीके से फेंका गया, तो इससे यूट्रोफिकेशन हो सकता है. यानी जल स्रोतों में जैविक पदार्थ और पोषक तत्वों के अधिक जमा होने से पानी की गुणवत्ता खराब हो जाती है. उन्होंने यह भी कहा कि सड़े सेबों में मौजूद पैटुलिन जैसे टॉक्सिन और कीटनाशकों के अवशेष पानी को जहरीला बना सकते हैं.

बायोगैस या पशु आहार में हो इस्तेमाल

हालांकि कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर (CA) यूनिट्स को ग्रीन इंडस्ट्री माना जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इनमें से निकलने वाला वेस्टवॉटर, जिसमें फंगीसाइड्स के अवशेष हो सकते हैं, भूजल को भी प्रदूषित कर रहा है. एक पर्यावरणविद् ने सुझाव दिया कि अगर इस कचरे को वैज्ञानिक तरीके से मैनेज किया जाए, तो इसे एक उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है. उन्होंने कहा कि अगर कोई सही सुविधा होती, तो इन सड़े हुए सेबों को खाद, बायोगैस या पशु आहार में बदला जा सकता था, बजाय इसके कि इन्हें यूं ही फेंक दिया जाए.

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Published: 3 Jul, 2025 | 10:30 PM
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