आलू किसानों पर दोहरी मार, फसल में लगी गंभीर बीमारी.. गिरकर 390 रुपये क्विंटल हुआ रेट

हरियाणा के कुरुक्षेत्र और अंबाला में आलू किसान गिरती कीमतों और फंगल रोग से परेशान हैं. भारी आवक के कारण भाव दबाव में हैं, वहीं अर्ली ब्लाइट से फसल प्रभावित हो रही है. किसान MSP की मांग कर रहे हैं और विशेषज्ञों ने समय पर फंगीसाइड के उपयोग की सलाह दी है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 27 Dec, 2025 | 04:43 PM

Potato Farming: हरियाणा के कुरुक्षेत्र और अंबाला के आलू किसान इस सीजन में दोहरी परेशानी झेल रहे हैं. बाजार में कीमतें गिर रही हैं और साथ ही फसल में फंगल रोग फैलने से लागत बढ़ रही है और मुनाफा कम हो रहा है. किसानों के अनुसार, शुरुआत में अच्छे दाम मिलने के बाद हाल के दिनों में आलू की कीमतें लगातार गिर रही हैं. शाहाबाद अनाज मंडी में सफेद आलू 390-510 रुपये प्रति क्विंटल और लाल आलू 700-800 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहे हैं. बाजार अधिकारियों के मुताबिक, 23 दिसंबर तक शाहाबाद मंडी में 2.34 लाख क्विंटल आलू आया है. भारी सप्लाई और स्थिर मांग के चलते कीमतें दबाव में हैं.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, शाहाबाद के आलू किसान राकेश कुमार ने कहा कि फंगल रोग की वजह से स्थिति और खराब हो गई है. किसानों को इसकी रोकथाम के लिए फंगीसाइड्स का इस्तेमाल करना पड़ रहा है. उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि किसानों को जागरूक करने के लिए कैंप आयोजित किए जाएं, ताकि सही फंगीसाइड का उपयोग किया जा सके और ज्यादा खर्च न हो.

5 एकड़ फसल फंगल रोग से प्रभावित

अंबाला के चुड़ियाला गांव के किसान तेजिंदर सिंह ने कहा कि उनके 33 एकड़ के आलू की फसल  में करीब 5 एकड़ फंगल रोग से प्रभावित हो गई है. पत्तियां सिकुड़ने लगती हैं और इसका असर आलू की बढ़वार पर पड़ता है. उन्होंने कहा कि इस साल पैदावार पहले ही कम है. बाजार में कीमतें भी ठीक नहीं हैं और किसानों को रोग रोकने के लिए ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है. सरकार को आलू के लिए कम से कम 10 रुपये प्रति किलो का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करना चाहिए. 

फफूंद रोग से भी किसान परेशान

किसान गौरव शर्मा ने भी कहा कि उनकी लगभग 4 एकड़ की फसल प्रभावित हुई है. हमने रोग रोकने के लिए स्प्रे किया है, लेकिन फसल पर ज्यादा असर नहीं दिख रहा. उन्होंने कहा कि जल्दी पकने वाली किस्म  की कीमतें भी पिछले साल की तुलना में कम मिली हैं. इस बीच, अधिकारी किसानों को आश्वस्त कर रहे हैं. कृषि विज्ञान केंद्र, टेपला के प्लांट प्रोटेक्शन अधिकारी डॉ. विक्रम सिंह ने कहा कि शुरुआती फफूंद (अर्ली ब्लाइट) के लक्षण तो दिखे हैं, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है.

किसान इस दवाई का करें छिड़काव

अर्ली ब्लाइट फूल आने से पहले, दिसंबर के मध्य से जनवरी के पहले सप्ताह तक हमला करता है. यह पत्तियों पर गहरे भूरे धब्बे बनाता है और पत्तियां सिकुड़ने लगती हैं. जिन खेतों में लक्षण दिख रहे हैं, वहां किसान फंगीसाइड का उपयोग करके रोग फैलने से रोक सकते हैं और पैदावार बचा सकते हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि कोहरे और बदलते धूप में रोग फैलने पर पैदावार प्रभावित हो सकती है.

मौसम फंगल रोग के फैलाव के लिए अनुकूल

कुरुक्षेत्र के जिला बागवानी अधिकारी, डॉ. शिवेंदु प्रताप सिंह ने कहा कि मौसम फंगल रोग  के फैलाव के लिए अनुकूल है. कोहरे और अधिक नमी के साथ बीच-बीच में सूरज की रोशनी फफूंद के संक्रमण और फैलाव के लिए अनुकूल होती है. उन्होंने कहा कि किसानों को रोकथाम के उपायों के लिए विशेषज्ञों और विभाग से सलाह लेनी चाहिए. प्रभावित क्षेत्रों से रिपोर्ट तैयार करने के लिए ब्लॉक इंचार्ज को भी निर्देश दिए गए हैं.

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Published: 27 Dec, 2025 | 04:42 PM

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