Wheat Farming: पंजाब में अचानक तापमान में बढ़ोतरी शुरू हो गई है. इससे रबी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है. इसी बीच पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने राज्य में बढ़ते तापमान को देखते हुए एडवाइजरी जारी की है. पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों को गेहूं की फसल की विशेष देखभाल करने की सलाह दी है. विश्वविद्यालय के एक्सटेंशन एजुकेशन निदेशक डॉ. मखान सिंह भुल्लर ने कहा है कि इस सीजन में करीब 95 प्रतिशत गेहूं की बुवाई 25 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच हुई, जो उपयुक्त समय माना जाता है. लेकिन अब बदलते मौसम और बढ़ती गर्मी चिंता का कारण बन रहे हैं. उन्होंने कहा कि दाना बनने के चरण में गेहूं की फसल अधिक तापमान के प्रति बहुत संवेदनशील होती है. इस दौरान तापमान बढ़ने से दानों का वजन घट सकता है, जिससे पैदावार और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती हैं.
डॉ. मखान सिंह भुल्लर ने कहा है कि खासकर हल्की और मध्यम जमीन में जल्दी बोई गई गेहूं पर इसका असर ज्यादा पड़ सकता है, क्योंकि फसल जल्दी पकती है और दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते. पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने कहा है कि फरवरी के दूसरे सप्ताह में तापमान पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है. मौजूदा हालात को देखते हुए किसानों को सलाह दी गई है कि वे गर्मी के असर को कम करने के लिए हल्की सिंचाई करें. सिंचाई करते समय हवा की गति का ध्यान रखें, ताकि तेज हवा के कारण फसल गिरने (लॉजिंग) का खतरा न हो.
तापमान से बचने के लिए करें हल्की सिंचाई
एग्रोनॉमी विभाग के प्रमुख डॉ. हरि राम ने कहा कि समय पर हल्की सिंचाई और अनुशंसित स्प्रे करने से अधिक तापमान के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है. इससे गेहूं की पैदावार और दानों की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलेगी. पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर आने वाले हफ्तों में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचता है, तो गेहूं की पैदावार पर बुरा असर पड़ सकता है. वैज्ञानिकों ने कहा है कि फरवरी में गेहूं की फसल दाना भरने के अहम चरण में होती है. इस समय यदि तापमान तेजी से बढ़ता है, तो दाने सिकुड़ जाते हैं और उत्पादन कम हो जाता है.
पोटाशियम नाइट्रेट स्प्रे करने की सिफारिश
वहीं एग्रोनॉमी विभाग के प्रमुख डॉ. हरि राम ने शाम के समय दो बार 2 प्रतिशत पोटेशियम नाइट्रेट (13:0:45) का स्प्रे करने की सिफारिश की है. इसके लिए 4 किलो दवा को 200 लीटर पानी में घोलकर बूट लीफ और फूल आने (एन्थेसिस) के चरण पर छिड़काव करने को कहा गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपायों से बढ़ते तापमान के असर को कुछ हद तक कम किया जा सकता है और पैदावार को बचाया जा सकता है.
साल 2022 की तरह बन सकता है मौसम
खास बात यह है कि पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की एडवाइजरी में 2022 जैसी समय से पहले आने वाली लू (हीटवेव) के खतरे को लेकर सतर्क रहने को कहा गया है. दरअसल, 2022 में समय से पहले पड़ी लू के कारण उत्पादन में करीब 20 प्रतिशत की कमी आई थी और इस साल ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए पहले ही कदम उठाए जा रहे हैं.
आईएमडी ने मौसम को लेकर जारी किया अलर्ट
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, अगले चार दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत में अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने की संभावना है. इसके बाद भी तापमान में कोई खास कमी के संकेत नहीं हैं. मौसम विभाग ने अपने सोमवार के बुलेटिन में बताया कि आने वाले सप्ताह के दौरान क्षेत्र के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से 3 से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक रह सकता है. यानी गर्मी का असर फिलहाल जारी रहने की संभावना है.