Maharashtra News: कांग्रेस विधायक और दिग्गज नेता विजय वडेट्टीवार ने बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए तुरंत आर्थिक राहत देने की मांग की. उन्होंने सरकार से लंबित धान बोनस के भुगतान पर भी सवाल उठाए. साथ ही प्रस्तावित शक्तिपीठ हाईवे के लिए हो रहे भूमि सर्वेक्षण की प्रक्रिया को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा. विजय वडेट्टीवार ने महाराष्ट्र विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि पिछले 24 घंटों में हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि से विदर्भ और मराठवाड़ा के कई जिलों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं. उन्होंने कहा कि नागपुर, भंडारा, गोंदिया और यवतमाल (विदर्भ) के साथ-साथ बीड, लातूर, नांदेड़ और परभणी (मराठवाड़ा) सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल हैं.
उन्होंने सदन को बताया कि कटाई के लिए तैयार ज्वार, गेहूं और चने की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है. इसके अलावा आम और अंगूर के बागों को भी भारी नुकसान पहुंचा है. उन्होंने कहा कि मौसम विभाग ने अगले दो दिनों में सोलापुर, परभणी, नांदेड़ और धाराशिव में और बारिश की चेतावनी दी है, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है. विजय वडेट्टीवार ने धान किसानों का मुद्दा अलग से उठाते हुए कहा कि किसानों की परेशानी और घोषित बोनस को लेकर राज्य मंत्री योगेश कदम द्वारा दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं है. उन्होंने मंत्री से मांग की कि वे हर बिंदु पर स्पष्ट और क्रमवार जवाब दें. साथ ही इस मुद्दे को अगली कैबिनेट बैठक में सकारात्मक रुख के साथ रखने की अपील भी की.
प्रति एकड़ 20,000 रुपये की सहायता की मांग
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, विजय वडेट्टीवार ने कहा कि आज किसानों को धान की फसल के लिए 1,500 रुपये प्रति क्विंटल भी नहीं मिल रहे हैं. ऐसी स्थिति में सरकार को उनके साथ खड़ा होना चाहिए और प्रति एकड़ 20,000 रुपये की सहायता घोषित करनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि पहले अत्यधिक बारिश के लिए घोषित मुआवजा अभी तक किसानों तक नहीं पहुंचा है और धान का वादा किया गया बोनस भी नहीं मिला. उन्होंने कहा कि पहले का मुआवजा नहीं मिला, बोनस नहीं दिया गया और अब एक और संकट आ गया है. इसलिए सरकार को प्रक्रिया में देरी करने के बजाय तुरंत नकद सहायता देनी चाहिए.
योगेश कदम ने बहस का जवाब देते हुए कहा कि सरकार गंभीर है और सरकारी प्रस्ताव जारी करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे रही है. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक होगी और प्रस्ताव को कैबिनेट में रखा जाएगा. वहीं, विजय वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि शक्तिपीठ हाईवे के लिए भूमि सर्वेक्षण में किसानों के घरों पर नोटिस चिपकाए जा रहे हैं और भारी पुलिस तैनाती से डर पैदा हो रहा है. स्पीकर राहुल नार्वेकर ने सरकार को इस मामले पर बयान देने का निर्देश दिया.
42.84 लाख एकड़ तैयार फसलें प्रभावित
बता दें कि पिछले साल सितंबर महीने में महाराष्ट्र में भीषण बारिश से 42.84 लाख एकड़ तैयार फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई थी. तब कृषि मंत्री ने कहा था कि 17,85,714 हेक्टेयर में खड़ी और कटाई के लिए तैयार फसलें नुकसान झेल चुकी हैं. सबसे ज्यादा प्रभावित जिले में नांदेड़ है, जहां 7.28 लाख हेक्टेयर फसलें बर्बाद हुईं, जबकि वसीम में 2.03 लाख हेक्टेयर फसलें नष्ट हुई थीं.
इन जिलों में सबसे अधिक नुकसान
अन्य प्रभावित जिलों में यवतमाल में 3.18 लाख हेक्टेयर, धाराशिव में 1.57 लाख हेक्टेयर, अकोला में 1.77 लाख हेक्टेयर, सोलापुर में 47,266 हेक्टेयर और बुलढाना में 89,782 हेक्टेयर फसलें प्रभावित हुई थीं. हिंगोली, पारभणी, अमरावती, जलगांव, वर्धा, सांगली, अहिल्यानगर, छत्रपति संभाजीनगर, जलना, बीड, लातूर, धुले, रत्नागिरी, चंद्रपुर, सतारा, नासिक, कोल्हापुर, सिंधुदुर्ग, गढ़चिरोली, रायगड, नागपुर और पुणे जिलों में भी भारी बारिश से फसलें प्रभावित हुई थीं. सबसे ज्यादा नुकसान सोयाबीन, मक्का, कपास, उड़द, तूर और मूंग की फसलों को हुआ था. इसके अलावा सब्ज़ी, फलों, बाजरा, गन्ना, प्याज, ज्वार और हल्दी की फसलें भी प्रभावित हुई थीं.