FCI QR Tagging: केंद्र सरकार ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) के खाद्यान्न की निगरानी को और मजबूत बनाने के लिए अनाज की बोरियों पर क्यूआर टैग लगाने की पहल का विस्तार करने का फैसला किया है. इस कदम का उद्देश्य खाद्यान्न की खरीद, भंडारण और वितरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है. सरकार का मानना है कि क्यूआर टैगिंग प्रणाली से खाद्यान्न की आवाजाही पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को और मजबूत किया जा सकेगा.
तीन राज्यों में 20 लाख टन चावल होगा क्यूआर टैगिंग के दायरे में
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चालू मार्केटिंग सत्र के दौरान आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा में इस प्रणाली को लागू किया जाएगा. योजना के तहत कुल 20 लाख टन चावल को क्यूआर टैगिंग के दायरे में लाया जाएगा. इसमें आंध्र प्रदेश से लगभग 10 लाख टन चावल भेजा जाएगा, जबकि तेलंगाना और ओडिशा से पांच-पांच लाख टन चावल की आपूर्ति की जाएगी. ये चावल मिलों से वितरण केंद्रों तक क्यूआर टैग लगी बोरियों में भेजा जाएगा, जिससे हर चरण की जानकारी रिकॉर्ड की जा सकेगी.
सफल पायलट परियोजना के बाद लिया गया फैसला
सरकार ने यह निर्णय आंध्र प्रदेश और पंजाब में सफल पायलट परियोजनाओं के बाद लिया है. आंध्र प्रदेश में दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच और पंजाब में अप्रैल से मई 2026 के दौरान इस तकनीक का परीक्षण किया गया था. परीक्षण के सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद अब इसे बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी की गई है. खाद्य मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, विस्तारित पायलट परियोजना में तीनों राज्यों के चुनिंदा जिलों को शामिल किया जाएगा ताकि प्रणाली की प्रभावशीलता का और बेहतर आकलन किया जा सके.
क्यूआर टैग से मिलेगी हर बोरी की पूरी जानकारी
क्यूआर टैगिंग प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे प्रत्येक खाद्यान्न बोरी की पहचान आसानी से की जा सकेगी. अधिकारी यह पता लगा सकेंगे कि बोरी में रखा अनाज किस खरीद केंद्र से आया है, किस एजेंसी ने इसकी खरीद की है और यह किस विपणन सत्र का हिस्सा है. गोदामों में भंडारण के दौरान और राशन दुकानों तक पहुंचने के बाद भी इन बोरियों को स्कैन किया जा सकेगा.
वितरण चरण में इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ सेल (ePOS) उपकरण क्यूआर कोड को दर्ज करेगा, जिससे खाद्यान्न वितरण की पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप से ट्रैक की जा सकेगी. इससे अनाज की बोरियों के दोबारा उपयोग पर रोक लगाने में मदद मिलेगी और सब्सिडी वाले खाद्यान्न के वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी. सरकार को उम्मीद है कि यह पहल खाद्य सुरक्षा प्रणाली को अधिक भरोसेमंद और जवाबदेह बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.