FSSAI fruit ripening rules: देश में गर्मियों के मौसम में आम, केला और पपीता जैसे फलों की मांग तेजी से बढ़ जाती है. इसी बढ़ती मांग का फायदा उठाकर कुछ व्यापारी फलों को जल्दी पकाने के लिए खतरनाक और प्रतिबंधित रसायनों का इस्तेमाल करते हैं. अब इस पर रोक लगाने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सख्त कदम उठाया है और राज्यों को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.
मंडियों और गोदामों में बढ़ेगी निगरानी
FSSAI ने गुरुवार को राज्यों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को पत्र लिखकर कहा है कि वे फलों की मंडियों, गोदामों और भंडारण केंद्रों में निरीक्षण तेज करें. खास तौर पर उन जगहों पर नजर रखने को कहा गया है जहां मौसमी फलों का स्टॉक रखा जाता है.
संस्था ने स्पष्ट किया है कि बाजार में बिकने वाले ताजे फलों की निगरानी की जाए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं उन पर प्रतिबंधित या गैर-अनुमोदित रसायनों का इस्तेमाल तो नहीं हो रहा है.
कैल्शियम कार्बाइड पर पूरी तरह प्रतिबंध
FSSAI ने दोबारा साफ किया है कि कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल फलों को पकाने के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित है.
इसके बावजूद कई जगहों पर इसका इस्तेमाल जारी है, जो बेहद खतरनाक है. संस्था के अनुसार इस रसायन के संपर्क में आने से लोगों को निगलने में दिक्कत, उल्टी और त्वचा पर घाव जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं.
FSSAI has ordered strict enforcement across states to intensify action against illegal fruit ripening agents, reiterating that the use of calcium carbide for artificial ripening of fruits such as mangoes, bananas & papayas is strictly prohibited. pic.twitter.com/OJ6JBqRn7u
— FSSAI (@fssaiindia) April 16, 2026
एथेफोन के गलत इस्तेमाल पर भी चेतावनी
FSSAI ने यह भी पाया है कि कुछ फूड बिजनेस ऑपरेटर्स (FBOs) केले और अन्य फलों को जल्दी पकाने के लिए उन्हें एथेफोन (ethephon) के घोल में डुबो रहे हैं.
यह तरीका भी नियमों के खिलाफ है. संस्था ने अपनी गाइडलाइन में साफ कहा है कि फलों या सब्जियों का सीधे एथिलीन (ethylene) के संपर्क में आना चाहे वह पाउडर हो या लिक्विड पूरी तरह से प्रतिबंधित है.
विशेष अभियान चलाने के निर्देश
केंद्रीय खाद्य नियामक ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे इस मुद्दे पर विशेष अभियान चलाएं और कैल्शियम कार्बाइड, अन्य गैर-मान्य रसायनों, वैक्स और सिंथेटिक रंगों के इस्तेमाल पर सख्ती से रोक लगाएं. अगर किसी जगह पर फलों के साथ कैल्शियम कार्बाइड पाया जाता है, तो उसे अपराध मानते हुए संबंधित कारोबारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
जांच के लिए आधुनिक तरीके अपनाने पर जोर
FSSAI ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि वे जांच के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करें. जैसे कि गोदामों या पकाने वाले कमरों में एसीटिलीन गैस की मौजूदगी का पता लगाने के लिए स्ट्रिप पेपर टेस्ट का उपयोग किया जा सकता है. इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि कहीं फलों को कृत्रिम तरीके से पकाया तो नहीं गया.
उपभोक्ताओं की सेहत सर्वोपरि
FSSAI का कहना है कि यह पूरा अभियान उपभोक्ताओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चलाया जा रहा है. कृत्रिम और खतरनाक रसायनों से पकाए गए फल स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं. इसलिए जरूरी है कि बाजार में केवल सुरक्षित और प्राकृतिक तरीके से पके फल ही बिकें.