अब खेती के लिए खेत नहीं चाहिए! खुले आंगन में उगाएं पपीता और कमाएं बढ़िया मुनाफा

पपीता एक ऐसा फल है जो तेजी से बढ़ता है और कम समय में फल देना शुरू कर देता है. दूसरे फलों के मुकाबले इसमें ज्यादा देखभाल या भारी लागत की जरूरत नहीं होती. पपीता पाचन सुधारने, इम्यूनिटी बढ़ाने और वजन नियंत्रण में मददगार माना जाता है. बाजार में इसकी मांग सालभर बनी रहती है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 22 Jan, 2026 | 11:49 AM

Papaya farming: आजकल शहरों से लेकर गांवों तक लोग अपने घर के खाली आंगन, छत या छोटे बगीचे में सब्जी और फलों की खेती की ओर लौट रहे हैं. बढ़ती महंगाई और शुद्ध खाने की चिंता के बीच पपीते की खेती एक ऐसा विकल्प बनकर उभरी है, जो सेहत और कमाई दोनों का फायदा देती है. पपीता न सिर्फ पौष्टिक फल है, बल्कि इसकी खेती भी बेहद आसान है और यह कम जगह में भी अच्छी पैदावार देता है. यही वजह है कि घर के आंगन में पपीता उगाना अब लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है.

क्यों फायदेमंद है घर पर पपीता उगाना

पपीता एक ऐसा फल है जो तेजी से बढ़ता है और कम समय में फल देना शुरू कर देता है. दूसरे फलों के मुकाबले इसमें ज्यादा देखभाल या भारी लागत की जरूरत नहीं होती. पपीता पाचन सुधारने, इम्यूनिटी बढ़ाने और वजन नियंत्रण में मददगार माना जाता है. बाजार में इसकी मांग सालभर बनी रहती है, जिससे इसे बेचकर अतिरिक्त आमदनी भी की जा सकती है. यही कारण है कि छोटे किसान ही नहीं, बल्कि शहरी लोग भी इसे घर में उगाने लगे हैं.

पपीते की खेती के लिए सही मौसम और जगह

अगर आप घर के आंगन में पपीता लगाना चाहते हैं, तो मौसम का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. फरवरी से मार्च और फिर सितंबर से अक्टूबर का समय पपीते की रोपाई के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. इस दौरान न ज्यादा ठंड होती है और न ही तेज गर्मी, जिससे पौधा आसानी से जम जाता है. पपीते के पौधे को खुली धूप पसंद होती है, इसलिए ऐसी जगह चुनें जहां दिन में कम से कम 6–7 घंटे धूप आती हो.

मिट्टी और रोपाई की सही तैयारी

पपीते की खेती के लिए हल्की, भुरभुरी और उपजाऊ मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. सबसे जरूरी बात यह है कि मिट्टी में पानी जमा न हो, क्योंकि ज्यादा नमी से पौधा खराब हो सकता है. आंगन में लगभग एक फीट गहरा और एक फीट चौड़ा गड्ढा खोदकर उसमें अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद या कम्पोस्ट मिलाकर मिट्टी तैयार की जाती है. इसके बाद नर्सरी से लाया गया स्वस्थ पौधा सावधानी से लगाकर हल्का पानी दिया जाता है.

देखभाल और जैविक खाद का महत्व

पपीते के पौधे को बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती, लेकिन मिट्टी में हल्की नमी बनी रहनी चाहिए. हफ्ते में दो से तीन बार सिंचाई आमतौर पर पर्याप्त होती है. समय-समय पर गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट या घर में बनी जैविक खाद डालने से पौधा तेजी से बढ़ता है और फल अच्छे आकार के आते हैं. कीट और बीमारियों से बचाव के लिए नीम का घोल या जैविक स्प्रे उपयोग करना फायदेमंद रहता है, जिससे फल पूरी तरह सुरक्षित और केमिकल-फ्री रहते हैं.

कब शुरू होती है फल की पैदावार

पपीते का पौधा रोपाई के करीब 8 से 10 महीने बाद फल देना शुरू कर देता है. जब फल का रंग हल्का पीला होने लगे, तब उसकी तुड़ाई करना सही माना जाता है. समय पर तुड़ाई करने से फल का स्वाद बेहतर रहता है और बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलती है. एक स्वस्थ पौधा लंबे समय तक फल देता है, जिससे लगातार लाभ मिलता रहता है.

कम खर्च में कैसे होती है अच्छी कमाई

घर के आंगन में पपीता उगाने में बहुत ज्यादा खर्च नहीं आता. पौधा, खाद और पानी मिलाकर शुरुआती लागत सीमित रहती है. सही देखभाल की जाए तो एक ही पौधे से कई किलो पपीता प्राप्त किया जा सकता है. स्थानीय बाजारों में पपीता आमतौर पर 30 से 40 रुपये प्रति किलो तक बिक जाता है. ऐसे में घर की जरूरत पूरी करने के बाद बचा हुआ पपीता बेचकर अच्छी अतिरिक्त आमदनी की जा सकती है.

सेहत और आत्मनिर्भरता दोनों का रास्ता

घर में उगाया गया पपीता न केवल ताजा और शुद्ध होता है, बल्कि यह आपको आत्मनिर्भर भी बनाता है. बिना केमिकल के उगा फल परिवार की सेहत सुधारता है और साथ ही आपको खेती से जुड़ने का संतोष भी देता है. अगर आप कम मेहनत में कुछ नया करना चाहते हैं, तो घर के खुले आंगन में पपीते की खेती आपके लिए एक शानदार शुरुआत हो सकती है.

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