दुनिया का सबसे दर्दनाक पौधा: एक बार छू लिया तो महीनों तक नहीं जाता दर्द, वैज्ञानिक भी बता चुके हैं जानलेवा

जिम्पई-जिम्पई के संपर्क में आने वाले लोगों ने इसके दर्द को बेहद खतरनाक बताया है. कई लोग इसे ऐसा बताते हैं जैसे किसी ने शरीर पर एसिड डाल दिया हो या तेज बिजली का झटका लग रहा हो. यह दर्द कुछ मिनटों का नहीं होता, बल्कि कई घंटों तक बना रह सकता है. कई मामलों में यह दर्द महीनों तक महसूस होता रहता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 6 Apr, 2026 | 02:38 PM

gympie gympie plant: प्रकृति जितनी सुंदर और रहस्यमयी है, उतनी ही खतरनाक भी हो सकती है. कई बार साधारण दिखने वाली चीजें भी बेहद खतरनाक साबित होती हैं. ऐसा ही एक पौधा है जिम्पई-जिम्पई (Gympie-Gympie), जिसे दुनिया का सबसे दर्दनाक पौधा माना जाता है. ऑस्ट्रेलियाई अनुसंधान परिषद ( ARC) की रिपोर्ट के अनुसार, यह पौधा ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में पाया जाता है, लेकिन इंडोनेशिया और मोलक्कस जैसे क्षेत्रों में भी इसकी मौजूदगी दर्ज की गई है.

इस पौधे को “सुसाइड प्लांट” यानी आत्महत्या वाला पौधा भी कहा जाता है, क्योंकि इसके संपर्क में आने के बाद व्यक्ति को इतना असहनीय दर्द होता है कि वह मानसिक रूप से टूट सकता है.

दिखने में साधारण, लेकिन बेहद खतरनाक

पहली नजर में यह पौधा किसी सामान्य हरे पौधे जैसा ही दिखता है, लेकिन इसकी असली खतरनाक इसके पत्तों और तनों पर मौजूद बेहद महीन कांटों में छिपी होती है. ये कांटे इतने छोटे होते हैं कि आंखों से आसानी से दिखाई भी नहीं देते.

जब ये कांटे त्वचा के संपर्क में आते हैं, तो ये उसमें घुस जाते हैं और एक विषैला रसायन छोड़ते हैं. यही जहर शरीर में तेज जलन, सूजन और असहनीय दर्द पैदा करता है.

कैसा होता है इसका दर्द?

जिम्पई-जिम्पई के संपर्क में आने वाले लोगों ने इसके दर्द को बेहद खतरनाक बताया है. कई लोग इसे ऐसा बताते हैं जैसे किसी ने शरीर पर एसिड डाल दिया हो या तेज बिजली का झटका लग रहा हो.

यह दर्द कुछ मिनटों का नहीं होता, बल्कि कई घंटों तक बना रह सकता है. कई मामलों में यह दर्द महीनों तक महसूस होता रहता है. ठंडा पानी या हल्का स्पर्श भी दर्द को फिर से बढ़ा सकता है.

इतना खतरनाक कि लोग सहन नहीं कर पाते

इस पौधे के दर्द की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कुछ लोग इस दर्द से इतना परेशान हो जाते हैं कि आत्महत्या जैसे विचार तक आने लगते हैं.

एक रिपोर्ट के अनुसार, एक सैनिक इस पौधे के संपर्क में आने के बाद इतना दर्द सहन नहीं कर पाया कि उसे अस्पताल में भर्ती करना पड़ा और उसे नियंत्रित रखने के लिए बांधना तक पड़ा.

वैज्ञानिकों के अनुभव भी डराने वाले

1963 में बोटनिस्ट एर्नी राइडर इस पौधे के संपर्क में आए थे. उनका दर्द इतना ज्यादा था कि उन्हें करीब दो साल तक पूरी तरह राहत नहीं मिल पाई.

इसी तरह मरीना हर्ले नाम की एक वैज्ञानिक ने भी इसका अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह दर्द ऐसा था जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है. उन्होंने इसे एक साथ जलने और बिजली के झटके जैसा महसूस बताया.

क्यों इतना खतरनाक है यह पौधा

इस पौधे के कांटे सिर्फ त्वचा को चुभते ही नहीं, बल्कि अंदर तक घुसकर जहर छोड़ते हैं. यही कारण है कि दर्द लंबे समय तक बना रहता है. सबसे बड़ी समस्या यह है कि ये कांटे आसानी से निकलते भी नहीं हैं, जिससे दर्द बार-बार उभरता रहता है.

अगर संपर्क हो जाए तो क्या करें

अगर गलती से कोई व्यक्ति इस पौधे के संपर्क में आ जाए, तो सबसे पहले प्रभावित जगह को ठंडे पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए. इसके बाद बर्फ लगाने से थोड़ी राहत मिल सकती है. हालांकि इस दर्द के लिए सामान्य दवाएं हमेशा असरदार नहीं होतीं, इसलिए डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी होता है.

बचाव ही सबसे बड़ा उपाय

अगर आप ऑस्ट्रेलिया या ऐसे किसी इलाके में जा रहे हैं, जहां यह पौधा पाया जाता है, तो सतर्क रहना बेहद जरूरी है. इस पौधे को पहचानना और उससे दूरी बनाकर रखना ही सबसे सुरक्षित तरीका है. जंगलों में घूमते समय पूरे कपड़े पहनना और बिना जानकारी के किसी भी पौधे को छूने से बचना चाहिए.

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