कीटों और खरपतवार से 50 फीसदी तक बर्बाद हो सकती है सरसों, कॉर्टेवा के क्लियरफील्ड सिस्टम से बचेगा नुकसान

राजस्थान के कृषि, बागवानी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि हमारे किसानों को ओरोबैंच जैसे कीड़ों और खरपतवारों से बहुत ज्यादा मुश्किल होती है. कॉर्टेवा और BASF का क्लियरफील्ड सरसों उत्पादन सिस्टम एक अच्छा इनोवेशन है. यह हमारे सरसों उगाने वालों के लिए राहत और खुशहाली का वादा करता है, खेती की प्रोडक्टिविटी बढ़ाता है और स्थिर उत्पादन पक्का करता है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 18 Feb, 2026 | 03:30 PM

देशभर में 80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की खेती की जाती है, लेकिन कीटों और खरपतवारों की वजह से लगभग 50 फीसदी फसल तक को नुकसान पहुंच जाता है. इससे किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है. इस नुकसान से किसानों को बचाने के लिए एग्रीकल्चर सॉल्यूशन देने वाली कंपनी कॉर्टेवा और BASF ने भारत में सरसों के प्रोडक्शन को मजबूत करने और बढ़ाने के लिए गेम चेंजिंग इनोवेशन क्लियरफील्ड प्रोडक्शन सिस्टम लॉन्च किया है.  वहीं, राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने क्लियरफील्ड सरसों उत्पादन सिस्टम को बेहतरीन पहल बताया है.

देशभर में हर साल 40 लाख टन एडिबल ऑयल सरसों के जरिए पूरा होता है और इसके लिए देशभर में 80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की फसल की जाती है. लेकिन ओराबांचे जैसे पैरासाइटिक वीड्स से किसानों को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और इससे पैदावार में 50 फीसदी तक का नुकसान हो सकता है. गंभीर इन्फेक्शन से फसल पूरी तरह खराब भी हो सकती है. फसल का प्रोडक्शन बनाए रखने और खाने के तेलों में भारत की आत्मनिर्भरता पक्का करने के लिए असरदार वीड मैनेजमेंट जरूरी है.

क्लियरफील्ड प्रोडक्शन सिस्टम फसल को खरपतवार से बचाएगा

एग्रीकल्चर सेक्टर की दिग्गज कंपनी कॉर्टेवा इंडिया, BASF इंडिया के साथ स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप में सरसों की फसल के लिए नए क्लियरफील्ड® प्रोडक्शन सिस्टम को पेश किया है. यह पहल नॉन-GM फसल सिस्टम हर्बिसाइड-टॉलरेंट है और इसका मकसद बेहतर खरपतवार नियंत्रण और ज्यादा पैदावार की क्षमता के जरिए सरसों की खेती को बेहतर बनाना है.

ओरोबैंच जैसे मुश्किल खरपतवारों को खत्म करना आसान होगा

क्लियरफील्ड टेक्नोलॉजी में किफिक्स® हर्बिसाइड भी शामिल है. यह BASF का एक प्रोप्राइटरी इनोवेशन है, जो ओरोबैंच जैसे मुश्किल खरपतवारों के खिलाफ बड़े पैमाने पर सेलेक्टिव कंट्रोल देने के लिए जाना जाता है. असल में यह सिस्टम कॉर्टेवा के एडवांस्ड और ज्यादा पैदावार वाले जेनेटिक्स को BASF क्लियरफील्ड हर्बिसाइड टॉलरेंट ट्रेट के साथ जोड़ता है. क्लियरफील्ड ट्रेट के साथ डेवलप किए गए सरसों के बीज नॉन ट्रांसजेनिक और नॉन जेनेटिकली मॉडिफाइड होते हैं, जो पारंपरिक प्लांट ब्रीडिंग टेक्नीक से हासिल किए गए हैं. ये बीज कॉर्टेवा की ओर से खास तौर पर पायनियर ब्रांड के तहत बेचे जाएंगे, जिससे किसानों को सरसों की खेती के लिए हाई क्वालिटी, इनोवेटिव सॉल्यूशन मिलेंगे.

कृषि मंत्री ने क्लियरफील्ड सरसों उत्पादन सिस्टम को बेहतरीन पहल बताई

राजस्थान के कृषि, बागवानी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि राजस्थान भारत में सरसों उत्पादन का एक जरूरी हब है. हमारे किसानों को ओरोबैंच जैसे कीड़ों और खरपतवारों से बहुत ज्यादा दबाव का सामना करना पड़ता है. कॉर्टेवा और BASF का क्लियरफील्ड सरसों उत्पादन सिस्टम एक अच्छा इनोवेशन है. यह हमारे सरसों उगाने वालों के लिए राहत और खुशहाली का वादा करता है, खेती की प्रोडक्टिविटी बढ़ाता है और स्थिर उत्पादन पक्का करता है.

सरसों की खेती का नया स्टैंडर्ड सेट होने का दावा

BASF एग्रीकल्चरल सॉल्यूशंस इंडिया के डायरेक्टर गिरिधर रानुवा ने कहा कि BASF भारत में हमारे सरसों किसानों के लिए क्लियरफील्ड प्रोडक्शन सिस्टम लॉन्च करके खुश है. खेती दुनिया का सबसे बड़ा काम है, यह पल हमारे किसानों और भारतीय खेती के भविष्य के लिए सालों के कमिटमेंट को दिखाता है. वहीं, कॉर्टेवा एग्रीसाइंस के साउथ एशिया प्रेसिडेंट सुब्रतो गीद ने कहा कि क्लियरफील्ड मस्टर्ड प्रोडक्शन सिस्टम भारतीय खेती के लिए खासकर हमारे सरसों किसानों के लिए अहम है. क्लियरफील्ड मस्टर्ड में कॉर्टेवा का साइंस बेस्ड इनोवेशन एक पावरफुल सॉल्यूशन देता है. यह किसानों के लिए फायदेमंद सरसों की खेती का एक नया स्टैंडर्ड सेट करता है.

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