गुड़ और बेसन से बनाएं खाद, फसल में फूंक देगी जान.. एक साल तक खेत में नहीं डालना पड़ेगा उर्वरक

अधिक पैदावार के लिए बेहतर तरीका यह है कि मिट्टी की जांच कराएं और उसकी जरूरत के अनुसार ही पोषक तत्व का इस्तेमाल करें. इससे न सिर्फ फसल अच्छी होगी, बल्कि मिट्टी भी स्वस्थ रहेगी.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 6 Oct, 2025 | 01:13 PM

Jeevamrit: पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में किसान धान की कटाई कर रहे हैं, लेकिन अभी से ही डीएपी के लिए खाद क्रय केंद्रों पर भीड़ लगनी शुरू हो गई है. कई ऐसे भी किसान हैं, जो गेहूं बुवाई शुरू करने से बहुत पहले ही अपने घर में डीएपी को स्टॉक कर लेना चाहते हैं. क्योंकि किसानों को लगता है कि डीएपी का छिड़काव करने से ही गेहूं की पैदावार अच्छी होगी. इसलिए किसान गेहूं बुवाई करते समय अधिक मात्रा में डीएपी का इस्तेमाल करना चाहते हैं. लेकिन किसानों को मालूम होना चाहिए कि जरूरत से ज्यादा डीएपी का इस्तमाल गेहूं या किसी भी फसल के लिए नुकसानदेह हो सकता है. इससे पैदावार में गिरावट भी आ सकती है. इसलिए किसान डीएपी की जगह देसी खाद का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे उपज भी बेहतर होगी और मिट्टी के हेल्थ में भी सुधार आएगा.

कृषि विशेषज्ञ के मुताबिक, हर किसान चाहता है कि उसकी खेती से ज्यादा पैदावार हो, ताकि मुनाफा बढ़े. ज्यादातर किसान डीएपी उर्वरक  को अपनी खेती की नींव मानते हैं, लेकिन उन्हें पता नहीं होता कि जरूरत से ज्यादा डीएपी इस्तेमाल करना उनकी फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है. खासकर ठंड के मौसम में फसलें अच्छी होती हैं, लेकिन ज्यादा डीएपी देने से मिट्टी की उर्वरता  कम हो जाती है और फसल की गुणवत्ता भी खराब हो सकती है. क्योंकि डीएपी में नाइट्रोजन और फास्फोरस की मात्रा ज्यादा होती है, जो मिट्टी का संतुलन बिगाड़ सकती है.

मिट्टी के हेल्थ में भी होगा सुधार

ऐसे में अधिक पैदावार के लिए बेहतर तरीका यह है कि मिट्टी की जांच कराएं और उसकी जरूरत के अनुसार ही पोषक तत्व का इस्तेमाल करें. इससे न सिर्फ फसल अच्छी होगी, बल्कि मिट्टी भी स्वस्थ रहेगी. एक्सपर्ट का कहना है कि कम खर्च में ज्यादा पैदावार के लिए जीवामृत  एक बेहतरीन उपाय है. यह खेती के लिए बहुत फायदेमंद होता है. जीवामृत बनाने के लिए गाय का मूत्र, गाय का गोबर, बेसन, गुड़ और खेत की मिट्टी चाहिए होती है.

इस तरह घर पर तैयार करें जीवामृत

इसके लिए 10 किलो गाय का मूत्र और गोबर लें, उसमें 1 किलो बेसन, मिट्टी और गुड़ मिलाएं और छायादार जगह पर रख दें. दिन में एक बार लंबे डंडे से अच्छी तरह मिलाएं. लगभग सात दिन में यह तैयार हो जाता है. गाय के गोबर वाली इस खाद में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटैशियम जैसे जरूरी पोषक तत्व होते हैं. यह खाद सिर्फ इस साल की फसल के लिए ही नहीं, बल्कि अगले साल भी खेत की मिट्टी को उपजाऊ  बनाकर रखती है. यानी अगर आप चाहें, तो खेत में खाद भी नहीं डाल सकते हैं.

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Published: 6 Oct, 2025 | 01:10 PM
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