गेहूं में कल्ले की संख्या बढ़ाने का धांसू फॉर्मूला, चूना पानी के साथ इस चीज का करें छिड़काव.. फिर देखें कमाल
ऐसे भी गेहूं की फसल में समय पर और सही मात्रा में सिंचाई करना बहुत जरूरी है. इससे पौधों की बढ़वार तेज होती है और पैदावार भी बढ़ती है. सिंचाई का सीधा असर जड़ों के विकास, पौधों की मजबूती और दाने की गुणवत्ता पर पड़ता है.
Wheat Farming: मकर संक्रांति के बाद धीरे-धीरे ठंड और शीतलहर का असर कम हो रहा है. ऐसे में गेहूं किसानों को विशेष तैयारी करने की जरूरत है. क्योंकि बिहार और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में गेहूं की फसल अब टिलरिंग अवस्था में पहुंच गई है. यानी गेहूं के एक पौधे से कई शाखाएं (कल्ले) निकल रही है. इसलिए इस दौरान तेजी से विकास के लिए पौधों को ज्यादा पोषण की जरूरत होती है. ऐसे भी जनवरी का महीना टिलरिंग के लिए खास होता है. अगर किसान इस दौरान पौधों को सही पोषण देंगे, तो टिलरिंग मजबूत होंगी. ऐसे में अच्छी पैदावार होगी, जिससे किसान बंपर कमाई कर पाएंगे.
कृषि एक्सपर्ट के मुताबिक, इस समय गेहूं की फसल टिलरिंग अवस्था में है, जो बोवाई के करीब 40- 45 दिन बाद आती है. इस चरण पर दूसरी सिंचाई बहुत जरूरी होती है. सही समय पर पानी देने से पौधों में टिलर्स की संख्या कई गुना तक बढ़ सकती है और आगे चलकर पैदावार बेहतर होती है. यूरिया की सीमित उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए किसानों को पत्तियों पर छिड़काव करने की सलाह दी गई है. इसके लिए 100 लीटर पानी में 2 किलो यूरिया घोलें और उसमें 500 ग्राम जिंक सल्फेट व चूने का पानी मिलाएं. इस घोल के छिड़काव से फसल को नाइट्रोजन, जिंक और कैल्शियम मिलते हैं और सिर्फ 10 किलो यूरिया प्रति हेक्टेयर से ही पोषक तत्वों की जरूरत पूरी हो जाती है.
सही मात्रा में सिंचाई करना बहुत जरूरी
ऐसे भी गेहूं की फसल में समय पर और सही मात्रा में सिंचाई करना बहुत जरूरी है. इससे पौधों की बढ़वार तेज होती है और पैदावार भी बढ़ती है. सिंचाई का सीधा असर जड़ों के विकास, पौधों की मजबूती और दाने की गुणवत्ता पर पड़ता है. विशेषज्ञों के अनुसार पहली सिंचाई अंकुरण के बाद नमी बनाए रखने के लिए जरूरी होती है, जबकि दूसरी और तीसरी सिंचाई फसल की बढ़त और मजबूत कल्ले बनाने में मदद करती हैं. सही समय और अंतराल पर सिंचाई करने से गेहूं का दाना मोटा, भरा हुआ और बेहतर गुणवत्ता का बनता है.
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कितनी बार करें गेहूं की सिंचाई
गेहूं की फसल में आमतौर पर 3 से 4 सिंचाई की जाती है, लेकिन सबसे जरूरी है सही समय पर पानी देना. पहली सिंचाई बुवाई के 20-25 दिन बाद, दूसरी 40-45 दिन पर और तीसरी 60-65 दिन पर करनी चाहिए, ताकि फसल का विकास सही ढंग से हो सके. सिंचाई हमेशा हल्की करें और खेत में पानी भरने न दें. अगर पहले बारिश हो चुकी हो तो सिंचाई कुछ दिन आगे बढ़ाई जा सकती है. जरूरत से ज्यादा पानी देने से जड़ें सड़ सकती हैं, पौधों की बढ़वार रुक जाती है और दाना पतला व कमजोर बनता है.