Kharif Fertilizer Target: खरीफ सीजन से पहले खाद आपूर्ति को लेकर सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में है. देश में किसानों को समय पर उर्वरक मिले और उत्पादन पर कोई असर न पड़े, इसके लिए मई महीने में 34 लाख टन उत्पादन का बड़ा लक्ष्य तय किया गया है. LNG सप्लाई में सुधार के बाद बंद पड़े उर्वरक कारखानों के फिर से शुरू होने से आपूर्ति व्यवस्था और मजबूत होने की उम्मीद है, जिससे खरीफ की बुवाई बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सकेगी.
मई में 34 लाख टन उर्वरक उत्पादन का लक्ष्य
सरकार ने मई महीने के लिए कुल 34 लाख टन उर्वरक उत्पादन का लक्ष्य तय किया है. इसमें शामिल हैं:
- 22 लाख टन यूरिया
- 4 लाख टन डीएपी
- 8 लाख टन एनपीके
इस उत्पादन लक्ष्य के जरिए खरीफ सीजन की शुरुआती मांग को पूरा करने की तैयारी की जा रही है.
गैस सप्लाई सुधरने से बढ़ेगा यूरिया उत्पादन
उर्वरक विभाग के अनुसार, हाल ही में अमेरिका-ईरान तनाव के कारण एलएनजी सप्लाई प्रभावित हुई थी, जिससे कई उर्वरक कारखानों का उत्पादन रुक गया था. लेकिन अब स्थिति सामान्य हो चुकी है.
- मार्च में यूरिया उत्पादन घटकर 16.5 लाख टन रह गया था
- अप्रैल में यह बढ़कर 20.9 लाख टन तक पहुंच गया
- अब लक्ष्य इसे 22 लाख टन तक ले जाने का है
गैस सप्लाई में सुधार से बंद पड़े यूरिया संयंत्र फिर से सक्रिय हो गए हैं, जिससे उत्पादन में तेजी आने की उम्मीद है.
विदेशों से बड़ी मात्रा में खाद का आयात
घरेलू उत्पादन के साथ-साथ सरकार आयात पर भी ध्यान दे रही है ताकि किसी भी तरह की कमी न हो.
- 25 लाख टन यूरिया का आयात
- 19 लाख टन एनपीके का आयात
इसके लिए वैश्विक टेंडर जारी किए गए हैं. उम्मीद है कि यह आपूर्ति मई और जून के दौरान भारत पहुंचेगी, जिससे भंडार और मजबूत होगा.
खरीफ सीजन की बड़ी जरूरत और भंडारण स्थिति
कृषि विभाग के अनुसार आगामी खरीफ सीजन में लगभग 390.5 लाख टन उर्वरक की आवश्यकता होने का अनुमान है. हालांकि राहत की बात यह है कि करीब 50 फीसदी उर्वरक पहले से ही राज्यों के पास उपलब्ध है और अब तक 84 लाख टन खाद का अतिरिक्त भंडारण भी किया जा चुका है. मौजूदा स्थिति में उर्वरकों की उपलब्धता मांग से अधिक बनी हुई है, जिससे किसानों को किसी भी प्रकार की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा और खेती-किसानी का काम सुचारू रूप से चलता रहेगा.
किसानों पर नहीं बढ़ेगा बोझ
वैश्विक बाजार में उर्वरक की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद सरकार ने किसानों को राहत दी है.
- यूरिया (45 किलो बैग) – 266.50 रुपये में उपलब्ध
- डीएपी (50 किलो बैग) – 1350 रुपये में उपलब्ध
अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमत 4000 रुपये से भी अधिक है, लेकिन सरकार सब्सिडी देकर किसानों को सस्ती दर पर खाद उपलब्ध करा रही है. हालांकि, इससे सरकारी सब्सिडी का बोझ बढ़ सकता है, लेकिन किसानों की कीमतें स्थिर रखी जाएंगी.