एमपी में MSP पर नहीं हो रही गेहूं खरीद? जीतू पटवारी ने सरकार पर लगाए घोटाले के आरोप

मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. विपक्ष ने धीमी खरीद, स्लॉट बुकिंग में गड़बड़ी और भुगतान में देरी के आरोप लगाए हैं. इससे किसानों को अपनी फसल बेचने में दिक्कत हो रही है. सरकार के लक्ष्य और व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिससे चिंता बढ़ी है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Updated On: 25 Apr, 2026 | 03:57 PM

Wheat Procurement: मध्य प्रदेश में रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं खरीदी शुरू होते ही सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. एक ओर सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP 2,585 रुपये) के साथ बोनस देकर किसानों को राहत देने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने खरीदी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया है कि खरीदी की रफ्तार बेहद धीमी है और इससे किसानों को नुकसान हो सकता है.  इसके साथ ही उन्होंने गेहूं खरीद में घोटाले के भी आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार ने 2700 रुपये देने का वादा किया, लेकिन करीब 2600 रुपये-2625 रुपये में खरीदी कर किसानों के साथ धोखा किया. उनका कहना है कि मौजूदा हालात में सरकार का लक्ष्य पूरा होना मुश्किल दिख रहा है.

धीमी खरीदी पर सवाल, लक्ष्य से पीछे सरकार

जीतू पटवारी का आरोप है कि 14 दिनों में सिर्फ 9.51 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी  हुई है, जो तय लक्ष्य के मुकाबले काफी कम है. सरकार ने इस साल करीब 80 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है. पटवारी के अनुसार, इस धीमी रफ्तार से लक्ष्य पूरा करना मुश्किल है और इससे लाखों किसानों को अपनी फसल बेचने में परेशानी हो सकती है. उन्होंने इसे किसानों के साथ धोखाधड़ी तक करार दिया है.

स्लॉट बुकिंग में गड़बड़ी के आरोप

खरीदी प्रक्रिया  में स्लॉट बुकिंग को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाए हैं. जीतू पटवारी का कहना है कि आम किसानों को स्लॉट बुक करने में दिक्कत हो रही है, जिससे उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है. वहीं उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ खास लोगों का गेहूं बिना स्लॉट बुकिंग के ही खरीदा जा रहा है. इससे व्यवस्था की पारदर्शिता  पर सवाल खड़े हो रहे हैं और किसानों में नाराजगी बढ़ रही है.

बारदाने की कमी से बढ़ी परेशानी

खरीदी केंद्रों पर बारदाने (बोरियों) की कमी भी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है. कई जगह किसानों को अपनी फसल लेकर घंटों इंतजार करना पड़ रहा है. विपक्ष का कहना है कि सरकार ने पर्याप्त तैयारी  नहीं की, जिसके कारण किसानों को समय पर अपनी उपज बेचने में दिक्कत हो रही है. इससे न सिर्फ समय की बर्बादी हो रही है, बल्कि किसानों को आर्थिक नुकसान का भी खतरा है.

गेहूं खरीदी को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप

प्रदेश में गेहूं खरीदी को लेकर विपक्ष ने सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. जीतू पटवारी ने कहा कि सरकार ने 2700 रुपये देने का वादा किया, लेकिन करीब 2600 रुपये-2625 रुपये में खरीदी कर किसानों के साथ धोखा किया. उन्होंने बारदाने की कमी, खरीदी में करीब 30 दिन की देरी और खराब प्लानिंग को बड़ा घोटाला बताया. आरोप है कि पोर्टल बार-बार बंद किया गया, जिससे किसानों के आवेदन स्वीकार नहीं हुए. साथ ही छोटे-बड़े किसानों में भेदभाव किया गया. पटवारी का कहना है कि मजबूरी में करीब 50 फीसदी किसानों ने गेहूं खुले बाजार में 1800 रुपये-2000 रुपये के कम दाम पर बेचा, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा.

भुगतान और अनियमितताओं पर भी उठे सवाल

खरीदी केंद्रों पर अनियमितताओं को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं. जीतू पटवारी के मुताबिक, कई जगह पहले गेहूं की तुलाई  कर ली जाती है, लेकिन बाद में कागजी कारण बताकर भुगतान रोक दिया जाता है. इससे किसानों को पैसों के लिए इंतजार करना पड़ रहा है, जो उनके लिए बड़ी परेशानी का कारण बन रहा है. किसानों का कहना है कि समय पर भुगतान नहीं मिलने से उनकी अगली फसल की तैयारी भी प्रभावित हो रही है.

सरकार का दावा

वहीं दुसरी तरफ मध्य प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत (Govind Singh Rajput) के अनुसार, राज्य में गेहूं खरीदी तेजी से जारी है. पिछले हफ्ते उन्होंने बताया कि गेहूं खरीदी अब तक 1 लाख 45 हजार 71 किसानों से 63 लाख 27 हजार 410 क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है. इसके बदले किसानों के बैंक खातों में 920 करोड़ 7 लाख रुपये सीधे ट्रांसफर किए गए हैं. सरकार का कहना है कि किसानों को समय पर भुगतान देना उसकी प्राथमिकता है. वहीं 5 लाख 36 हजार 367 किसानों ने 2 करोड़ 25 लाख 96 हजार 450 क्विंटल गेहूं बेचने के लिए स्लॉट बुक  कर लिया है, जिससे आने वाले दिनों में खरीदी और तेज़ होने की उम्मीद है.

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Published: 25 Apr, 2026 | 03:06 PM
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