Paddy Procurement: ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में जहां बंपर धान की खरीदी हुई है, वहीं जगतसिंहपुर जिले में नोडल अधिकारियों (MNOs) की खिलाफ कड़ी कार्रवाई हुई है. कहा जा रहा है कि धान खरीद केंद्रों में बिना अनुमति अनुपस्थित रहने के कारण 69 मंडी नोडल अधिकारियों की मार्च माह की सैलरी रोक दी गई है. जिले प्रशासन ने मंगलवार को उन्हें नोटिस जारी किया और तीन दिन के भीतर जवाब देने को कहा.
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में कुल 115 PPCs, 106 प्राइमरी एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव सोसाइटीज (PACS) और 9 महिला स्वयं सहायता समूह किसानों से धान खरीदने में लगे हुए हैं. प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के निर्देशों के बावजूद कई नोडल अधिकारी समय पर खरीद केंद्रों पर नहीं पहुंचे, जिससे निगरानी की कमी के कारण अनियमितताएं सामने आईं. ऐसे में निगरानी की कमी के चलते यह आरोप उठे हैं कि मंडी स्टाफ और मिल मालिक गरीब किसानों को डराते हैं, धान के लेन-देन में उन्हें ठगते हैं, सरकारी नियमों का उल्लंघन करते हैं और योजनाओं का दुरुपयोग कर रहे हैं. किसानों ने प्रति क्विंटल 4-6 किलो धान की अवैध कटौती और परेशानियों की भी शिकायत की है.
तीन दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया
धान खरीद में अनियमितताओं को रोकने के लिए प्रशासन ने MNOs को मंडी दिनों में नियमित निरीक्षण करने का निर्देश दिया था. लेकिन P-PAS पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, 69 MNOs 12 से 20 फरवरी के बीच अनुपस्थित रहे. कलेक्टर जे. सोनल ने MNOs से तीन दिन के भीतर अपने जवाब देने को कहा है. अगर वे जवाब नहीं देते हैं, तो माना जाएगा कि उनके पास कहने के लिए कुछ नहीं है और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी.
लगभग 500 बोरी धान जब्त किए गए
जिला सिविल सप्लाइज अधिकारी जितराया चरण टुडु ने कहा कि प्रशासन ने यह कदम धान की खरीद को सुचारू रूप से सुनिश्चित करने के लिए उठाया है. कलेक्टर के निर्देश के अनुसार संबंधित अधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई करने के लिए निर्देश दिए गए हैं. पिछले महीने जिला प्रशासन ने बालिकुड़ा पुलिस क्षेत्र के तितिरा गांव में एक व्यापारी द्वारा कथित रूप से जमा किए गए लगभग 500 बोरी धान जब्त किए. इसी तरह, तिरटोल में कुछ और व्यापारीयों से 200 बोरी धान जब्त किए गए, जिन्हें किसानों से 1,500 से 1,800 रुपये प्रति क्विंटल में खरीदा गया था, जो न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी कम है.
वास्तविक खरीद 2024-25 के आंकड़े से आगे निकल गई
वहीं, सुदूरवर्ती आदिवासी बहुल सुंदरगढ़ जिले में इस साल वास्तविक खरीद 2024-25 के आंकड़े से आगे निकल गई है और 27.71 लाख क्विंटल के बढ़ाए गए लक्ष्य के करीब पहुंच गई है. अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार तक कुल 26,03,405 क्विंटल धान खरीदी जा चुकी थी. 2025-26 के खरीफ मार्केटिंग सीजन (KMS) की खरीद 15 दिसंबर, 2025 से शुरू हुई थी, जिसमें पहले चरण का लक्ष्य 16.41 लाख क्विंटल धान था. अब तक कुल 55,916 किसानों से 26,03,405 क्विंटल खरीदी जा चुकी है, जबकि कुल 61,331 पंजीकृत किसानों में से अभी 5,415 किसान बचे हैं. 2024-25 में सुंदरगढ़ में करीब 24.35 लाख क्विंटल धान खरीदा गया था.
नई खरीद का लक्ष्य 11.30 लाख क्विंटल तय किया गया
पहले चरण के 16.41 लाख क्विंटल लक्ष्य पूरा होने के बाद, नई खरीद का लक्ष्य 11.30 लाख क्विंटल तय किया गया है. अब तक बाकी 5,415 किसानों से 1.71 लाख क्विंटल धान खरीदी जानी है. जरूरत पड़ने पर सभी पंजीकृत किसानों को शामिल करने के लिए लक्ष्य बढ़ाया जा सकता है. हालांकि इस सीजन में खरीद का आंकड़ा प्रभावशाली रहा है, लेकिन कुछ मंडियों में किसानों को अपने धान बेचने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा. इस देरी का कारण धान खरीद केंद्रों (PPCs) पर अधिक बोझ बताया गया है.
10 दिनों में धान खरीद पूरी होने की संभावना है
कुछ मामलों में किसानों के टोकन की वैधता समाप्त हो गई और उन्हें अपना उत्पादन बेचने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया. मंगलवार तक, सुंदरगढ़ जिले के कुल 133 धान खरीद केंद्रों (PPCs) में से 64 केंद्र बंद कर दिए गए हैं, क्योंकि इन मंडियों से जुड़े किसानों के पास अब धान की खेप खत्म हो चुकी है. सुदंरगढ़ के मुख्य सिविल सप्लाइज अधिकारी अजय राठ ने बताया कि अगले 10 दिनों में धान खरीद पूरी होने की संभावना है.