पंजाब में पराली जलाने पर लगेगी लगाम, केंद्र से 576 करोड़ की मदद, किसानों को मिलेगी सब्सिडी

इस योजना के तहत किसानों को पराली प्रबंधन के लिए मशीनों पर भारी सब्सिडी दी जा रही है. व्यक्तिगत किसानों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलेगी, जबकि किसान समूह, कस्टम हायरिंग सेंटर, ग्राम पंचायत और सहकारी समितियों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी. इससे किसान बिना पराली जलाए खेत साफ कर सकेंगे और पर्यावरण को नुकसान भी नहीं होगा.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 24 Apr, 2026 | 01:54 PM

Punjab stubble burning scheme: पंजाब में हर साल धान-गेहूं की कटाई के बाद पराली जलाने की समस्या सामने आती है, जिसका असर सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रहता बल्कि दिल्ली-एनसीआर तक प्रदूषण बढ़ जाता है. इसी चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने इस बार एक बड़ा कदम उठाया है. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2026 में पंजाब को फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) के लिए 576 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. यह लगातार नौवां साल है जब केंद्र इस दिशा में राज्य की मदद कर रहा है.

पराली प्रबंधन को मिला सबसे बड़ा हिस्सा

इस बार मिला 576 करोड़ रुपये का बजट पंजाब के कृषि क्षेत्र के कुल फंड का करीब 58 प्रतिशत हिस्सा है. इससे यह साफ है कि सरकार पराली जलाने की समस्या को लेकर कितनी गंभीर है. राज्य कृषि विभाग अब इस फंड के इस्तेमाल के लिए विस्तृत योजना तैयार करेगा. इसमें किसानों को आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराना, पराली प्रबंधन के तरीके सिखाना और जागरूकता अभियान चलाना शामिल होगा.

क्यों होती है पराली जलाने की समस्या

पंजाब और हरियाणा में धान की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई के लिए बहुत कम समय मिलता है. ऐसे में किसान खेत को जल्दी साफ करने के लिए पराली जला देते हैं. यह तरीका आसान और सस्ता जरूर है, लेकिन इससे हवा में जहरीला धुआं फैलता है, जिससे प्रदूषण का स्तर अचानक बढ़ जाता है. अक्टूबर और नवंबर में यही धुआं दिल्ली-एनसीआर तक पहुंचता है.

किसानों को मिलेगी सब्सिडी वाली मशीनें

इस योजना के तहत किसानों को पराली प्रबंधन के लिए मशीनों पर भारी सब्सिडी दी जा रही है. व्यक्तिगत किसानों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलेगी, जबकि किसान समूह, कस्टम हायरिंग सेंटर, ग्राम पंचायत और सहकारी समितियों को 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी. इससे किसान बिना पराली जलाए खेत साफ कर सकेंगे और पर्यावरण को नुकसान भी नहीं होगा.

23 हजार नई मशीनें देने का लक्ष्य

इस साल पंजाब सरकार ने 23,000 नई मशीनें किसानों को देने का लक्ष्य तय किया है. इन मशीनों में सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, स्मार्ट सीडर, सरफेस मल्चर, रिवर्स प्लाऊ, चॉपर और जीरो-टिल ड्रिल जैसी तकनीक शामिल हैं, जो खेत में ही पराली को नष्ट या उपयोग करने में मदद करती हैं. इसके अलावा बेलर, रेक और टेडर जैसी मशीनें भी दी जाएंगी, जिनसे पराली को इकट्ठा कर अन्य उपयोग में लाया जा सकता है.

पुरानी मशीनें हो रही हैं बेकार

अब तक राज्य में करीब 1.6 लाख मशीनें किसानों को दी जा चुकी हैं. लेकिन इनमें से लगभग 40,000 मशीनें अब पुरानी हो चुकी हैं और उनका उपयोग कम हो गया है. अधिकारियों के अनुसार, इन मशीनों की उम्र आमतौर पर 5 से 6 साल होती है, इसलिए अब नई मशीनों की जरूरत महसूस की जा रही है.

केंद्र और राज्य मिलकर कर रहे खर्च

2018 से लेकर 2022 तक इस योजना का पूरा खर्च केंद्र सरकार उठाती थी. लेकिन 2023 से नियमों में बदलाव किया गया है. अब कुल खर्च का 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार को देना होता है. इस साल पंजाब सरकार करीब 230 करोड़ रुपये अपने स्तर से खर्च करेगी, जबकि बाकी राशि केंद्र देगा. पिछले आठ सालों में केंद्र सरकार इस योजना पर करीब 2,000 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है.

पराली जलाने के मामलों में आई भारी कमी

सरकार के प्रयासों का असर भी जमीन पर दिखने लगा है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं पिछले चार साल में 94 प्रतिशत तक कम हुई हैं. जहां 2022 में करीब 83,000 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर 5,114 रह गई. यह एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है.

पराली अब बन रही कमाई का जरिया

अब किसान पराली को जलाने के बजाय बेचकर भी कमाई कर रहे हैं. सीजन के दौरान पराली की कीमत 100 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रही है. इसके अलावा गांवों में कुछ लोग पराली इकट्ठा कर बेचने का काम कर रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय हो रही है. इससे किसानों का नजरिया भी धीरे-धीरे बदल रहा है.

प्रदूषण नियंत्रण के लिए जरूरी कदम

पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण एक राष्ट्रीय समस्या बन चुका है. इसी वजह से इस योजना को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की मंजूरी भी मिली है. सरकार का मानना है कि मशीनों और जागरूकता के जरिए इस समस्या को काफी हद तक खत्म किया जा सकता है.

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