Telangana Paneer Ban 2026: पनीर खाने वालों के लिए तेलंगाना से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है. तेलंगाना स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी फॉर फूड एंड एसेंशियल ड्रग्स (TG SAFE) ने राज्य में डेयरी से नहीं बने यानी एनालॉग पनीर के उत्पादन और बिक्री पर रोक लगा दी है. यह रोक 10 सितंबर 2026 से लागू हो चुकी है और अगले एक साल तक रहेगी. इस फैसले के बाद होटल, रेस्टोरेंट और दूसरी जगहों पर इस्तेमाल होने वाले पनीर को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं.
किन चीजों पर लगी रोक?
TG SAFE ने एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर के निर्माण, प्रोसेसिंग, पैकिंग, स्टोरेज, वितरण और बिक्री पर बैन लगाया है. ऐसे उत्पाद देखने में सामान्य दूध से बने पनीर जैसे ही लगते हैं, लेकिन इन्हें पूरी तरह या बड़े स्तर पर डेयरी दूध की जगह दूसरे विकल्पों से तैयार किया जाता है. इनमें वेजिटेबल फैट, खाने वाले तेल, स्टार्च और दूसरे नॉन-डेयरी पदार्थों का इस्तेमाल किया जा सकता है. कई बार इन चीजों को इस तरह तैयार किया जाता है कि उनका स्वाद, बनावट और दिखने का तरीका असली पनीर जैसा लगे.
सस्ता होने के कारण बढ़ा इस्तेमाल
एनालॉग पनीर की कीमत आमतौर पर पारंपरिक डेयरी पनीर से कम होती है. इसी वजह से बड़े पैमाने पर खाना बनाने वाले होटल, रेस्टोरेंट और दूसरी फूड सर्विस जगहों के लिए यह एक सस्ता विकल्प बन जाता है. हाल के महीनों में हैदराबाद में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की जांच के दौरान ऐसे कई मामले सामने आए, जहां होटल, रेस्टोरेंट और क्लाउड किचन में कथित तौर पर सस्ते एनालॉग पनीर का इस्तेमाल किया जा रहा था. परेशानी तब बढ़ती है जब ग्राहक को इसकी जानकारी दिए बिना इसे सामान्य पनीर के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है.
कई राज्यों में पहले ही हो चुकी है कार्रवाई
तेलंगाना ऐसा कदम उठाने वाला पहला राज्य नहीं है. महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश भी एनालॉग पनीर के खिलाफ कार्रवाई कर चुके हैं. इन राज्यों में उठाए गए कदमों के पीछे मुख्य चिंता यही है कि ग्राहक को यह साफ पता होना चाहिए कि उसे डेयरी पनीर दिया जा रहा है या किसी दूसरे पदार्थ से बना विकल्प.
FSSAI के नियम क्या कहते हैं?
यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है. देश की खाद्य सुरक्षा संस्था FSSAI एनालॉग डेयरी उत्पादों को पूरी तरह गैरकानूनी नहीं मानती. नियमों के मुताबिक ऐसे उत्पादों का निर्माण और बिक्री कुछ शर्तों के साथ की जा सकती है. सबसे अहम शर्त यह है कि उत्पाद की सही जानकारी लेबल पर दी जाए और उसे ‘पनीर’ नाम से बेचकर ग्राहक को भ्रमित न किया जाए. यानी अगर कोई उत्पाद डेयरी पनीर नहीं है, तो उसके बारे में ग्राहक को स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए.
मेन्यू में जानकारी न देने पर बढ़ती चिंता
समस्या खास तौर पर होटल और रेस्टोरेंट में दिखाई देती है. कई जगह मेन्यू में यह साफ नहीं बताया जाता कि किसी डिश में इस्तेमाल किया गया पनीर दूध से बना है या एनालॉग पनीर है. तेलंगाना का यह फैसला इसी तरह की स्थिति पर लगाम लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. इससे खाद्य कारोबारियों के लिए उत्पाद की सही जानकारी देना और ग्राहकों के लिए यह जानना आसान हो सकता है कि उनकी प्लेट में आखिर किस तरह का पनीर परोसा जा रहा है.