‘मशरूम मिशन’ का ऐलान, किसानों को सब्सिडी पर मिलेंगे 5,184 करोड़.. अब बढ़ेगी कमाई

यह प्रस्तावित योजना मुख्य रूप से छोटे और मध्यम स्तर के मशरूम उत्पादन यूनिट्स पर केंद्रित होगी, जिनका क्षेत्रफल लगभग 5,000 वर्ग फीट होगा. इसका मकसद ग्रामीण इलाकों में स्वरोजगार को बढ़ावा देना  और लोगों के लिए स्थायी आजीविका के नए अवसर पैदा करना है.

Kisan India
नोएडा | Published: 27 Apr, 2026 | 11:01 AM

Mushroom Mission: आंध्र प्रदेश में मशरूम की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा. इसके लिए मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की सरकार एक ‘मशरूम मिशन’ शुरू करने जा रही है. इस मिशन के तहत 13,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा. सरकार को उम्मीद है कि उसके इस फैसले से राज्य में मशरूम की खेती को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही सीमांत और छोटे किसानों की कमाई पहले से बेहतर होगी. वहीं, किसानों को 5,184 करोड़ रुपये सब्सिडी के रूप में दिए जाएंगे.

कहा जा रहा है कि देश में पहली बार इस तरह के ‘मशरूम मिशन’ की शुरुआत की गई है. इस मिशन का उदेश्य राज्य को भारत का सबसे बड़ा मशरूम उत्पादक बनाना है. मुख्यमंत्री के निर्देश पर अधिकारियों ने इस मिशन के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली है. कहा जा रहा है कि इस योजना की जल्द ही औपचारिक घोषणा की जाएगी. इसके तहत सालाना उत्पादन को बढ़ाकर 67,500 टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे बिहार को पीछे छोड़ा जा सकेगा, जो अभी करीब 45,000 टन उत्पादन के साथ देश में सबसे आगे है.

5,000 वर्ग फीट पर होगी मशरूम की खेती

यह प्रस्तावित योजना मुख्य रूप से छोटे और मध्यम स्तर के मशरूम उत्पादन यूनिट्स पर केंद्रित होगी, जिनका क्षेत्रफल लगभग 5,000 वर्ग फीट होगा. इसका मकसद ग्रामीण इलाकों में स्वरोजगार को बढ़ावा देना  और लोगों के लिए स्थायी आजीविका के नए अवसर पैदा करना है. इस परियोजना में लगभग 13,000 करोड़ रुपये के कुल निवेश में से करीब 5,184 करोड़ रुपये सब्सिडी के रूप में दिए जाएंगे. यह राशि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वहन करेंगी और यह कुल लागत का लगभग 40 फीसदी हिस्सा होगा.

1.62 लाख मशरूम उत्पादन यूनिट्स

इस मिशन के तहत पूरे राज्य में करीब 1.62 लाख मशरूम उत्पादन और व्यवसाय यूनिट्स स्थापित करने की योजना है. इसके साथ ही कुछ बड़े पैमाने की यूनिट्स भी बनाई जाएंगी, ताकि आपूर्ति और प्रोसेसिंग सिस्टम को मजबूत किया जा सके. राज्य सरकार अपने मजबूत स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के नेटवर्क का भी उपयोग करेगी, ताकि गांवों में मशरूम की खेती को बढ़ावा मिले और ग्रामीण महिलाओं व छोटे उद्यमियों को रोजगार और आय के नए अवसर मिल सकें.

मशरूम की इन किस्मों को बढ़ावा

इस मिशन में उन मशरूम किस्मों पर ध्यान दिया जाएगा जिनकी बाजार में ज्यादा मांग है, जैसे मिल्की मशरूम, पैडी स्ट्रॉ मशरूम और बटन मशरूम. मिल्की मशरूम खास है क्योंकि यह ज्यादा गर्मी में भी आसानी से उग जाता है. सरकार इन मशरूमों को कृषि उत्पाद की श्रेणी में शामिल करने की भी योजना बना रही है, ताकि किसानों को सरकार की तरफ से मदद मिले और उन्हें अपने उत्पाद बेचने के लिए बेहतर बाजार मिल सके.

मशरूम की मांग लगातार बढ़ रही है

यह परियोजना सिर्फ देश की मांग पूरी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें निर्यात की भी बड़ी संभावनाएं देखी जा रही हैं, खासकर खाड़ी देशों में, जहां मशरूम की मांग लगातार बढ़ रही है. अधिकारियों का मानना है कि यह पहल मिलेट्स (श्री अन्न) के प्रचार कार्यक्रम की तरह सफल हो सकती है और राज्य में एक नया कृषि-आधारित वैल्यू चेन विकसित कर सकती है.

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