कर्नाटक में कम बारिश का असर प्याज की कीमतों पर दिखने लगा है. त्योहारों का सीजन नजदीक आने के साथ प्याज के दाम बढ़ गए हैं. थोक बाजार में प्याज की कीमत 30-45 रुपये से बढ़कर ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है, जबकि खुदरा बाजार में इसका भाव 50 रुपये से बढ़कर 60-65 रुपये प्रति किलो हो गया है. कारोबारियों का कहना है कि अगर मांग बढ़ती रही और सप्लाई सीमित रही, तो गणेश उत्सव तक प्याज की कीमत 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है.
बेंगलुरु प्याज और आलू व्यापारी संघ के सचिव रविशंकर ने द हिंदू को कहा कि खरीफ सीजन में जून-जुलाई के दौरान चित्रदुर्ग, गडग, हावेरी, बेलगावी, बागलकोट और विजयपुरा जिलों में किसान प्याज की बुवाई करते हैं. लेकिन इस साल इन इलाकों में बारिश की कमी के कारण प्याज की फसल को नुकसान हुआ और किसानों को पर्याप्त उत्पादन नहीं मिल सका. इसका सीधा असर स्थानीय बाजारों में प्याज की सप्लाई पर पड़ा है. इन जिलों से बाजारों में प्याज की आवक कम होने के कारण कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है.
महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश से सप्लाई पर निर्भर कर्नाटक
रविशंकर ने कहा कि फिलहाल कर्नाटक के अलग-अलग बाजारों में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से प्याज की सप्लाई हो रही है. इन राज्यों के किसानों ने अप्रैल-मई में प्याज की फसल की कटाई कर उसे स्टोर कर लिया था. किसान अब बेहतर दाम मिलने की उम्मीद में धीरे-धीरे इस प्याज को कर्नाटक के बाजारों में भेज रहे हैं. उन्होंने कहा कि हर साल महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से कर्नाटक में प्याज की आवक होती है. महाराष्ट्र में प्याज किसानों के लिए सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई स्टोरेज सुविधाएं कर्नाटक की तुलना में बेहतर हैं. इसके अलावा कुछ किसानों के पास अपनी निजी भंडारण सुविधाएं भी हैं. रविशंकर के मुताबिक, प्याज की कीमत बढ़ने की एक वजह सिर्फ इसकी कीमत नहीं है, बल्कि दूसरे राज्यों से कर्नाटक तक प्याज पहुंचाने में आने वाली परिवहन लागत भी है. इससे बाजार में प्याज की कुल कीमत और बढ़ जाती है.
बारिश की कमी से प्याज की फसल बर्बाद
वहीं, बागलकोट के किसान अरविंद येलिगार ने कहा कि प्याज की फसल के लिए पर्याप्त पानी जरूरी होता है. हालांकि प्याज बहुत ज्यादा पानी वाली फसल नहीं है, लेकिन बारिश न होने पर खासकर उत्तर कर्नाटक के अर्ध-शुष्क इलाकों में बोरवेल भी सूखने लगते हैं. इसका असर जून-जुलाई में बोई गई प्याज की फसल पर पड़ा और कई इलाकों में फसल पूरी तरह खराब हो गई. उन्होंने कहा कि अगस्त में बारिश होने के बाद बागलकोट के किसानों ने दोबारा प्याज की बुवाई की है. अब किसान फसल के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं. उम्मीद है कि इस फसल की कटाई नवंबर में होगी.
महंगे प्याज और चावल से होटल कारोबार पर असर
प्याज के साथ-साथ चावल, पनीर, सब्जियों और दूसरी जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ने से होटल कारोबार पर भी दबाव बढ़ गया है. कर्नाटक स्टेट होटल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जी.के. शेट्टी ने कहा कि ज्यादातर होटल सितंबर की शुरुआत या बीच से खाने के दाम बढ़ा सकते हैं. कीमतों में बढ़ोतरी उस समय बाजार में खाद्य सामान के दाम पर निर्भर करेगी. उन्होंने कहा कि चावल और प्याज की बढ़ती कीमतों ने होटलों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है.