Bihar Dairy Department: बिहार सरकार का डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग अब गौपालन को आधुनिक बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है. गव्य विकास निदेशालय की ओर से किसानों और पशुपालकों को नई और उपयोगी तकनीकों की जानकारी दी जा रही है. सरकार का उद्देश्य है कि कम खर्च में पशुओं का बेहतर पालन हो और दूध उत्पादन बढ़ाया जा सके. ग्रामीण क्षेत्रों में अब पारंपरिक तरीकों के साथ नई तकनीकों को जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है. विभाग का मानना है कि अगर पशुपालक आधुनिक तकनीकों को अपनाएं तो पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी. इसी को ध्यान में रखते हुए कई नई योजनाएं और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं.
बिना मिट्टी के तैयार होगा हरा चारा
पशुपालन विभाग की ओर से हाइड्रोपोनिक तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है. इस तकनीक में बिना मिट्टी के सिर्फ पानी और पोषक तत्वों की मदद से हरा चारा उगाया जाता है. खास बात यह है कि यह चारा केवल 7 से 8 दिनों में तैयार हो जाता है और काफी पौष्टिक माना जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार इस तकनीक से कम जगह में भी बड़ी मात्रा में चारा तैयार किया जा सकता है. गर्मी या सूखे के समय जब हरे चारे की कमी होती है, तब यह तरीका पशुपालकों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. इससे पशुओं को पोषणयुक्त भोजन मिलेगा और दूध उत्पादन में भी सुधार आएगा.
गायों के खानपान पर रखी जाएगी नजर
विभाग की ओर से अब गायों के खानपान और स्वास्थ्य पर नजर रखने के लिए आधुनिक निगरानी उपकरणों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया जा रहा है. ये विशेष उपकरण बताते हैं कि गाय ने कितना चारा खाया, कितना पानी पिया और उसकी सेहत कैसी है. अगर किसी पशु की खाने-पीने की आदत में बदलाव दिखाई देता है तो तुरंत जानकारी मिल जाती है. इससे बीमारी का पता समय रहते लगाया जा सकता है. अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीक से पशुओं की देखभाल आसान होगी और बीमारी से होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सकेगा.
किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
बिहार सरकार का कहना है कि आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी. बेहतर पोषण मिलने से गायें स्वस्थ रहेंगी और दूध उत्पादन में बढ़ोतरी होगी. साथ ही पशुओं की बीमारी पर होने वाला खर्च भी कम होगा. सरकार गांव-गांव तक इन तकनीकों की जानकारी पहुंचाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रही है. पशुपालकों को यह बताया जा रहा है कि कम लागत में किस तरह आधुनिक तरीके अपनाकर ज्यादा लाभ कमाया जा सकता है. विभाग का मानना है कि आने वाले समय में बिहार का डेयरी क्षेत्र और मजबूत होगा. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान नई तकनीकों को सही तरीके से अपनाते हैं तो इससे न केवल पशुओं की सेहत सुधरेगी बल्कि राज्य में दूध उत्पादन भी तेजी से बढ़ेगा. बिहार सरकार की यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.