मुजफ्फरनगर के 118 तरह के गुड़, खाते ही मुंह में मक्खन की तरह घुल जाए.. पूरी दुनिया में डिमांड

मुजफ्फरनगर जिले में 3500 से ज्यादा कोल्हू गुड़ बनाते हैं, जिससे रोज करीब 80 हजार कट्टे गुड़ तैयार होता है. किसानों और व्यापारियों के पास 20 लाख टन गुड़ स्टोर करने की सुविधा है. मुजफ्फरनगर के गुड़ को साल 2023 में जीआई टैग का दर्जा मिला.

नोएडा | Published: 28 Sep, 2025 | 04:04 PM

Sugarcane cultivation: ऐसे तो पूरे देश में गन्ने की खेती होती है और गुड़ भी बनाया जाता है. लेकिन उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में उत्पादित गुड़ की बात ही अलग है. इसका स्वाद अपने आप में उमदा है, जो दूसरे राज्यों में बनाए जाने वाले गुड़ से अलग करता है. यही वजह है कि मुजफ्फरनगर के गुड़ को भौगोलिक संकेत (जीआई टैग) भी मिल गया है. इससे इस गुड़ की पूरी दुनिया में अलग पहचान मिली है. खास बात यह है कि जीआई टैग मिलने के बाद से मुजफ्फरनगर के गुड़ की मांग भारत ही नहीं, बल्कि दूसरे देशों में भी बढ़ गई है. इससे किसानों की अच्छी कमाई हो रही है. तो आइए आज जानते हैं मुजफ्फरनगर के गुड़ की खासियत के बारे में.

दरअसल, देश में सबसे अधिक गन्ने की खेती और गुड़ का उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है. इसमें भी मुजफ्फरपुर जिला अव्वल है. मुजफ्फरनगर की गुड़ मंडी  एशिया में बहुत मशहूर है. यहां बना गुड़ और शक्कर सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी पसंद किया जाता है. जीआई टैग मिलने के बाद गुड़ के कारोबार से गन्ना किसानों की आमदनी बढ़ी है और स्थानीय व्यापारी भी आर्थिक रूप से मजबूत  हुए हैं. खास बात यह है कि जिले में 118 तरह के गुड़ बनते हैं और सालाना करीब 4500 करोड़ रुपये का कारोबार होता है. यूपी सरकार ने ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ योजना में मुजफ्फरनगर के गुड़ को शामिल कर इसे दुनियाभर में पहचान दिलाई है.

20 लाख टन गुड़ स्टोर करने की है सुविधा

जिले में 3500 से ज्यादा कोल्हू गुड़ बनाते हैं, जिससे रोज करीब 80 हजार कट्टे गुड़ तैयार होता है. किसानों और व्यापारियों के पास 20 लाख टन गुड़ स्टोर करने की सुविधा है. मंडी समिति के अनुसार, मार्च 2025 में लखनऊ में होने वाले गुड़ महोत्सव में मुजफ्फरनगर के कई किसान और कंपनियां अपने गुड़ और उससे बने उत्पादों का प्रदर्शन किया था. यहां के किसानों का कहना है कि मुजफ्फरनगर का गुड़ मिठाई से कम नहीं है. मुंह में डालते ही मोम की तरह पिघल जाता है. इसका सेवन करने सी पाचन तंत्र भी मजबूत होता है.

मुजफ्फरनगर में गुड़ की थोक मंडी की शुरुआत 1954 में हुई

वहीं, अब जिले में गुड़ से बनने वाले दूसरे उत्पाद भी लोगों के लिए कमाई का नया जरिया बन रहे हैं. जिले में अब गुड़ से जुड़ा काम कुटीर उद्योग यानी छोटे घरेलू उद्योग का रूप लेता जा रहा है. मुजफ्फरनगर में गुड़ की थोक मंडी की शुरुआत 1954 में हुई थी, जिसे लोग गुड़ मंडी के नाम से जानते हैं. बाद में जगह की कमी के कारण 1976 में सरकार ने नई मंडी की स्थापना की. यहां से हर दिन अलग-अलग तरह के गन्ने से बने उत्पाद देश और विदेश भेजे जाते हैं.

गुड़ सेहत के लिए कई तरह से होता है फायदेमंद

गुड़ में मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट जैसे जरूरी पोषक तत्व होते हैं

मुजफ्फरनगर में कई तरह के गुड़ बनते हैं. जिसमें ठोस गुड़, पाउडर वाला गुड़ और तरल गुड़, चाकू गुड़, लड्डू गुड़, खुरपा और चौरसा गुड़ मुख्य हैं. ये सभी गुड़ बिना मिलावट और केमिकल के बनते हैं. इनमें एक खास तरह की मिठास और प्राकृतिक कारमेल जैसा स्वाद होता है. मुजफ्फरनगर का गुड़ चीनी का सेहतमंद विकल्प माना जाता है, क्योंकि इसमें आयरन, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट  जैसे जरूरी पोषक तत्व होते हैं.

किन देशों में होती है गुड़ की सप्लाई

उत्तर प्रदेश सरकार ने मुजफ्फरनगर के गुड़ को एक जिला-एक उत्पाद (ODOP) योजना में शामिल किया है, जिससे इसे देश और विदेश में खास पहचान मिली है. इसकी बेहतरीन क्वालिटी और अलग-अलग वैरायटी  की वजह से मुजफ्फरनगर का गुड़ भारत के कई राज्यों के साथ-साथ म्यांमार, नेपाल, अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में भी बड़ी मात्रा में भेजा जाता है. बता दें कि साल 2023-24 में जिले के अंदर एक लाख 76 हजार हेक्टेयर में गन्ने की बुवाई की गई थी.

कब मिला जीआई टैग का दर्जा

मुजफ्फरनगर के गुड़ को साल 2023 में भौगोलिक संकेत (जीआई) का दर्जा दिया गया है. ऐसे जीआई टैग का पूरा नाम Geographical Indication यानी भौगोलिक संकेत है. यह एक तरह का प्रमाणपत्र होता है जो यह बताता है कि कोई उत्पाद किसी खास क्षेत्र या भौगोलिक स्थान से जुड़ा हुआ है और उसकी विशिष्ट गुणवत्ता, पहचान या प्रतिष्ठा उस क्षेत्र की वजह से है.

खबर से जुड़े कुछ जरूरी आंकड़े

Topics: