बिहार सरकार ने पराली जलाने वाले किसानों पर सख्त एक्शन लिया है. आधिकारिक बयान में कहा गया है कि खेत में फसलों के अवशेष जलाने के दोषी पाए गए 1800 से ज्यादा किसानों को अलग-अलग योजना में मिलने वाली सब्सिडी पर रोक लगा दी गई है. इसके साथ ही डीबीटी के जरिए योजना का लाभ लेने के लिए रजिस्ट्रेशन पर भी रोक लगा दी गई है.
बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए केंद्र सरकार किसानों को पराली जलाने से मना करती है और ऐसा करने वाले किसानों को सरकारी योजनाओं से बाहर रखने का प्रावधान भी है. इसके तहत राज्य भी पराली जलाने पर किसानों को रोकते हैं. बिहार सरकार ने भी 2025 में एडवाइजरी जारी कर किसानों को खेत में फसल अवशेष यानी पराली जलाने पर रोक लगा रखी है. इसके बावजूद 1800 से ज्यादा किसान इसका उल्लंघन करते हुए पाए गए हैं और उन पर कार्रवाई की गई है.
पराली जलाने वाले 1800 से ज्यादा किसानों पर कार्रवाई
बिहार कृषि विभाग की और से विधानसभा में पेश की गई एक रिपोर्ट में कहा गया कि बिहार में 2025-26 में पराली जलाने की वजह से 1807 किसानों का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) रजिस्ट्रेशन रोक दिया गया है. फसल के बचे हुए हिस्से को जलाने के खिलाफ सरकार की एडवाइजरी का उल्लंघन करने की वजह से 2025 में 1,758 किसानों की सब्सिडी और इंसेंटिव रोक दिए गए थे. रिपोर्ट के मुताबिक इस साल अब तक इसी तरह के उल्लंघन की वजह से 49 और किसानों के DBT रजिस्ट्रेशन रोक दिए गए हैं. कहा गया है कि DBT किसानों को अलग-अलग एग्रीकल्चर स्कीम के तहत सीधे फाइनेंशियल मदद पाने में मदद करता है.
- Agriculture Budget: कृषि योजनाओं के लिए नहीं बढ़ा बजट, खेती पर खर्च होंगे 1.62 लाख करोड़ रुपये.. पढ़ें डिटेल्स
- Budget 2026: ‘विकसित भारत’ का दावा या जनता को धोखा? बजट पेश होते ही ममता से अखिलेश तक भड़के विपक्षी नेता!
- बजट में रिफॉर्म्स पर फोकस.. ग्रामीण विकास समेत इन सेक्टर्स को बूस्ट देने की घोषणाएं, पढ़ें- कृषि मंत्री ने क्या कहा
दोषी किसानों को सरकारी वित्तीय मदद और सब्सिडी नहीं मिलेगी
बिहार स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (BSPCB) के चेयरपर्सन देवेंद्र कुमार शुक्ला ने पीटीआई से कहा कि राज्य सरकार ने एयर पॉल्यूशन को रोकने और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को नुकसान से बचाने के लिए पराली जलाने पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार ने सख्त चेतावनी दी थी कि पराली जलाने वाले किसानों को सरकारी स्कीम के तहत फाइनेंशियल मदद और सब्सिडी नहीं दी जाएगी. राज्य किसानों को रियायती रेट पर बिजली और सब्सिडी वाले दामों पर डीजल और दूसरी मदद देता है.
पराली से बायोमास ब्रिकेट बनाने के लिए दी जा रही सब्सिडी
बिहार स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (BSPCB) चेयरपर्सन ने कहा कि सरकार ने जागरूकता कैंपेन शुरू किए हैं और पराली जलाने से रोकने के लिए खेती के इक्विपमेंट पर सब्सिडी दे रही है. उन्होंने कहा कि किसानों को बायोमास ब्रिकेट बनाने के लिए ग्रीन वेस्ट और दूसरे ऑर्गेनिक सामान बेचने के लिए भी बढ़ावा दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि बायोमास ब्रिकेट मुख्य रूप से ग्रीन वेस्ट और ऑर्गेनिक सामान से बने होते हैं. इनका इस्तेमाल खाना पकाने के फ्यूल के तौर पर किया जाता है. इन बायोमास ब्रिकेट को फैक्ट्रियों के ब्रॉयलर में ईंधन के रूप में जलाने में भी इस्तेमाल किया जा रहा है.
2024 में 4596 किसानों पर हुई थी कार्रवाई
हाल ही में विधानसभा में पेश किए गए बिहार इकोनॉमिक सर्वे (2025-26) में बताया गया है कि 2024 में 4,596 किसानों के DBT रजिस्ट्रेशन रोक दिए गए थे. हालांकि, पिछले साल की तुलना में 2025 में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं में कमी आई है. सर्वे में बताया गया है कि जिलावार अधिकारियों को पराली जलाने वाली हॉटस्पॉट पंचायतों में कड़ी निगरानी रखने का निर्देश दिए गए हैं. वहीं, कृषि विभाग ने फसल अवशेष जलाने के नुकसानदायक असर के बारे में किसानों और जनता में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक इंटर-डिपार्टमेंटल वर्किंग ग्रुप बनाया है.