Drone Technology: खेती अब सिर्फ मेहनत का नाम नहीं रह गई है, बल्कि तकनीक के साथ स्मार्ट बन गई है. किसान इंडिया से बातचीत के दौरान एग्रोटेक कंपनी कृषि विमान (Krishi Viman) के MD डॉ. शंकर गोयनका ने बताया कि कैसे ड्रोन खेती को तेज, सुरक्षित और किफायती बना रहे हैं. डॉ. गोयनका, जो भारतीय कृषि ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी हैं, किसानों और ग्रामीण युवाओं को ड्रोन समाधान, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्रदान करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. उनके अनुभव से किसान सीख सकते हैं कि कैसे ड्रोन समय, पानी और लागत बचाते हुए उत्पादन बढ़ा सकते हैं.
खेती में ड्रोन तकनीक
ड्रोन तकनीक का मतलब है छोटे, उड़ने वाले यंत्रों का इस्तेमाल करके खेतों में फसलों की निगरानी, छिड़काव और प्रबंधन करना. ये ड्रोन किसानों को हाथ से करने वाले कामों की जगह तेज और सटीक समाधान देते हैं. उदाहरण के लिए, ड्रोन से कीटनाशक या नाइट्रोजन खाद का छिड़काव केवल कुछ मिनटों में पूरा हो जाता है, जबकि हाथ से इसे करने में कई घंटे लगते हैं. इसके अलावा, ड्रोन से फसल की सेहत, मिट्टी की स्थिति और पानी की जरूरत जैसी जानकारियां आसानी से मिल जाती हैं.
ड्रोन से समय और संसाधनों की बचत
डॉ. गोयनका बताते हैं कि जिस किसान को एक एकड़ खेत में छिड़काव करने में चार घंटे लगते हैं, वही काम ड्रोन से मात्र 5-7 मिनट में पूरा हो जाता है. इससे पानी, समय और दवाई की बचत होती है. ड्रोन बूंदों को केवल पत्तों पर लक्षित करता है, जिससे औसत 30% दवाई की बचत होती है और फसल अधिक सुरक्षित रहती है.
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डॉ. गोयनका के अनुसार ड्रोन से छिड़काव करने पर किसान की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी कम होती हैं. सीधे कीटनाशक छिड़कते समय दवाई सूंघने से होने वाली बीमारियों और सांप के काटने के खतरे को ड्रोन कम कर देता है.

कृषि विमान के MD डॉ. शंकर गोयनका ने बताए ड्रोन तकनीक के फायदे (Photo Credit: Canva)
युवाओं के लिए रोजगार और अवसर
डॉ. गोयनका ने बताया कि गांव के युवा ड्रोन चलाकर न केवल अपने खेत में बल्कि दूसरों के खेतों में भी छिड़काव कर सकते हैं. इसके लिए कृषि विमान उन्हें प्रशिक्षण, फंडिंग और काम के अवसर प्रदान करता है. एक युवा ₹25,000 से ₹80,000 महीना कमा सकता है और अपने गांव में ही रहते हुए व्यवसाय कर सकता है.
आर्थिक और तकनीकी फायदे
ड्रोन महंगा लगता है, लेकिन MD के अनुसार, खरीदी के लिए केवल 10% निवेश चाहिए. बाकी फंडिंग 6% ब्याज पर उपलब्ध है. भारत में ड्रोन 200 दिन तक काम कर सकता है और केवल 100 दिन में भी किसान ₹15 लाख तक कमा सकते हैं. बैटरी चार्जिंग और ले जाने के लिए ई-रिक्शा या बाइक अटैचमेंट का विकल्प उपलब्ध है.
टेक्नोलॉजी और भविष्य
डॉ. गोयनका ने कहा कि खेती अब तकनीक से अलग नहीं रह सकती. ड्रोन न केवल छिड़काव करता है, बल्कि बीज रोपाई, टॉप और बॉटम ड्रेसिंग भी कर सकता है. विभिन्न फसलों के लिए अलग-अलग नोजल और स्प्रे पैटर्न के साथ 64 तरह की फसलों पर इसका इस्तेमाल किया जा चुका है.
प्रशिक्षण और आफ्टर-सेल सेवा
कृषि विमान ड्रोन ट्रेनिंग के साथ-साथ स्पेयर पार्ट्स और रिपेयर सर्विस भी उपलब्ध कराता है. बैटरी की पूरी लाइफ साइकिल के लिए कंपनी वैज्ञानिक तरीके से डिस्पोजल करती है. किसानों को बिना किसी चिंता के अपने ड्रोन का उपयोग करने की सुविधा मिलती है.
डॉ. गोयनका का मानना है कि यह केवल तकनीक नहीं, बल्कि ग्रामीण रोजगार और खेती के भविष्य की क्रांति है. यदि किसान और युवा इसका सही तरीके से इस्तेमाल करें, तो फसल की पैदावार बढ़ेगी, लागत घटेगी और गांव में रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे.