मशीन लगाकर दाल बनाएं, ब्रांडिंग करें और ज्यादा कमाई पाएं.. कृषि मंत्री ने किसानों को समझाया बिजनेस मॉडल   

Agriculture Machine: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खेती के लिए मशीन चाहिए. इस साल इतने ट्रैक्टर बिके की दुनिया चकित रह गई. ट्रैक्टर बिक्री में भारत दुनिया में सबसे आगे है. उन्होंने कहा कि खेती-किसानी में तकनीक और मशीनों के इस्तेमाल को बढ़ाने का समय आ गया है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 15 Feb, 2026 | 04:41 PM

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खेती-किसानी में तकनीक और मशीनों के इस्तेमाल को बढ़ाने का समय आ गया है. हमारे किसान अब तकनीक से पीछे नहीं हट सकते हैं. अगर कम लागत में ज्यादा उत्पादन और बेहतर क्वालिटी हासिल करनी है तो आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल करना होगा. उन्होंने कहा कि खेत में कपास चुनने के लिए अब मशीन आ गई है, जो कुछ घंटे में ही पूरे खेती की उपज चुन लेती है. इससे किसानों के समय की बचत के साथ ही ज्यादा मुनाफा हासिल करने का रास्ता बनता है.

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आईसीएआर- केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान के 50 वर्ष पूरे होने पर लोगों संबोधित किया. उन्होंने कहा कि आईसीएआर- केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान की उपलब्धियां असंख्य हैं और इसके नवाचारों ने कृषि विस्तार को नई दिशा दी है. इस संस्थान ने असंभव को आविष्कार में बदलते हुए अनुसंधान, आत्मनिर्भरता और नवाचार का त्रिवेणी संगम स्थापित किया है. यहां के शोध और तकनीक ने परिश्रम को परिणाम में और लागत को लाभ में परिवर्तित किया है.

कपास तुड़ाई के लिए मशीन कर रही बढ़िया काम

अब समय की मांग है कि खेती में मशीनों का व्यापक उपयोग हो, इसलिए कपास तुड़ाई के लिए ऐसी आधुनिक मशीन विकसित की गई है, जिसमें हाथ से चुनने की आवश्यकता नहीं रहती. मैंने खुद इस मशीन का अवलोकन किया है. मशीन चलते ही कपास एकत्र होकर टैंक में इकट्ठा हो जाता है, जिससे तुड़ाई की पूरी प्रक्रिया आसान हो जाती है. किसानों को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ यंत्र निर्माताओं के लिए भी यहाँ विशेष प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया गया है, जहां विभिन्न आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं.

मशीन लगाकर दाल बनाएं, ब्रांडिंग करें और ज्यादा कमाई करें

मैं किसानों से करता हूं कि किसान समूह और सेल्फ हेल्प ग्रुप अब छोटी-छोटी प्रोसेसिंग मशीनें अपने पास रखें, सिर्फ बुआई नहीं, प्रसंस्करण भी खुद करें. ढाई लाख रुपये की दाल मशीन प्रति घंटे 200 किलो और 10 घंटे में 2000 किलो दाल तैयार कर सकती है. अरहर, चना या मूंग, सब संभव है. दलहन मिशन सहित हमारी योजनाओं में 50 फीसदी तक सब्सिडी उपलब्ध है, मशीन लगाकर वहीं दाल बनाएं, ब्रांडिंग करें और शुद्ध दाल बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित करें. मशीन ने जीवन बदला है, लेकिन सावधानी भी जरूरी है- प्रौद्योगिकी का उपयोग करें, पर इंसान मशीन न बन जाए.

भारत में ट्रैक्टर बिक्री से चकित हो गई दुनिया

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि इस साल तो ट्रैक्टर इतने बिके कि दुनिया चकित रह गई. ट्रैक्टर की बिक्री में हिंदुस्तान नंबर एक है. ये मशीनीकरण के बढ़ते हुए प्रभाव का असर है. केवल ट्रैक्टर नहीं, कई तरह की मशीनें भी चाहिए. हमारा ICAR-CIAE संस्थान छोटे किसानों के लिए ऐसी भी मशीनें बनाता है जो बैल से भी चल जाए, उसे आदमी भी चला सकता है. उन्होंने कहा कि पौधों की रोपाई के लिए भी मशीन विकसित की गई है, जिससे ज्यादा सटीक रोपाई होती है और किसान का नुकसान कम होता है.

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Published: 15 Feb, 2026 | 04:31 PM

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