भारत के ग्रामीण क्षेत्र में खेती बाड़ी के अलावा पशुपालन आय का प्रमुख साधन है. किसान पशुपालन करके खुद को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बना रहे हैं. ऐसे में बिहार जैसे ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले राज्य में पशुपालन को बढ़ावा देना राज्य के कृषि तंत्र को मजबूत तो करेगा हीं साथ हीं साथ किसान को आर्थिक और सामाजिक रुप से सशक्त भी करेगा. इसी कड़ी में बिहार की नीतीश सरकार ने पशुपालकों के लिए खुशखबरी दे दी है. राज्य में जो भी किसान पशुपालन करना चाहते हैं या जो लोग पहले से पशुपालन कर रहे हैं उनके लिए भारी सब्सिडी की व्यवस्था सरकार के द्वारा दिया जा रहा है.
उन्नत नस्ल के मवेशी पर मिलेगी सब्सिडी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पशुपालकों को उन्नत किस्म की मवेशी नस्लें उनके जिले में ही मिल पाएगा. सरकार के योजना के तहत जो भी पशुपालक चयनित होंगे उनको गाय और भैंस खरीदने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा.उनके लिए उचित मूल्य में सरकारी अनुदान पर मवेशी की खरीद सुनिश्चित की जाएगी.
देशी गोपालन प्रोत्साहन योजना
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पशुपालकों के लिए बिहार सरकार दो प्रमुख योजनाएं चला रही है. एक योजना सात निश्चय 2 के अंतर्गत देशी गोपालन प्रोत्साहन योजना के तहत दो एवं चार देशी गाय, बाछी और हिफर की डेयरी इकाई की स्थापना के लिए अत्यंत पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति व जनजाति के लाभुकों को 75 परसेंट सब्सिडी और अन्य वर्गों के लिए 50 परसेंट सब्सिडी दी जा रही है.
समग्र गव्य विकास योजना
बिहार सरकार की दूसरी योजना की बात करें तो समग्र गव्य विकास योजना के तहत उन्नत नस्ल के दुधारु मवेशियों की डेयरी इकाई स्थापित करने पर पिछड़ा वर्ग व एससी-एसटी को 75 परसेंट की सब्सिडी और अन्य वर्गों को 50 परसेंट. वहीं 15 और 20 दुधारू मवेशियों की इकाई पर 40 परसेंट सब्सिडी का प्रावधान किया गया है.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बिहार के लखीसराय जिले में समग्र भैंस पालन योजना पहली बार लागू किया जा रहा है. आगे उन्होंने कहा कि समग्र भैंस पालन योजना के तहत 36 पशुपालकों का चयन होगा. आपको बता दें कि जो भी लोग योजना के लिए इच्छुक हैं वे विभागीय वेबसाइट पर आवेदन कर सकते हैं. लखीसराय जिले से कुल 167 पशुपालकों का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें अब तक 144 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं.