राजस्थान के झींगा किसानों को सरकार दे सकती है बड़ी राहत, बिजली दरों में कटौती की है उम्मीद

राजस्थान के झींगा किसानों को महंगी बिजली दरों से परेशानी है. वित्त मंत्री दिया कुमारी ने राहत का भरोसा दिलाया है और सरकार अलग टैरिफ स्लैब पर विचार कर रही है. चुरु, रतनगढ़ और अन्य जिलों में झींगा पालन बढ़ रहा है, लेकिन उच्च बिजली लागत किसानों की आय और आर्थिक स्थिति पर दबाव डाल रही है.

Kisan India
नोएडा | Published: 13 Feb, 2026 | 02:05 PM

Rajasthan News: राजस्थान के झींगा किसान बिजली के उच्च टैरिफ से परेशान हैं, लेकिन अब उन्हें राहत मिल सकती है. राज्य बजट में वित्त मंत्री दिया कुमारी ने घोषणा की है कि ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बिजली की दरें कम की जाएंगी. ऊर्जा विभाग के मुताबिक, सरकार झींगा खेती के लिए अलग टैरिफ स्लैब बनाने पर विचार कर रही है, जो औद्योगिक और कृषि दरों के बीच होगा.

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, चुरु के खारा पानी वाले इलाके में जहां पारंपरिक खेती मुश्किल है, किसान झींगा पालन  को एक विकल्प के रूप में अपनाते हैं. लेकिन उनकी मेहनत महंगी बिजली की वजह से प्रभावित हो रही है, क्योंकि यहां बिजली की दर 12-13 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच गई है. इससे किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है. इससे किसानों की कमाई कम हो रही है.

बिजली लागत कुल इनपुट खर्च का लगभग 30 फीसदी होती है

वहीं, एक वरिष्ठ ऊर्जा विभाग के अधिकारी ने कहा कि हम इस खेती के लिए नया टैरिफ स्लैब  बनाने पर काम कर रहे हैं. दरों का फैसला अन्य राज्यों के मॉडल और स्थानीय परिस्थितियों का अध्ययन करने के बाद किया जाएगा. झींगा पालन में बिजली लागत कुल इनपुट खर्च का लगभग 30 फीसदी होती है, क्योंकि तीन महीने के फसल चक्र में तालाबों में पर्याप्त ऑक्सीजन बनाए रखना झींगों के जीवित रहने के लिए बेहद जरूरी है.

किसानों को भारी जुर्माना भी भुगतना पड़ रहा है

हरियाणा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के विपरीत, जो झींगा पालन को कृषि गतिविधि मानकर इसे बढ़ावा देते हैं, राजस्थान इसे गैर-घरेलू और गैर-कृषि गतिविधियों में रखता है और सबसे ज्यादा वाणिज्यिक दरें लगाता है. उच्च टैरिफ से बचने की कोशिश में कुछ किसानों को भारी जुर्माना भी भुगतना पड़ा, जो 7-10 लाख रुपये तक पहुंच गया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर दबाव पड़ा.

करीब 300 किसान इस व्यवसाय से जुड़े हैं

रतनगढ़ के एक झींगा किसान ने कहा कि चुरु जिले के कई इलाकों में आप सिर्फ मॉनसून  में एक ही फसल जैसे बाजरा या मूंग उगा सकते हैं. अन्य खेती करना मुश्किल है. झींगा पालन हमारे लिए वरदान की तरह आया. सरकार को इसे बढ़ावा देना चाहिए और बिजली की कम दरें बेहद जरूरी हैं. झींगा पालन उन इलाकों में तेजी से फैल रहा है जहां जमीन में नमक की मात्रा अधिक है. करीब 300 किसान इस व्यवसाय से जुड़े हैं और हाल के वर्षों में यह खेती बीकानेर, श्रीगंगानगर और नागौर जैसे अन्य जिलों में भी बढ़ रही है.

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