Punjab News: पंजाब सरकार ने केंद्र की प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) योजना को लागू नहीं करने का फैसला किया है. यह योजना किसानों को उनकी फसलों का बेहतर दाम दिलाने और बाजार में उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए शुरू की गई थी. हाल ही में हुई एक बैठक में कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुदियान, पंजाब राज्य किसान एवं कृषि मजदूर आयोग के अध्यक्ष सुखपाल सिंह और कृषि निदेशक गुरजीत सिंह बराड़ ने इस पर चर्चा की और योजना से बाहर रहने का निर्णय लिया.
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने खास तौर पर प्राइस डेफिशिएंसी पेमेंट स्कीम (PDPS) और प्राइस स्टेबिलाइजेशन स्कीम (PSS) को लागू न करने का फैसला किया है. इसकी मुख्य वजह यह है कि इन योजनाओं को लागू करने के लिए केंद्र के 2017 के मॉडल एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस एंड लाइवस्टॉक मार्केटिंग (प्रमोशन एंड फसिलिटेशन) एक्ट को अपनाना जरूरी शर्त है. यह 2017 का कानून 2003 के एपीएमसी एक्ट की जगह लाने के लिए बनाया गया था, जिसका मकसद कृषि बाजारों को खोलना, निजी भागीदारी बढ़ाना और पारंपरिक मंडियों के बाहर व्यापार को बढ़ावा देना है. लेकिन पंजाब पहले ही इस कानून को यह कहते हुए खारिज कर चुका है कि इससे राज्य की मजबूत एपीएमसी मंडी व्यवस्था और एमएसपी आधारित खरीद प्रणाली कमजोर हो सकती है.
आढ़तियों की आजीविका पर भी असर पड़ेगा
राज्य के अधिकारियों को डर है कि 2017 का मॉडल कानून अपनाने से खेती की उपज की बिक्री में निजीकरण बढ़ सकता है, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है और खरीद प्रक्रिया के दौरान टैक्स व ड्यूटी में छूट देने से राज्य की आय घट सकती है. पंजाब में गेहूं और धान की खरीद की मजबूत व्यवस्था है, जो एपीएमसी मंडियों और आढ़तियों पर आधारित है. आढ़ती किसानों को अनौपचारिक कर्ज भी देते हैं. राज्य सरकार को आशंका है कि अगर ढांचे में बड़े बदलाव किए गए तो यह पूरा सिस्टम प्रभावित होगा और आढ़तियों की आजीविका पर भी असर पड़ेगा.
कुल उत्पादन के 25 फीसदी तक ही सीमित रहेगी
पीडीपीएस और पीएसएस लागू करने से पहले कृषि विभाग के प्रधान सचिव को एक लिखित सहमति देनी होगी, जिसमें 2017 के मॉडल एक्ट को अपनाने की बात माननी होगी. साथ ही शर्त है कि किसी भी फसल की एक सीजन में केंद्र सरकार की खरीद देश के कुल उत्पादन के 25 फीसदी तक ही सीमित रहेगी. इसके अलावा राज्यों को पीएसएस के तहत खरीद, परिवहन और भंडारण से जुड़े सभी टैक्स और ड्यूटी में छूट देनी होगी. पंजाब सरकार का मानना है कि इन शर्तों से राज्य की आमदनी कम हो सकती है और कृषि बाजार से जुड़े फैसलों में उसकी स्वायत्तता घट सकती है.