पंजाब के कुछ बाढ़ प्रभावित किसान पिछले छह दिनों से सरकार से हुए नुकसान के मुआवजे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं. किसानों ने कहा कि वे राज्य सरकार की विफलता के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसने बाढ़ से उनके खेतों और आजीविका को तबाह होने के तीन महीने बाद भी राहत जारी नहीं की है. किसानों ने कहा कि जिन खेतों की मिट्टी बह गई है और खेत की खाई बन गई है, उसके लिए किसानों को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए. जबकि, फसल खराब होने का 20 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजे का वादा किया गया था, जिसे अब तक पूरा नहीं किया गया.
बाढ़ पीड़ित किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में किसान 1 जनवरी से फिरोजपुर जिले के हरिके हेडवर्क्स में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. अब किसानों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का ऐलान कर दिया है. समिति के प्रदेश अध्यक्ष जसबीर सिंह अहलूवालिया ने कहा कि बाढ़ से होने वाला नुकसान दशकों से एक लगातार समस्या रही है, लेकिन लगातार सरकारें स्थायी समाधान देने में विफल रही हैं. पीटीआई से बात करते उन्होंने कहा कि नदियों ने अपना रास्ता बदलकर निजी जमीन की ओर कर लिया है, जिससे साल दर साल फसलों का विनाश हो रहा है.
आश्वासन के 3 महीने बाद भी नहीं जारी किया गया पैसा
किसानों का आरोप है कि बाढ़ से फिरोजपुर, तरनतारन, कपूरथला और मोगा जिलों के किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं और उन्हें अब तक मुआवजा नहीं दिया गया है. किसानों ने कहा कि प्रति एकड़ 20,000 रुपये मुआवजे के आश्वासन के बावजूद सरकार अपना वादा पूरा करने में विफल रही है, जिससे उन्हें अपना आंदोलन तेज करने के लिए मजबूर होना पड़ा है.
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अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर किसान
जसबीर सिंह अहलूवालिया ने कहा कि 11 किसान छह दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं, जबकि सैकड़ों अन्य ठंडे मौसम में अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं. उन्होंने कहा कि हालांकि एक एसडीएम स्तर के अधिकारी ने विरोध स्थल का दौरा किया था और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है.
90 साल के किसान ने भूख हड़ताल शुरू की
किसानों ने दावा किया कि तरनतारन जिले के पीर बख्श गांव के 90 वर्षीय साहब सिंह 1 जनवरी से भूख हड़ताल पर हैं, की स्वास्थ्य स्थिति अच्छी नहीं है. पिछले साल पंजाब में आई भीषण बाढ़ के दौरान सतलुज नदी ने उनकी पांच एकड़ जमीन में से लगभग ढाई एकड़ जमीन बहा दी, जिससे उनका परिवार गंभीर वित्तीय संकट में आ गया. अहलूवालिया ने आरोप लगाया कि बुजुर्ग प्रदर्शनकारियों के बिगड़ते स्वास्थ्य के बावजूद विरोध स्थल पर कोई मेडिकल टीम तैनात नहीं की गई है.
नदी के बहाव से खेतों की मिट्टी बही, 10 एकड़ फसल चौपट
मुआवजे के अलावा किसानों ने खेतों से रेत हटाने की 31 दिसंबर की समय सीमा बढ़ाने, स्कूल फीस का भुगतान करने में असमर्थ परिवारों के लिए राहत और बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए पूर्ण ऋण माफी की भी मांग की है. उन्होंने सतलुज नदी द्वारा बहाई गई जमीन के लिए प्रति एकड़ 50 लाख रुपये मुआवजे की भी मांग की है. बंडाला गांव के सुखविंदर सिंह ने कहा कि बाढ़ ने उनकी 10 एकड़ जमीन पर खड़ी फसल बर्बाद कर दी, जिससे सालों की मेहनत बेकार हो गई.
उन्होंने कहा कि यह नुकसान कोई एक बार की घटना नहीं है, और सरकार से अपील की कि स्थायी बाढ़ नियंत्रण उपाय लागू किए जाएं, जिसमें पठानकोट से फाजिल्का तक तटबंधों को मज़बूत करना और नदी किनारों को सुरक्षित करना शामिल है.