50 से 100 किलो वजन वाली भेड़ें, गद्दी नस्ल कराएगी मोटी कमाई.. आज ही शुरू करें पालन

Best Sheep Breeds for Farming: भेड़ पालन किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा कमाई देने वाला व्यवसाय बनता जा रहा है. सही नस्ल, संतुलित आहार और नियमित देखभाल से मांस, ऊन और दूध तीनों से आय मिल सकती है. छोटे किसान भी इसे आसानी से अपनाकर स्थिर कमाई कर सकते और अपने पशुपालन काम को मजबूत बना सकते.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 13 Feb, 2026 | 01:52 PM

Sheep Farming Business: अगर आप कम लागत में ऐसा काम शुरू करना चाहते हैं जो हर साल अच्छा मुनाफा दे, तो भेड़ पालन आपके लिए बढ़िया विकल्प बन सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सही नस्ल चुन ली जाए तो भेड़ पालन मांस, ऊन और दूध तीनों से कमाई कराने वाला धंधा साबित हो सकता है. खास बात यह है कि कुछ नस्लें तेजी से वजन बढ़ाती हैं और कम बीमार पड़ती हैं. यही वजह है कि अब छोटे किसान भी इस काम की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं.

पहली नस्ल- भारी वजन और ज्यादा मांस से कमाई

मीडिया  रिपोर्ट्स के अनुसार, गद्दी भेड़  एक खास नस्ल ऐसी है जिसका वजन 40 किलो से लेकर 100 किलो या उससे ज्यादा तक पहुंच सकता है. यह देश की भारी नस्लों में गिनी जाती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है तेज बढ़त. अगर अच्छा चारा और सामान्य देखभाल मिले तो 6 महीने में ही 25 से 30 किलो तक वजन बढ़ा लेती है. यह नस्ल मुख्य रूप से मांस के लिए पाली जाती है. इसका मटन स्वादिष्ट और हल्की चिकनाई वाला होता है, इसलिए बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है. वजन के हिसाब से बिक्री होने के कारण किसानों को सीधा फायदा मिलता है. इसके अलावा साल में करीब सवा किलो तक अच्छी क्वालिटी की ऊन भी मिलती है, जिससे अतिरिक्त आय हो जाती है.

दूसरी नस्ल-ऊन और दूध से डबल फायदा

मुजफ्फरनगरी नस्ल  बहुउपयोगी मानी जाती है. यानी इससे मांस, ऊन और दूध तीनों मिलते हैं. यह अलग-अलग रंगों में पाई जाती है और बेहतरीन ऊन देती है, जिससे शॉल और ऊनी कपड़े बनाए जाते हैं. इस नस्ल की खास बात इसका दूध है. मात्रा में भले कम हो, लेकिन इसे औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है. यही कारण है कि इसका दूध और इससे बना घी बाजार में ऊंचे दामों पर बिकता है. इस तरह किसान एक ही पशु से कई तरह की कमाई कर सकते हैं.

कम बीमारियां, कम खर्च और आसान देखभाल

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुजफ्फरनगरी और गद्दी नस्लों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि ये अलग-अलग मौसम में आसानी से ढल जाती हैं. इन्हें ज्यादा तामझाम या महंगे इंतजाम की जरूरत नहीं होती. सामान्य चारा, साफ पानी और समय-समय पर कीड़े की दवा देने से ये स्वस्थ रहती हैं. अन्य पशुओं की तुलना में ये कम बीमार पड़ती हैं, जिससे इलाज का खर्च भी कम आता है. कम जमीन और कम पूंजी में शुरू होने वाला यह काम छोटे और मध्यम किसानों के लिए फायदे का सौदा बन सकता है.

छोटे किसानों के लिए कमाई की नई राह

जानकारों का मानना है कि अगर सही नस्ल का चुनाव किया जाए और बुनियादी देखभाल रखी जाए, तो भेड़ पालन  लंबे समय तक स्थिर आमदनी दे सकता है. मांस, ऊन और दूध तीनों से कमाई होने के कारण जोखिम भी कम रहता है. कम लागत, कम बीमारी और तेजी से वजन बढ़ने वाली इन नस्लों को अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं. यही वजह है कि अब भेड़ पालन गांवों में कमाई का मजबूत जरिया बनता जा रहा है.

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