Report: युद्ध से हिला भारतीय कृषि व्यापार, चावल से लेकर सब्जियों तक 1 लाख करोड़ का निर्यात खतरे में

Iran Israel war impact: भारत का कृषि व्यापार लंबे समय से मध्य-पूर्व के देशों पर काफी हद तक निर्भर रहा है. लेकिन वर्तमान हालात में समुद्री, हवाई और कुछ जगहों पर स्थलीय मार्ग भी प्रभावित हो गए हैं. इसके अलावा बीमा और शिपिंग खर्च बढ़ने से व्यापार की लागत काफी बढ़ गई है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 16 Mar, 2026 | 12:43 PM

Iran Israel war impact: पश्चिम एशिया में चल रहा ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच तनाव अब केवल अंतरराष्ट्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहा है. इसका असर भारत की खेती और कृषि व्यापार पर भी साफ दिखाई देने लगा है. समुद्री रास्तों में रुकावट, जहाजों की आवाजाही में कमी और शिपिंग लागत बढ़ने से भारत से होने वाला कृषि निर्यात प्रभावित हो रहा है. इस स्थिति ने किसानों और निर्यातकों दोनों की चिंता बढ़ा दी है. रिपोर्टों के अनुसार भारत से पश्चिम एशिया जाने वाले करीब 1 लाख करोड़ रुपये के कृषि उत्पादों का निर्यात खतरे में पड़ गया है. बड़ी मात्रा में कृषि उत्पाद रास्ते में अटक गए हैं और हजारों कंटेनर बंदरगाहों पर खड़े हैं.

पश्चिम एशिया में संकट से प्रभावित हुआ कृषि व्यापार

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम एशिया को भारत से भेजे जाने वाले करीब 11.8 अरब डॉलर (लगभग 1 लाख करोड़ रुपये) के कृषि और खाद्य उत्पाद इस संघर्ष के कारण प्रभावित हो रहे हैं. इन उत्पादों में चावल, फल, मसाले और कई अन्य खाद्य सामग्री शामिल हैं. रिपोर्ट बताती है कि 3,000 से ज्यादा कंटेनर बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं, जिससे निर्यातकों को भारी परेशानी हो रही है.

भारत का कृषि व्यापार लंबे समय से मध्य-पूर्व के देशों पर काफी हद तक निर्भर रहा है. लेकिन वर्तमान हालात में समुद्री, हवाई और कुछ जगहों पर स्थलीय मार्ग भी प्रभावित हो गए हैं. इसके अलावा बीमा और शिपिंग खर्च बढ़ने से व्यापार की लागत काफी बढ़ गई है.

बासमती चावल के निर्यात पर बड़ा असर

न्यूज प्रेस की खबर के अनुसार, इस संकट का सबसे बड़ा असर बासमती चावल के निर्यात पर पड़ा है. जानकारी के अनुसार करीब 4 लाख टन बासमती चावल बंदरगाहों या समुद्री रास्तों में फंसा हुआ है. ईरान भारत से बासमती चावल खरीदने वाले प्रमुख देशों में से एक है और भारत के कुल निर्यात में उसका हिस्सा 25 प्रतिशत से अधिक माना जाता है.

भारत दुनिया में बासमती चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है. वर्ष 2024-25 में भारत ने 60 लाख 65 हजार टन बासमती चावल विभिन्न देशों को निर्यात किया, जिसकी कीमत करीब 50,312.01 करोड़ रुपये (5944.42 मिलियन डॉलर) थी. CRISIL Ratings के अनुसार भारत के कुल बासमती निर्यात का लगभग 70 से 72 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया के देशों में जाता है.

शिपिंग लागत बढ़ने से व्यापारियों की मुश्किल

28 फरवरी 2026 से पहले पश्चिम एशिया के देशों के लिए मिले ऑर्डर भेजने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी. लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद हालात बदल गए. शिपिंग कंटेनरों की कमी और वार-रिस्क इंश्योरेंस की वजह से माल भेजने का खर्च लगभग दोगुना हो गया है.

निर्यातकों के अनुसार अब हर कंटेनर पर करीब 2000 डॉलर यानी लगभग 1.8 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है. यह अतिरिक्त बोझ उन्हें अपने मुनाफे से देना पड़ रहा है, जिससे व्यापार की स्थिति कमजोर हो रही है.

किसानों को मिलने लगे कम दाम

निर्यात रुकने का असर सीधे किसानों तक पहुंच रहा है. बासमती चावल की कीमतों में 600 से 800 रुपये प्रति क्विंटल तक गिरावट दर्ज की गई है. इससे किसानों की आय पर नकारात्मक असर पड़ रहा है. इसी तरह फल और सब्जियां भी विदेशों में न भेजे जाने के कारण देश के बाजारों में ज्यादा मात्रा में पहुंच रही हैं, जिससे कीमतें गिर रही हैं.

महाराष्ट्र, कर्नाटक और अन्य राज्यों के फल-सब्जी किसान इस स्थिति से परेशान हैं, क्योंकि बाजार में अधिक आपूर्ति होने से उन्हें सही दाम नहीं मिल पा रहे.

मांस और समुद्री उत्पादों का निर्यात भी प्रभावित

ईरान-इजराइल तनाव का असर केवल फसलों तक सीमित नहीं है. भारत के मांस और समुद्री उत्पादों के निर्यात पर भी इसका असर पड़ा है. वर्ष 2025 में भारत ने पश्चिम एशिया को लगभग 16,730 करोड़ रुपये (1.81 अरब डॉलर) के मांस, मछली और प्रोसेस्ड उत्पाद निर्यात किए थे.

इनमें ताजा या ठंडा बफ, फ्रोजन बफ, भेड़-बकरी का मांस और झींगा जैसे उत्पाद शामिल हैं. आंकड़ों के अनुसार ताजा या ठंडा बीफ के निर्यात का 97.4 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया जाता है, जबकि फ्रोजन बीफ का 28.9 प्रतिशत निर्यात भी इसी क्षेत्र में होता है. अगर यह संकट लंबा चलता है तो उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे राज्यों की प्रोसेसिंग यूनिट्स पर गंभीर असर पड़ सकता है.

फल-सब्जियों के कंटेनर बंदरगाहों पर अटके

फल और सब्जियों के निर्यात पर भी इस स्थिति का गहरा असर पड़ा है. मुंबई के जेएनपीए बंदरगाह पर करीब 1200 करोड़ रुपये से ज्यादा के फल और सब्जियां लगभग 1000 कंटेनरों में फंसी हुई हैं. इन कंटेनरों में केला, अंगूर, अनार और प्याज जैसे उत्पाद भरे हुए हैं.

दुबई के जेबेल अली पोर्ट पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से माल भेजने में 20 से 25 दिन की अतिरिक्त देरी हो रही है. साथ ही 2000 से 4000 डॉलर तक का ‘वार रिस्क सरचार्ज’ भी देना पड़ रहा है. इससे नासिक के अंगूर और अन्य ताजा सब्जियों के खराब होने का खतरा बढ़ गया है.

डेयरी और पोल्ट्री क्षेत्र पर भी असर

इस संघर्ष का असर डेयरी और पोल्ट्री उद्योग पर भी पड़ रहा है. भारत के लगभग 2360 करोड़ रुपये (281.1 मिलियन डॉलर) के डेयरी और प्रोसेस्ड फूड निर्यात प्रभावित हुए हैं. समुद्री रास्तों में बाधा और बढ़ती लागत के कारण खाड़ी देशों को दूध और दूध से बने उत्पाद भेजना मुश्किल हो गया है.

इसी तरह अंडों का निर्यात रुकने से घरेलू बाजार में कीमतें गिर गई हैं. कर्नाटक और तेलंगाना में अंडे की कीमत 7 से घटकर 4.60 रुपये प्रति अंडा तक पहुंच गई है, जिससे पोल्ट्री किसानों की आय प्रभावित हो रही है.

तरबूज के दाम भी गिरे

पश्चिम एशिया में निर्यात धीमा पड़ने का असर तरबूज की कीमतों पर भी दिख रहा है. कई इलाकों में तरबूज का भाव 7 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. इससे किसानों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ तो भारत के कृषि निर्यात और किसानों की आय पर इसका असर लंबे समय तक देखने को मिल सकता है. फिलहाल किसान और निर्यातक दोनों ही वैश्विक हालात के सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं.

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