Mandi Rate: महंगी हुई तुअर दाल, कीमत में 200 रुपये की बढ़ोतरी.. जानें ताजा रेट

तुअर की कीमतों में हाल के दिनों में बढ़ोतरी हुई है, जिससे किसानों को राहत मिली है. आयात में कमी, फसल की देर से बाज़ार में आना और रुपये की कमजोरी कीमत बढ़ने के मुख्य कारण हैं. नए और पुराने तुअर की कीमतें बढ़ीं, जबकि 2025-26 का अनुमानित उत्पादन 35.97 लाख टन है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 24 Jan, 2026 | 11:23 AM

तुअर की कीमतों में हाल के कुछ दिनों में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है. इससे किसानों ने राहत की सांस ली है. किसानों को उम्मीद है कि आगे भी कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहेगी. इससे उन्हें अच्छी कमाई होगी. वहीं,  व्यापारियों का कहना है कि तुअर की कीमत थोड़ी बढ़ी है. इसका कारण आयात में कमी, फसल की देर से बाजार में आने और रुपये का कमजोर होना है. इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) के अनुसार, नए तुअर की कीमतें महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना  के कई बाजारों में शुक्रवार को 125-250 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ीं. पुराने तुअर की कीमतें 100-200 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ीं, जबकि आयातित तुअर 50-100 रुपये प्रति क्विंटल महंगा हुआ. 21 जनवरी 2026 तक तुअर का देशभर का औसत थोक मूल्य 7,283 रुपये प्रति क्विंटल हो गया, जो 31 दिसंबर 2025 के 7,003 रुपये और पिछले साल इसी समय के 7,042 रुपये प्रति क्विंटल से थोड़ा ज्यादा है.

2025 में तुअर का आयात 8 फीसदी घटकर 10,54,969 टन रहा

बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, IPGA के चेयरमैन बिमल कोठारी ने कहा कि कीमतें थोड़ी बढ़ीं हैं, लेकिन चिंता की कोई बात नहीं क्योंकि ये न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम हैं. आईपीजीए के अनुसार, जनवरी-नवंबर 2025 में तुअर का आयात 8 फीसदी घटकर 10,54,969 टन रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 11,43,143 टन था.

2025-26 में तूर का उत्पादन 35.97 लाख टन रहने का अनुमान

कलांतरी फूड प्रोडक्ट्स, लातूर के सीईओ नितिन कलांतरी ने कहा कि तुअर की कीमतें पिछले चार-पांच दिनों में थोड़ी बढ़ गई हैं. इसका कारण आयात में कमी, रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होना और घरेलू फसल की धीमी आवक है. उन्होंने कहा कि इस साल नई फसल की आवक धीमी है क्योंकि लंबी सर्दी रही और किसान थोड़ी फसल रोककर रख रहे थे. व्यापार की आपूर्ति पाइपलाइन भी खाली है, क्योंकि व्यापारी और मिलर्स  अच्छे उत्पादन की उम्मीद में अपने स्टॉक निकाल चुके हैं. अफ्रीका से मुख्य आवक पहले ही आ चुकी है, और अब म्यांमार से आयात फरवरी-मार्च से तेज होगा. कृषि मंत्रालय के पहले अनुमान के अनुसार, 2025-26 में तुअर का उत्पादन 35.97 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 36.24 लाख टन से थोड़ी कम है.

तेलंगाना में तुअर की सरकारी खरदी होगी

वहीं, पिछले हफ्ते खबर सामने आई थी कि तेलंगाना में तुअर का रेट न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम है. ऐसे में तेलंगाना सरकार ने किसानों को राहत देने का फैसला किया है. सरकार खरीफ सीजन की तुअर की खरीद राज्य की मार्कफेड (मार्केटिंग फेडरेशन) के जरिए करेगी. सरकार को उम्मीद है कि इससे किसानों को फायदा होगा. उन्हें उनकी उपज का उचित रेट मिल सकेगा.

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Published: 24 Jan, 2026 | 11:20 AM

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