तेलंगाना के करिमनगर जिले में लंबे समय से बारिश नहीं होने से कपास की फसल की बढ़वार प्रभावित हो रही है. किसानों ने महंगा बीज और खेती पर बड़ी रकम खर्च करके फसल बोई है, लेकिन अब उन्हें उत्पादन घटने की चिंता सता रही है. किसानों का कहना है कि अगर अगले 10 दिनों में बारिश नहीं हुई तो कपास का उत्पादन करीब 50 फीसदी तक घट सकता है.
दरअसल, अल नीनो के असर से कम बारिश को देखते हुए राज्य सरकार और कृषि विभाग ने किसानों को इस सीजन में धान की खेती से बचने और कम सिंचाई वाली सूखी फसलों (ID crops) की खेती करने की सलाह दी थी. इसके बावजूद इस बार भी बड़े पैमाने पर धान की खेती की गई है. जिन किसानों के पास पानी की सुविधा थी, उन्होंने धान बोया, जबकि बाकी किसानों ने कपास और दूसरी सूखी फसलों की खेती की है.
धान के मुकाबले कम पानी की जरूरत
धान की तुलना में कपास की फसल को कम पानी की जरूरत होती है. इसलिए करिमनगर जिले में बड़ी संख्या में किसानों ने कपास की खेती की है. जिले में करीब 46 हजार एकड़ में कपास बोई गई है. हालांकि, बुवाई के बाद से ही फसल पर मौसम की मार पड़ रही है. खरीफ सीजन की शुरुआत में कपास की बुवाई तो कर दी गई थी, लेकिन बारिश की कमी के कारण बीजों का अंकुरण समय पर नहीं हो पाया. इसके बाद भी बारिश का सूखा दौर जारी रहा. इससे कपास की फसल की बढ़वार प्रभावित हो रही है और किसानों की चिंता बढ़ गई है.
देर से अंकुरण के कारण कपास की बढ़वार प्रभावित
रामदुगु मंडल के वेदिरा गांव के किसान मीसाला लच्चैया ने डेक्कन क्रॉनिकल को कहा कि उन्होंने जून के दूसरे सप्ताह में कपास की बुवाई की थी, लेकिन बीज जुलाई के आखिर में जाकर अंकुरित हुए. इस समय तक कपास के पौधों में लंबी शाखाएं हो जानी चाहिए थीं, लेकिन उनकी लंबाई काफी कम है. किसान के मुताबिक, लंबी शाखाओं पर ज्यादा फूल आते हैं और इन्हीं फूलों से आगे चलकर कपास तैयार होती है. शाखाएं छोटी रहने से फूलों की संख्या भी कम होगी और इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा. इससे इस बार कपास की पैदावार घटने की आशंका है.
कपास की फसल पर लीफहॉपर का हमला
इसके अलावा कपास की फसल में लीफहॉपर कीट का प्रकोप भी देखने को मिला है. किसान लच्चैया ने कहा कि इससे उत्पादन पर बुरा असर पड़ सकता है. उन्होंने दो एकड़ में कपास की खेती की है. गोलिरामैयापल्ली के किसान नुगोंडा मल्लेशम ने कहा कि कपास की फसल के लिए अगले 10 दिन बेहद अहम हैं. अगर आने वाले दिनों में बारिश नहीं हुई तो उत्पादन घट सकता है. कपास को धान के मुकाबले कम पानी की जरूरत होती है, लेकिन तेज गर्मी और लगातार बारिश नहीं होने से खेत की मिट्टी में नमी काफी कम हो गई है. इससे फसल की बढ़वार प्रभावित हो रही है.
सूखे में कमजोर होते हैं कपास के पौधे
आमतौर पर सामान्य मिट्टी में कपास की एक एकड़ में 14 क्विंटल तक और काली मिट्टी में 20 क्विंटल तक उत्पादन मिल जाता है. लेकिन इस बार बारिश की कमी के कारण पैदावार घटने की आशंका है. जम्मीकुंटा के कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक और प्रमुख डॉ. एन. वेंकटेश्वर राव ने कहा कि बारिश नहीं होने के दौरान कपास के पौधे मिट्टी से पोषक तत्व ठीक से नहीं ले पाते हैं. अगर सूखे की स्थिति आगे भी जारी रही तो उत्पादन पर असर पड़ेगा. उन्होंने बताया कि सूखे के दौरान पौधे कमजोर हो जाते हैं, जिससे उन पर कीटों का हमला आसानी से हो सकता है.