Broccoli Farming: आज के दौर में खेती में वही किसान टिक पा रहे हैं, जो बदलते बाजार की नब्ज पहचान रहे हैं. केवल फूलगोभी या पत्तागोभी जैसी पारंपरिक सब्जियों पर निर्भर रहना अब मुनाफे का भरोसेमंद तरीका नहीं रहा. मंडियों में दाम गिरते हैं और मेहनत का सही मूल्य नहीं मिल पाता. ऐसे में अब किसानों के लिए स्मार्ट फार्मिंग की ओर कदम बढ़ाना जरूरी हो गया है. ब्रोकली की खेती इसी बदलाव का एक मजबूत उदाहरण है.
ब्रोकली क्यों बन रही है किसानों की पसंद?
ब्रोकली दिखने में भले ही हरी गोभी जैसी लगे, लेकिन बाजार में इसकी कीमत और मांग फूलगोभी से कई गुना ज्यादा है. इसे सुपरफूड माना जाता है और बड़े शहरों के होटल, जिम जाने वाले युवा और हेल्थ कॉन्शियस लोग इसे खूब पसंद कर रहे हैं. जहां फूलगोभी कई बार 10-20 रुपये किलो बिकती है, वहीं ब्रोकली 50 से 150 रुपये किलो तक आराम से बिक जाती है. सबसे खास बात यह है कि यह फसल 60 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे साल में एक से ज्यादा बार खेती संभव है.
सही मौसम और जलवायु का चुनाव
ब्रोकली ठंडी जलवायु की फसल है. उत्तर भारत में इसकी नर्सरी तैयार करने का सही समय सितंबर से नवंबर के बीच माना जाता है. 15 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान इसके लिए आदर्श रहता है. अब बाजार में ऐसी उन्नत किस्में भी उपलब्ध हैं, जो थोड़े ज्यादा तापमान में भी अच्छी पैदावार देती हैं.
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मिट्टी और खेत की तैयारी कैसे करें?
ब्रोकली के लिए दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है, जिसमें पानी की निकासी सही हो. खेत की 2-3 बार अच्छी जुताई करें और प्रति एकड़ 8-10 टन सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं. मिट्टी का पीएच मान 6 से 7 के बीच होना चाहिए. पौधों को मेड़ों पर लगाना फायदेमंद रहता है, ताकि पानी जड़ों में जमा न हो.
उन्नत किस्में और रोपाई का तरीका
अच्छी कमाई के लिए सही किस्म चुनना बेहद जरूरी है. पालम समृद्धि, गणेश ब्रोकली और के-1 जैसी किस्में किसानों में काफी लोकप्रिय हैं. बीज पहले नर्सरी में तैयार करें और जब पौधे 25-30 दिन के हो जाएं, तब खेत में रोपाई करें. पौधों के बीच 45 सेमी और कतारों के बीच 60 सेमी की दूरी रखें.
खाद, सिंचाई और देखभाल
ब्रोकली को पोषण की अच्छी जरूरत होती है. खेत में नमी बनी रहनी चाहिए, लेकिन जलभराव न हो. ड्रिप सिंचाई सबसे बेहतर विकल्प है. मिट्टी जांच के आधार पर नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का प्रयोग करें. फूल बनते समय बोरॉन का छिड़काव करने से ब्रोकली की गुणवत्ता और रंग बेहतर होता है, जिससे बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं.
कीट-रोग और बचाव
इस फसल में हीरक पीठ घुन और झुलसा रोग का खतरा रहता है. नीम तेल या दशपर्णी अर्क जैसे जैविक उपाय अपनाकर कीटों को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है.
जब ब्रोकली का सिर सख्त और कलियां घनी हो जाएं, तब कटाई कर लेनी चाहिए. एक एकड़ में 80 से 100 क्विंटल तक उत्पादन संभव है. यदि औसतन 50 रुपये किलो भाव भी मिले, तो 4-5 लाख रुपये की कुल आय हो सकती है. खर्च निकालने के बाद भी किसान 2.5 से 3 लाख रुपये तक शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं.
बिक्री कहां करें?
ब्रोकली को छोटे बाजारों की बजाय बड़े शहरों की मंडियों, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या सीधे होटलों को बेचें. अच्छी ग्रेडिंग और पैकिंग से कीमत और बढ़ जाती है. ब्रोकली की खेती कम समय में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल बनकर उभरी है. थोड़ी समझदारी, सही तकनीक और बाजार की जानकारी के साथ यह फसल किसानों की आर्थिक तस्वीर बदल सकती है. खेती में अब क्वालिटी ही असली कमाई की चाबी है.