High Profit Crop: कम पैदावार में भी तगड़ा फायदा, काले प्याज की लंबी स्टोरेज से सही समय पर करें बिक्री

काले प्याज की खेती किसानों के लिए कमाई का नया मौका बन रही है. यह फसल करीब 100 से 120 दिन में तैयार हो जाती है और लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सकती है. बाजार में इसकी मांग ज्यादा है, जिससे सामान्य प्याज की तुलना में बेहतर दाम मिलते हैं और मुनाफा बढ़ता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 5 Mar, 2026 | 04:44 PM

Black Onion Farming: खेती में अगर कम लागत में ज्यादा मुनाफा मिल जाए तो कौन किसान पीछे रहना चाहेगा? अब पारंपरिक लाल प्याज के साथ-साथ काले प्याज की खेती भी किसानों के लिए कमाई का नया रास्ता बन रही है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है इसकी लंबी स्टोरेज क्षमता और बाजार में ऊंची कीमत. यही वजह है कि अब कई किसान इस खास किस्म की ओर रुख कर रहे हैं.

काले प्याज की खासियत क्या है?

काला प्याज  देखने में गहरे बैंगनी या लगभग काले रंग का होता है. इसका स्वाद थोड़ा तेज होता है, इसलिए खास तरह के व्यंजनों में इसका उपयोग ज्यादा किया जाता है. सबसे बड़ी बात यह है कि यह प्याज सामान्य प्याज की तुलना में ज्यादा समय तक सुरक्षित रहता है. जहां लाल प्याज जल्दी खराब हो जाता है, वहीं काला प्याज कई महीनों तक स्टोर किया जा सकता है. किसान इसे तुरंत बेचने के बजाय सही भाव मिलने तक रोक सकते हैं. यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. देश के साथ-साथ विदेशों में भी इसकी डिमांड है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिल जाते हैं.

कैसी मिट्टी और मौसम चाहिए?

काले प्याज की खेती  के लिए बलुई दोमट या दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है. मिट्टी का pH मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए. खेत में पानी रुकना नहीं चाहिए, क्योंकि ज्यादा पानी से फसल खराब हो सकती है. मौसम की बात करें तो ठंडी और हल्की ठंड वाला मौसम इसके लिए बेहतर रहता है. यही कारण है कि सर्दियों के समय इसकी बुवाई करना ज्यादा फायदेमंद होता है. जिन किसानों को पहले से प्याज की खेती का अनुभव है, वे इसे आसानी से अपना सकते हैं.

बुवाई, रोपाई और देखभाल कैसे करें?

किसान अक्टूबर-नवंबर में इसकी नर्सरी तैयार  कर सकते हैं. इसके बाद दिसंबर से जनवरी के बीच पौध की रोपाई करना सही रहता है. एक हेक्टेयर में करीब 8 से 10 किलो बीज की जरूरत पड़ती है. रोपाई के बाद हल्की सिंचाई जरूरी होती है. फिर 7 से 10 दिन के अंतराल पर पानी देना चाहिए. खेत में गोबर की खाद डालना फायदेमंद होता है. साथ ही नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग करने से उत्पादन अच्छा मिलता है. समय-समय पर खेत की निराई-गुड़ाई और कीट नियंत्रण करना भी जरूरी है, ताकि फसल स्वस्थ रहे और अच्छा उत्पादन दे.

100 दिन में तैयार, मुनाफा ज्यादा

काले प्याज की फसल लगभग 100 से 120 दिन में तैयार हो जाती है. जब पत्तियां पीली होकर गिरने लगें, तब खुदाई करनी चाहिए. एक हेक्टेयर में 250 से 350 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है. भले ही इसका उत्पादन थोड़ा कम हो, लेकिन बाजार में इसका भाव ज्यादा मिलता है. यही वजह है कि कम पैदावार में भी मुनाफा अच्छा हो जाता है. लंबे समय तक स्टोर करने की सुविधा किसानों  को मजबूरी में कम दाम पर बेचने से बचाती है. वे सही समय का इंतजार कर सकते हैं और अच्छे भाव मिलने पर फसल बेच सकते हैं.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 5 Mar, 2026 | 04:44 PM

तोरई की अच्छी पैदावार के लिए क्या जरूरी है?

लेटेस्ट न्यूज़