कर्नाटक में सूखे का संकट गहराया, सरकार ने 101 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया

कर्नाटक में कम और अनियमित मॉनसून से सूखे जैसे हालात बन गए हैं. सरकार ने 101 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है. इनमें 89 गंभीर श्रेणी में हैं. कम बारिश से खरीफ बुवाई, प्याज, मिर्च और टमाटर की फसल प्रभावित हुई है. सरकार पीने के पानी, चारे और रोजगार की व्यवस्था कर रही है और हर हफ्ते स्थिति की समीक्षा करेगी.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 28 Aug, 2026 | 11:02 AM

कर्नाटक में कम और अनियमित मॉनसून बारिश का असर अब खेती पर साफ दिखाई देने लगा है. राज्य सरकार ने करीब 101 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है. उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि राज्य में बारिश सामान्य से काफी कम हुई है, जिससे फसलें सूख रही हैं और हालात गंभीर बने हुए हैं. 1 जून से 26 अगस्त के बीच कर्नाटक में कुल 465 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में 666 मिमी बारिश होती है. तटीय कर्नाटक में बारिश की कमी 24 फीसदी, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 41 फीसदी, उत्तर आंतरिक कर्नाटक में 31 फीसदी और मलनाड क्षेत्र में 35 फीसदी रही.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कम बारिश का असर खरीफ की बुवाई पर भी पड़ा है. राज्य में अब तक करीब 60 लाख हेक्टेयर में ही बुवाई हुई है, जबकि सरकार ने 84.10 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य रखा था. उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि कम बारिश से बागवानी फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है. खासकर मिर्च, प्याज और टमाटर की फसलें प्रभावित हुई हैं.

कर्नाटक के 101 तालुक सूखा प्रभावित, 89 की हालत गंभीर

कर्नाटक में कम बारिश के कारण 132 तालुकों में भूजल स्तर 10 साल के औसत से नीचे चला गया है. कुछ इलाकों में भूजल स्तर में 1,000 फीट से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है. शुरुआत में 134 तालुकों को संभावित सूखा प्रभावित माना गया था. जमीनी जांच के बाद इनमें से 101 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित करने के योग्य पाया गया. इनमें 89 तालुक गंभीर और 12 तालुक मध्यम श्रेणी में हैं.

सूखे से निपटने की तैयारी, सरकार देगी पानी और चारा

सरकार ने सूखा घोषित करने के लिए केंद्र सरकार के तय मानकों को आधार बनाया है. इनमें कम से कम तीन हफ्ते तक बारिश न होना, बुवाई का रकबा, फसलों की स्थिति, मिट्टी में नमी, भूजल स्तर और झीलों, तालाबों व बांधों में पानी की उपलब्धता जैसे मानक शामिल हैं. उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि सूखे जैसे हालात को देखते हुए सरकार पीने का पानी, पशुओं के लिए चारा और रोजगार उपलब्ध कराने के लिए जरूरी कदम उठा रही है.

वहीं, कर्नाटक सरकार ने अधिकारियों को संयुक्त सर्वे कराने और फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए हैं. अधिकारियों से कहा गया है कि सर्वे की रिपोर्ट जल्द तैयार कर सरकार को सौंपें. सरकार खरीफ 2026 सीजन खत्म होने तक हर हफ्ते सूखे की स्थिति की समीक्षा करेगी. आगे की जांच में अगर किसी दूसरे तालुक में भी सूखे के हालात पाए जाते हैं, तो उसे भी सूखा प्रभावित घोषित किया जा सकता है.

कर्नाटक में सूखे जैसे हालात के आंकड़े

  • खरीफ बुवाई: सामान्य 84.10 लाख हेक्टेयर के मुकाबले अब तक सिर्फ 60 लाख हेक्टेयर में बुवाई.
  • मिट्टी में नमी की कमी: 178 तालुकों में मिट्टी की नमी कम मिली.
  • फसल पर तनाव: सैटेलाइट जांच में 165 तालुकों में फसलों पर असर की पुष्टि.
  • भूजल स्तर: 132 तालुकों में भूजल स्तर में गिरावट.
  • जलाशयों में पानी: फिलहाल 684.09 टीएमसीएफटी पानी, जबकि पिछले साल 815.70 टीएमसीएफटी था.
  • पीने के पानी की सप्लाई: 758 गांवों में 149 टैंकर और 714 किराए के निजी बोरवेल से पानी पहुंचाया जा रहा है.
  • पेयजल के लिए फंड: सरकार ने 306 करोड़ रुपये जारी किए.
  • चारे का स्टॉक: 151 लाख टन चारा उपलब्ध है. चारा बीज किट के लिए 25 करोड़ रुपये जारी.
  • फसल बीमा: 49 लाख किसान फसल बीमा योजना से जुड़े हैं. आवेदन की अंतिम तारीख 31 अगस्त तक बढ़ाई गई है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 28 Aug, 2026 | 10:53 AM

लेटेस्ट न्यूज़