रबी सीजन में आलू की फसल की बंपर पैदावार होने के बाद किसानों को उम्मीद थी कि भाव अच्छा मिलेगा. लेकिन, 1 और 2 रुपये किलो आलू भाव मिलने पर किसानों पर कर्ज चुकानें का संकट गहरा गया है. इसके साथ ही मक्का किसानों को भी भाव नहीं मिलने से उन पर भी आर्थिक आफत आती दिख रही है. किसानों ने सरकार से भाव दिलाने की मांग करते हुए भावांतर योजना का लाभ देने की मांग की है. किसान नेता गुणी प्रकाश ने कहा है कि उपज का भाव नहीं मिलने पर किसान कर्ज में डूब जाते हैं उन्हें इस संकट से बचाने के लिए सरकार अंतर भाव का भुगतान करे. वहीं, किसानों की मांग और दबाव के बाद आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने मक्का किसानों को एमएसपी दिलाने के लिए केंद्र को पत्र लिखा है.
आलू मंडी भाव में किसानों के सीधा 400 रुपये का नुकसान
उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों के आलू किसान भाव नहीं मिलने के चलते भंयकर संकट में हैं. उत्तर प्रदेश में आलू की लागत 1000 रुपये प्रति क्विंटल है और उसका बाजार बिक्री मूल्य 600 से 800 रुपये प्रति क्विंटल तय किया जा रहा है. थोक मंडियों में तो दाम और भी कम मिल रहे हैं. सीधे-सीधे 200 रुपये प्रति क्विंटल का घाटा किसान झेल रहे हैं. उत्तर प्रदेश में आलू का औसत मंडी भाव 24 मार्च को 600 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया है. यानी किसान को सीधे 400 रुपये का घाटा हो रहा है. वहीं, अगर कोल्ड स्टोरेज के साथ ही माल ढुलाई-उतराई खर्च जोड़ दें तो किसान का नुकसान और भी बढ़ जाता है.
आलू का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल लागत-खर्च 1400 रुपये
पश्चिमी यूपी के कन्नौज बेल्ट में आलू उत्पादन की लागत बढ़कर 1,000 प्रति क्विंटल से ज्यादा हो गई है, जबकि बाजार में कीमतें लगभग 800 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से तय हो रही हैं. इससे किसानों को भंडारण और मार्केटिंग के खर्चों से पहले ही लगभग 200 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान हो रहा है. इसमें मौजूदा कोल्ड स्टोरेज शुल्क 340-380 रुपये प्रति क्विंटल जोड़ने पर कुल लागत बढ़कर 1,340-1,380 रुपये प्रति क्विंटल हो जाती है, जो कि किसानों को मिलने वाली कीमतों से कहीं ज्यादा है.
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हरियाणा और पंजाब में भी आलू किसान परेशान
किसान नेता गुणी प्रकाश ने किसान इंडिया को बताय कि आलू किसानों की यह स्थिति केवल उत्तर प्रदेश की नहीं है. पंजाब और हरियाणा में भी आलू किसानों का बुरा हाल है. उन्होंने कहा कि हरियाणा की मंडियों में आलू का होलसेल रेट 2 रुपये किलो हो गया है. उन्होंने कहा कि एक किलो आलू उगाने पर 10 रुपये की लागत आती है. ऐसे में अगर किसान 2 से 4 रुपये किलो दी दर से आलू बेचते हैं, तो उन्हें प्रति किलो 6 से 8 रुपये का नुकसान हो रहा है. उन्होंने कहा कि किसानों को नुकसान से बचाने के लिए हरियाणा और पंजाब सरकार 12 रुपये किलो की दर से आलू की खरीद शुरू करे.
पश्चिम बंगाल में आलू किसानों पर बढ़ा कर्ज का बोझ
पश्चिम बंगाल में आलू किसानों की आत्महत्या करने की बात भाजपा की ओर से कही जा रही है. पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रमुख समिक भट्टाचार्य ने आरोप लगाया है कि आलू किसानों को भाव नहीं मिल पा रहा है. किसान इस डर से अपनी जान दे रहे हैं कि वे अपनी फसल बेच नहीं पाएंगे और न ही कर्ज देने वालों का पैसा चुका पाएंगे, क्योंकि पश्चिम बंगाल सरकार ने दूसरे राज्यों को आलू भेजना बंद कर दिया है. उन्होंने कहा कि राज्य के किसानों पर लगातार कर्ज का बोझ बढ़ रहा है.
मंडियों में मक्का का रेट एमएसपी से 700 रुपये नीचे आया
आंध्र प्रदेश में मक्का का होलसेल रेट न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी कम हो गया है. इसके चलते किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. आंध्र में पूरे मार्च महीने के दौरान मक्का का रेट एमएसपी से काफी कम रहा. Agmarknet के आंकड़ों के मुताबिक कुरनूल एपीएमसी में 2 मार्च को 18.40 मीट्रिक टन स्थानीय किस्म के मक्का की आवक हुई. इस दिन इसकी कीमत 1,239 से 1,639 रुपये प्रति क्विंटल रही, जबकि मॉडल प्राइस 1,639 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. जबकि, 24 दिन बाद यानी 26 मार्च को इसी कुरनूल एपीएमसी में 5.40 मीट्रिक टन स्थानीय किस्म के मक्का की आवक दर्ज की गई. इस दिन मक्का कीमत 1,309 से 1,729 रुपये प्रति क्विंटल रही, जबकि मॉडल प्राइस 1,439 रुपये प्रति क्विंटल रहा. जबकि, 2025-26 सीजन के लिए मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,400 प्रति क्विंटल है. यानी आंध्र प्रदेश के किसान एमएसपी से 700 से लेकर 1000 रुपये क्विंटल तक कम रेट पर उपज बेच रहे हैं.
मक्का किसानों को संकट से बचाने के लिए मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर मक्का किसानों के लिए तुरंत मदद और आर्थिक सहायता की मांग की है. उन्होंने कहा कि अच्छी पैदावार के बावजूद बाजार में कीमतें एमएसपी से नीचे गिर गई हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है.
आलू और मक्का किसानों ने भावांतर योजना का लाभ देने का मुद्दा उठाया
आलू और मक्का किसानों ने सरकार से अपील करते हुए कहा है कि जिस तरह से सोयाबीन और सरसों की फसल के लिए भावांतर योजना का लाभ किसानों को दिया गया है. उसी तरह मक्का और आलू किसानों के लिए भी भावांतर योजना लागू की जाए, ताकि उन्हें कम भाव से होने वाले नुकसान से बचाया जा सके और कर्ज के बोझ को चुकाने में आसानी हो. बता दें कि भावांतर योजना के तहत तय मूल्य से कम भाव मिलने पर अंतर राशि का भुगतान सरकार किसानों को करती है. मध्य प्रदेश के सोयाबीन किसानों को भावांतर योजना के तहत राशि का भुगतान किया गया है और अब सरसों के लिए भी भावांतर योजना का लाभ दिया जा रहा है.