Punjab News: पंजाब में बेमौसम बारिश और शाम के समय बढ़ी नमी ने कद्दू वर्गीय फसलों में बीमारी का खतरा बढ़ा दिया है. पिछले दो हफ्तों में राजपुरा, डेराबस्सी और संगरूर के किसानों ने खरबूजा, तरबूज और लौकी की फसलों में ‘डाउनी मिल्ड्यू’ बीमारी के लक्षण देखे हैं. यह फफूंद जनित बीमारी नमी वाले मौसम में तेजी से फैलती है और फसल की पैदावार व गुणवत्ता दोनों को नुकसान पहुंचा सकती है.
कद्दू वर्गीय फसलों में होने वाला डाउनी मिल्ड्यू एक फफूंद जनित बीमारी है, जो अनुकूल मौसम में तेजी से फैलती है और फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकती है. इस बीमारी में पत्तियों की ऊपरी सतह पर पीले धब्बे दिखाई देते हैं. वहीं, सुबह के समय जब हवा में नमी ज्यादा होती है, तो पत्तियों के नीचे की तरफ भूरे-सफेद रंग की फफूंद जैसी परत नजर आती है.
पूरी फसल झुलसी हुई दिखाई देती है
बाद में ये पीले धब्बे भूरे रंग के होकर सूखने लगते हैं, जिससे पूरी फसल झुलसी हुई दिखाई देने लगती है. पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ सतबीर सिंह गोसल ने ‘द ट्रिब्यून’ को बताया कि पिछले दो हफ्तों में मौसम डाउनी मिल्ड्यू बीमारी के फैलने के लिए अनुकूल बना हुआ है. राजपुरा, डेराबस्सी और संगरूर के आसपास के गांवों में खरबूजा, तरबूज, लौकी और दूसरी कद्दू वर्गीय फसलों में इस बीमारी का हल्का से मध्यम असर देखा गया है.
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इस तरह के मौसम में फैलती है बीमारी
विशेषज्ञों के अनुसार, 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान, हवा में ज्यादा नमी और बीच-बीच में होने वाली बारिश डाउनी मिल्ड्यू बीमारी के फैलने के लिए अनुकूल माहौल बनाती है. इससे फसल की पैदावार और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती हैं. किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों में ज्यादा पानी भरने वाली सिंचाई से बचें और पुरानी संक्रमित बेलों को नष्ट कर दें, ताकि बीमारी का फैलाव रोका जा सके.
विशेषज्ञों ने किसानों को दी सलाह
विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे फसलों में ऊपर से पानी देने वाली स्प्रिंकलर सिंचाई से बचें. कद्दू वर्गीय फसलों की सिंचाई दिन के समय करें, ताकि रात होने से पहले पत्तियां सूख जाएं. साथ ही, पौधों के बीच उचित दूरी रखें, जिससे हवा का बेहतर प्रवाह बना रहे और डाउनी मिल्ड्यू बीमारी का खतरा कम हो सके. पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के परीक्षण में डाउनी मिल्ड्यू बीमारी पर Chlorothalonil (कवच) @ 400 ग्राम प्रति एकड़ और Cymoxanil 8 फीसदी + Mancozeb 64 फीसदी WP (Curzate M8) @ 600 ग्राम प्रति एकड़ प्रभावी पाए गए हैं.
यूपी के किसान भी नई बीमारी से प्रभावित
वहीं, बीते दोनों खबर सामने आई थी कि उत्तर प्रदेश में तरबूज की फसल में ‘फ्यूजेरियम विल्ट’ नाम की नई बीमारी देखी गई है. यह बीमारी पौधों के जाइलम हिस्से को प्रभावित कर उन्हें पूरी तरह सुखा देती है. स्थिति को गंभीर देखते हुए उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने किसानों को बीज शोधन, भूमि उपचार और सिंचाई जैसे वैज्ञानिक उपाय अपनाने की सलाह दी है थी. उद्यमियों के अनुसार, फ्यूजेरियम विल्ट बहुत खतरनाक रोग है, जो कम समय में पूरी फसल को बर्बाद कर सकता है. समय पर सही उपचार नहीं करने पर किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठा सकता है.