गेहूं में बैंगनी रंग दिखे तो न घबराएं किसान, PAU ने फंगीसाइड छिड़काव से बचने की दी सलाह

wheat purple discoloration: फरवरी और मार्च में सामान्य से अधिक तापमान रहने के कारण यह समस्या बढ़ी है. साथ ही कुछ गेहूं की किस्मों में यह एक स्वाभाविक गुण (इनहेरेंट कैरेक्टर) भी होता है, जिसमें मेलानिन पिगमेंट बनने लगता है, जिससे बैंगनी रंग दिखता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Updated On: 17 Mar, 2026 | 12:46 PM

wheat purple discoloration: देश के कई गेहूं उत्पादक इलाकों में इन दिनों किसानों के बीच एक नई चिंता देखने को मिल रही है. खेतों में खड़ी फसल के बालियों और डंठलों पर बैंगनी रंग (पर्पल डिसकलरेशन) नजर आ रहा है, जिसे देखकर कई किसान इसे बीमारी समझकर तुरंत दवाइयों का छिड़काव कर रहे हैं. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह कोई बीमारी नहीं बल्कि प्राकृतिक कारणों से होने वाला बदलाव है.

क्या है बैंगनी रंग की वजह?

द ट्रिब्यून की खबर के अनुसार, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना के वैज्ञानिकों ने बताया कि गेहूं की फसल में दिखाई देने वाला यह बैंगनी रंग किसी रोग का संकेत नहीं है. यह रंग मुख्य रूप से गेहूं की बालियों (ग्लूम्स) और डंठल (पेडुन्कल) पर दिखाई देता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि फरवरी और मार्च में सामान्य से अधिक तापमान रहने के कारण यह समस्या बढ़ी है. साथ ही कुछ गेहूं की किस्मों में यह एक स्वाभाविक गुण (इनहेरेंट कैरेक्टर) भी होता है, जिसमें मेलानिन पिगमेंट बनने लगता है, जिससे बैंगनी रंग दिखता है.

फसल और उत्पादन पर नहीं पड़ता असर

किसानों के लिए राहत की बात यह है कि इस बदलाव का फसल की गुणवत्ता या उत्पादन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता. वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि यह रंग केवल बाहरी हिस्से तक सीमित रहता है और अंदर विकसित हो रहा दाना पूरी तरह स्वस्थ रहता है.

PAU के प्लांट पैथोलॉजी विभाग के प्रमुख डी.एस. भुट्टर के अनुसार, विश्वविद्यालय द्वारा किए गए सर्वे में यह पाया गया कि फसल के दानों पर इसका कोई असर नहीं है और यह स्थिति पहले भी मार्च 2022 में देखी जा चुकी है.

अनावश्यक दवा छिड़काव से बचें

कई किसान बिना सलाह लिए फफूंदनाशक (फंगीसाइड) का छिड़काव कर रहे हैं, जो न केवल बेकार खर्च है बल्कि पर्यावरण और मिट्टी के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है.

कृषि एक्सपर्ट निर्मल यादव के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के इस दौर में किसानों को सबसे ज्यादा सजग रहने की जरूरत है. उत्तर भारत में मार्च के महीने में गेहूं की फसल में दाना फुटान पर होता है और यह समय इस फसल के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील होता है. इसी समय फसल में अंतिम और निर्णायक दौर की सिंचाई भी होती है. ऐसे में मार्च का मौसम गेहूं के लिए सबसे ज्यादा अहमियत रखता है. हवा तेज चली तो फसल गिरने का ख़तरा और धूप तेज हुई तो दाना जल्दी पकने की चिंता किसानों को होती है. इस साल मार्च में रिकॉर्ड स्तर पर गर्मी हो रही है. इससे गेहूं की फसल के रंग में भी बदलाव देखने को मिल रहे है.

जिन इलाकों में अंतिम सिंचाई के पहले चारा मारने की दवा अधिक मात्रा में दी गई, वहां गेहूं की बालियों का रंग चटख हो रहा है. कुछ जगह बैंगनी रंग भी दिखा है. ऐसी स्थिति में किसान गेहूं की बाली को अपने हाथ से रगड़ का देखे कि बाली के रंग का असर दाने पर भी पड़ा है या नहीं. अगर दाना अपनी नैसर्गिक रंगत वाला है तो कोई चिंता की बात नहीं है. लेकिन अगर दाने का रंग भी बैंगनी रंगत वाला है तो अपने निकटतम केवीके जाकर कृषि वैज्ञानिकों से परामर्श करके ही किसी दवा का छिड़काव करें. किसानों के लिए हिदायत सिर्फ इतनी है कि वे बाजार में फसल की दवा बेचने वालों की सलाह पर ऐसी कोई दवा का छिड़काव न करें. आमतौर पर मौसम असामान्य होने पर फसलों में मामूली रंग परिवर्तन जैसे बदलाव अपवादस्वरूप दिखते है.

सही उपाय क्या हैं?

वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे घबराने की बजाय सही कृषि तकनीकों को अपनाएं. फसल की जरूरत के अनुसार सिंचाई करें और गर्मी के असर को कम करने के लिए पोटेशियम नाइट्रेट का छिड़काव करें. इससे फसल को गर्मी से राहत मिलेगी और उत्पादन बेहतर बना रहेगा.

इसके अलावा किसानों को मौसम और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार ही निर्णय लेने की सलाह दी गई है, ताकि वे अनावश्यक नुकसान से बच सकें.

जागरूकता से होगा फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि खेती में सही जानकारी और जागरूकता बहुत जरूरी है. कई बार किसान छोटी-छोटी समस्याओं को बीमारी समझ लेते हैं और जल्दबाजी में गलत कदम उठा लेते हैं. अगर किसान वैज्ञानिकों की सलाह पर भरोसा करें और सही समय पर सही उपाय अपनाएं, तो वे न केवल अपनी लागत कम कर सकते हैं बल्कि बेहतर उत्पादन भी हासिल कर सकते हैं.

इस समय जरूरत है कि किसान धैर्य रखें, अफवाहों से बचें और केवल प्रमाणित जानकारी के आधार पर ही कोई कदम उठाएं. ऐसा करने से खेती अधिक सुरक्षित, सस्ती और टिकाऊ बन सकती है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 17 Mar, 2026 | 11:36 AM
ज्ञान का सम्मान क्विज

किस फसल को सफेद सोना कहा जाता है?

सवाल का दीजिए सही जवाब और जीतिए ₹1000 का इनाम! 🏆
पिछले Quiz का सही जवाब
गेहूं को फसलों का राजा कहा जाता है.
विजेताओं के नाम
नसीम अंसारी, देवघर, झारखंड.
रमेश साहू, रायपुर, छत्तीसगढ़

लेटेस्ट न्यूज़