500 मीट्रिक टन तक पहुंचा रेशम उत्पादन, सिल्क एक्सपो-2026 में योगी सरकार की बड़ी उपलब्धि

लखनऊ में सिल्क एक्सपो–2026 के जरिए उत्तर प्रदेश सरकार ने रेशम उद्योग को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. इस आयोजन में किसानों, बुनकरों और उद्यमियों को सम्मानित किया गया. सरकार की योजनाओं से रेशम उत्पादन, रोजगार और बाजार को नई गति मिलने की उम्मीद है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 3 Feb, 2026 | 09:20 PM

Silk Expo 2026 : उत्तर प्रदेश की पहचान अब सिर्फ खेती और कुटीर उद्योग तक सीमित नहीं रही, बल्कि पारंपरिक उद्योगों को आधुनिक सोच से जोड़कर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार रेशम जैसे पारंपरिक उद्योग को रोजगार, तकनीक और बाजार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है.

इसी कड़ी में लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में सिल्क एक्सपो–2026 का भव्य शुभारंभ किया गया. इस कार्यक्रम का उद्घाटन प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने किया. इस मौके पर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप भी मौजूद रहे. कार्यक्रम में रेशम उद्योग से जुड़े लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था.

रेशम रत्न सम्मान

सिल्क एक्सपो-2026 के उद्घाटन अवसर पर मंत्री राकेश सचान ने पं. दीन दयाल उपाध्याय रेशम रत्न सम्मान प्रदान किया. इस सम्मान समारोह में रेशम उद्योग से जुड़े किसानों, बुनकरों, उद्यमियों और डिजाइनरों को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया. साथ ही रेशम मित्र-2025 पत्रिका को भी विमोचन किया गया, जो रेशम उद्योग से जुड़ी योजनाओं और सफल कहानियों को सामने लाती है. मंत्रीगणों ने प्रदर्शनी में लगे रेशमी उत्पादों के स्टॉलों और सजीव प्रदर्शनों का अवलोकन किया और विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की.

Silk Expo 2026, Uttar Pradesh Silk Industry, Yogi Government, Sericulture Development

मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना

27 मीट्रिक टन से 500 मीट्रिक टन तक पहुंचा उत्पादन

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री राकेश सचान ने बताया कि उत्तर प्रदेश में रेशम उत्पादन  में ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई है. वर्ष 1988 में जब रेशम विभाग की स्थापना हुई थी, तब प्रदेश में केवल 27 मीट्रिक टन रेशम का उत्पादन होता था. आज यह आंकड़ा बढ़कर 450 से 500 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में उत्पादन करीब 300 मीट्रिक टन था, जिसे बीते चार वर्षों में हर साल औसतन 50 मीट्रिक टन की वृद्धि के साथ तेजी से आगे बढ़ाया गया है. यह योगी सरकार की मजबूत नीति और योजनाओं का ही परिणाम है.

किसानों और बुनकरों को सीधा फायदा, लाखों की मदद

मंत्री सचान ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में रेशम की सालाना खपत करीब 5 से 6 हजार मीट्रिक टन है. इसमें से अकेले वाराणसी और आसपास के इलाकों में ही 3500 से 4000 मीट्रिक टन रेशम की खपत होती है. सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश अपनी जरूरत का रेशम खुद तैयार करे. इसके लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना  और केंद्रीय रेशम बोर्ड के तहत कई जिलों में मल्टी रीलिंग इकाइयां स्थापित की गई हैं. वर्ष 2024-25 में 1630 लाभार्थियों को कीटपालक गृह और उपकरण के लिए 32.49 करोड़ रुपये की सहायता दी गई. वहीं, वाराणसी में रेशम बुनाई और रंगाई से जुड़ी 75 इकाइयों को 2.16 करोड़ रुपये का अनुदान मिला.

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रेशम मित्र पोर्टल

मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना से बदलेगी तस्वीर

प्रदेश में पहली बार मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना  को मंजूरी दी गई है. इस योजना के तहत अगले 10 वर्षों में 13,500 किसानों को 9,000 एकड़ भूमि पर शहतूत की खेती से जोड़ा जाएगा. इससे करीब 360 मीट्रिक टन अतिरिक्त रेशम धागे का उत्पादन होगा. किसानों और उद्यमियों की सुविधा के लिए रेशम मित्र पोर्टल शुरू किया गया है, जहां ऑनलाइन आवेदन, मॉनिटरिंग और पारदर्शी चयन की सुविधा उपलब्ध है. राज्य मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने कहा कि डबल इंजन सरकार के प्रयासों से हर साल 2000 से 2500 नए किसान रेशम उत्पादन से जुड़ेंगे.

देशभर के बुनकरों के लिए बड़ा मंच

सिल्क एक्सपो–2026 में उत्तर प्रदेश सहित बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक जैसे राज्यों के बुनकर और व्यापारी अपने शुद्ध रेशमी उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय कर रहे हैं. यह प्रदर्शनी 06 फरवरी 2026 तक आम जनता के लिए खुली रहेगी. यह एक्सपो न सिर्फ रेशम उद्योग को नया बाजार दे रहा है, बल्कि किसानों, बुनकरों और युवाओं के लिए रोजगार  की नई उम्मीद भी बनकर उभरा है.

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Published: 3 Feb, 2026 | 09:20 PM

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