Heat Stroke: गर्मी का मौसम जैसे-जैसे तेज होता जा रहा है, वैसे-वैसे पशुओं पर इसका असर भी बढ़ने लगा है. खासकर दुधारू पशु इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. कई बार पशुपालक यह समझ ही नहीं पाते कि उनके पशु लू की चपेट में आ चुके हैं, जिसका सीधा असर दूध उत्पादन और पशु के स्वास्थ्य पर पड़ता है. बिहार सरकार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अनुसार, अगर समय रहते लक्षण पहचान लिए जाएं और सही देखभाल की जाए, तो बड़े नुकसान से बचा जा सकता है.
अचानक दूध उत्पादन में गिरावट सबसे बड़ा संकेत
लू लगने का सबसे पहला और बड़ा असर पशुओं के दूध उत्पादन पर पड़ता है. विभाग के अनुसार, जब पशु लू की चपेट में आते हैं, तो उनके दूध देने की क्षमता 20 फीसदी से 50 फीसदी तक घट सकती है. यह गिरावट अचानक होती है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. कई बार लोग इसे सामान्य बदलाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह लू का साफ संकेत हो सकता है. इसलिए अगर दूध उत्पादन में अचानक कमी दिखे, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए और पशु की स्थिति पर ध्यान देना जरूरी है.
सुस्ती और चारा कम खाना भी है खतरे की घंटी
लू लगने पर पशु के व्यवहार में भी बदलाव साफ दिखाई देता है. पशु बार-बार बैठता और उठता है, सुस्त रहता है और पहले की तरह सक्रिय नहीं दिखता. इसके साथ ही वह चारा खाना बंद कर देता है या बहुत कम खाने लगता है. इससे उसके शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता और स्थिति और खराब हो सकती है. विभाग के अनुसार, अगर पशु अचानक सुस्त हो जाए और उसकी भूख कम हो जाए, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत देखभाल शुरू करें.
आंखों में लालिमा और पानी आना भी संकेत
लू का असर पशुओं की आंखों पर भी दिखाई देता है. आंखें लाल हो जाना, उनमें जलन होना या लगातार पानी आना इसके प्रमुख लक्षण हैं. यह संकेत बताते हैं कि पशु का शरीर गर्मी से परेशान है और उसे तुरंत राहत की जरूरत है. ऐसे समय में पशु को ठंडी और छायादार जगह पर रखना चाहिए और उसे पर्याप्त मात्रा में साफ पानी देना चाहिए, ताकि शरीर का तापमान नियंत्रित रह सके.
समय पर देखभाल से बचाया जा सकता है बड़ा नुकसान
पशुपालन विभाग का कहना है कि लू से बचाव के लिए कुछ आसान उपाय अपनाकर पशुओं को सुरक्षित रखा जा सकता है. सबसे जरूरी है कि पशुओं को धूप से बचाकर छांव में रखा जाए और उन्हें हमेशा ठंडा व साफ पानी उपलब्ध कराया जाए. इसके अलावा पशुशाला में हवा का सही इंतजाम होना चाहिए, ताकि गर्मी कम लगे. चारे में भी हल्का और ठंडक देने वाला आहार शामिल करना चाहिए. अगर लक्षण ज्यादा गंभीर हों, तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए, ताकि समय पर इलाज मिल सके.