Fish Farming: जैसे ही सर्दी अपने चरम पर पहुंचती है, वैसे ही तालाबों में मछली पालने वालों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है. जनवरी का महीना मत्स्य पालन के लिए बेहद नाजुक माना जाता है. ठंड के कारण पानी का तापमान गिर जाता है, जिससे मछलियों की भूख, बढ़वार और सेहत पर सीधा असर पड़ता है. अगर इस समय सही देखभाल न की जाए, तो नुकसान तय है. इसी को ध्यान में रखते हुए मत्स्य विभाग की ओर से जनवरी माह के लिए कुछ जरूरी सलाह दी गई है, जिसे अपनाकर मछली पालक ठंड में भी अच्छा उत्पादन बनाए रख सकते हैं.
ठंड में क्यों घट जाता है तालाब का प्राकृतिक आहार
सर्दियों में पानी ठंडा होने से तालाब में मौजूद प्राकृतिक आहार की मात्रा कम हो जाती है. शैवाल और सूक्ष्म जीवों की वृद्धि रुक जाती है, जिससे मछलियों को भरपूर पोषण नहीं मिल पाता. इसका असर मछलियों की सेहत और वजन बढ़ने पर साफ दिखाई देता है. कई बार मछलियां सुस्त हो जाती हैं और दाना भी कम खाती हैं. ऐसे में तालाब में प्राकृतिक आहार को दोबारा सक्रिय करना बहुत जरूरी हो जाता है, ताकि मछलियों को ठंड में भी पर्याप्त पोषण मिलता रहे.
जनवरी में तालाब में क्या-क्या डालना जरूरी
बिहार मत्स्य विभाग के अनुसार, जनवरी महीने में तालाब में प्राकृतिक आहार बनाए रखने के लिए कुछ खास चीजों का नियमित उपयोग करना चाहिए. प्रति एकड़ तालाब में हर 10 से 15 दिन के अंतराल पर 15 किलो चूना डालना फायदेमंद माना गया है. इससे पानी की गुणवत्ता सुधरती है. इसके साथ ही 15 किलो सिंगल सुपर फॉस्फेट डालने से तालाब में प्राकृतिक भोजन तैयार होता है. इसके अलावा 5 किलो मिनरल मिक्चर और 50 किलो सरसों या राई की खल्ली को पहले पानी में अच्छी तरह फुलाकर घोल बना लेना चाहिए और फिर तालाब में छिड़काव करना चाहिए. इससे मछलियों को जरूरी मिनरल और ऊर्जा मिलती है.
सही देखभाल से बढ़ेगा उत्पादन और मुनाफा
अगर जनवरी में तालाब की सही देखभाल की जाए, तो मछली पालन घाटे का सौदा नहीं बल्कि मुनाफे का जरिया बन सकता है. नियमित अंतराल पर खाद और खल्ली डालने से मछलियों की बढ़वार बनी रहती है. इससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है. ठंड में पानी की साफ-सफाई और संतुलन बनाए रखना भी बेहद जरूरी है. समय पर दिए गए पोषक तत्व मछलियों को स्वस्थ रखते हैं और उत्पादन में गिरावट नहीं आने देते. यही वजह है कि जानकार मानते हैं कि जनवरी में की गई थोड़ी सी मेहनत, आने वाले महीनों में मछली पालकों को बेहतर उत्पादन और अच्छी कमाई का रास्ता दिखा सकती है.