पशुपालक ध्यान दें! शीतलहर से बचाव के लिए विभाग की नई गाइडलाइन जारी, भूलकर भी न करें ये बड़ी गलतियां

बिहार में बढ़ती ठंड को देखते हुए पशुपालन विभाग ने अलर्ट जारी किया है. पशुओं को घातक शीतलहर से बचाने के लिए रहने, खाने और इलाज से जुड़े विशेष निर्देश दिए गए हैं. लापरवाही और गलत इलाज आपके पशुधन को नुकसान पहुंचा सकता है. सुरक्षित पशुपालन के लिए सरकार द्वारा बताए गए इन जरूरी बचाव उपायों को विस्तार से पढ़ें.

Saurabh Sharma
नोएडा | Updated On: 10 Jan, 2026 | 04:20 PM

Winter Care : बिहार में कड़ाके की ठंड और शीतलहर का प्रकोप शुरू हो चुका है. जहां इंसान गर्म कपड़ों और अलाव के सहारे खुद को बचा रहे हैं, वहीं हमारे बेजुबान पशुओं के लिए यह मौसम काफी चुनौतीपूर्ण होता है. पशुओं की सेहत और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग (पशुपालन निदेशालय) ने पशुपालकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है. सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ठंड के कारण पशुओं के दूध उत्पादन में कमी न आए और वे बीमारियों से सुरक्षित रहें.

झोलाछाप डॉक्टरों से रहें सावधान

अक्सर देखा जाता है कि पशु के बीमार  होने पर ग्रामीण क्षेत्रों में लोग नजदीकी गैर-पंजीकृत या झोलाछाप डॉक्टरों से सलाह ले लेते हैं. सरकार ने सख्त हिदायत दी है कि बीमार पशुओं की चिकित्सा कभी भी गैर-पंजीकृत पशु चिकित्सक से न कराएं. गलत इलाज या अधूरी जानकारी पशु की जान ले सकती है. किसी भी आपात स्थिति में केवल सरकारी पशु अस्पतालों या निबंधित डॉक्टरों से ही संपर्क करें. सही समय पर सही इलाज ही आपके पशुधन की रक्षा  कर सकता है.

साफ-सफाई का रखें खास ख्याल

संक्रमण को रोकने के लिए स्वच्छता सबसे बड़ा हथियार है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि पशुओं के चारागाह या उनके आने-जाने के रास्ते में मृत पशुओं के शवों का निस्तारण (डिस्पोजल) बिल्कुल न करें. खुले में शव फेंकने से गंभीर बीमारियां फैल  सकती हैं, जो चारागाह के जरिए स्वस्थ पशुओं तक पहुंच जाती हैं. मृत पशुओं को जमीन में गहरा गड्ढा खोदकर सही तरीके से दबाना चाहिए, ताकि पर्यावरण और दूसरे जानवर सुरक्षित रहें.

खान-पान और रहन-सहन में करें जरूरी बदलाव

ठंड के मौसम में पशुओं को ऊर्जा की अधिक जरूरत होती है. पशुपालकों को सलाह दी गई है कि वे पशुओं को संतुलित आहार  दें और पानी पिलाते समय ध्यान रखें कि वह बहुत अधिक ठंडा न हो. पशुओं के बांधने वाले स्थान (गौशाला) को चारों तरफ से बोरियों या तिरपाल से ढंक देना चाहिए ताकि ठंडी हवा सीधे अंदर न आए. हालांकि, वेंटिलेशन का ध्यान रखना भी जरूरी है ताकि अंदर नमी और गैस न बने. जमीन पर पुआल या बिछावन बिछाने से पशुओं को गर्माहट मिलती है.

जनहित में जारी संदेश

पशुपालन निदेशालय, बिहार सरकार की यह जानकारी जनहित में प्रसारित की गई है ताकि ठंड के इस मौसम में पशुपालकों को आर्थिक नुकसान  न उठाना पड़े. विभाग का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी बरतकर हम अपने पशुओं को निमोनिया और ठंड लगने जैसी समस्याओं से बचा सकते हैं. सरकार की ओर से टीकाकरण और दवाइयों की व्यवस्था भी की गई है, जिसका लाभ किसान अपने नजदीकी पशु केंद्र पर जाकर उठा सकते हैं.

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Published: 10 Jan, 2026 | 11:12 AM

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