मछली पालक तालाब में इस तरह डालें दाना, तेजी से बढ़ेंगी मछलियां.. कमाई इतनी कि पैसों से भर जाएगी झोली

मछली पालन में अधिक कमाई के लिए सही आहार प्रबंधन बेहद जरूरी है. प्रोटीन स्तर, भोजन देने की सही मात्रा और सही तरीका अपनाने से मछलियों की सेहत बेहतर रहती है. फ्लोटिंग फीड और जूट बैग जैसी विधियों से आहार की बर्बादी रुकती है और उत्पादन बढ़ता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 3 Feb, 2026 | 11:30 PM

Fish Farming: तालाब में मछलियां हैं, मेहनत भी हो रही है, लेकिन फिर भी मुनाफा उम्मीद से कम मिल रहा है-ऐसा कई मछली पालकों के साथ होता है. असल दिक्कत मछलियों के खाने को लेकर होती है. कब, कितना और कैसे आहार देना है, यही तय करता है कि मछली तेजी से बढ़ेगी या नहीं. अगर आहार प्रबंधन सही हो जाए, तो मछली पालन सच में छप्परफाड़ कमाई का जरिया बन सकता है.

मछली पालन में आहार क्यों सबसे अहम है

मछली पालन में सबसे जरूरी चीज होती है सही आहार. मछलियों की सेहत, उनकी बढ़त और अंत में मिलने वाला मुनाफा-सब कुछ खाने पर निर्भर करता है. अगर आहार सही मात्रा में और सही तरीके से दिया जाए, तो मछलियां कम समय में अच्छा वजन पकड़ती हैं. वहीं, गलत तरीके से भोजन देने पर आहार बर्बाद होता है और मछलियां बीमार भी पड़ सकती हैं. इसलिए मछली पालकों को सबसे पहले आहार प्रबंधन को समझना जरूरी है.

किस मछली को कितना प्रोटीन चाहिए

हर मछली की जरूरत  अलग होती है. आमतौर पर तालाब में पाली जाने वाली रोहू, कतला और मृगल जैसी मछलियों को ज्यादा प्रोटीन की जरूरत नहीं होती. इनके लिए 18 से 20 प्रतिशत प्रोटीन वाला आहार काफी होता है, जो बाजार में आसानी से मिल जाता है. वहीं, पंगास जैसी मछलियों को ज्यादा प्रोटीन चाहिए. इनके लिए लगभग 25 प्रतिशत प्रोटीन वाला आहार बेहतर माना जाता है. अगर मछली की प्रजाति के अनुसार सही प्रोटीन वाला आहार चुना जाए, तो उत्पादन अपने आप बढ़ जाता है.

फ्लोटिंग फीड और जूट बैग का सही तरीका

आजकल फ्लोटिंग फीड  यानी तैरने वाला आहार काफी इस्तेमाल हो रहा है. यह पानी की सतह पर तैरता रहता है, जिससे आहार नीचे डूबकर खराब नहीं होता. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान साफ देख सकता है कि मछलियों ने कितना खाना खाया. आमतौर पर 15 मिनट में जितना आहार खत्म हो जाए, उसी हिसाब से मात्रा तय करनी चाहिए. अगर फ्लोटिंग फीड उपलब्ध न हो, तो जूट बैग का तरीका अपनाया जा सकता है. आहार को जूट के बोरे में भरकर तालाब में एक ही जगह बांध देना चाहिए. एक एकड़ के तालाब में 8 से 9 जगह जूट बैग बांधना सही माना जाता है. रोज उसी जगह भोजन देने से मछलियां वहां इकट्ठा होकर खाने की आदत बना लेती हैं. जूट बैग से नीचे गिरा आहार नीचे रहने वाली मछलियां भी खा लेती हैं, जिससे कुछ भी बर्बाद नहीं होता.

कितना खाना देना है, यही तय करेगा कमाई

मछलियों को जरूरत से ज्यादा या कम खाना देना, दोनों ही नुकसानदायक है. आम तौर पर मछलियों को उनके शरीर के वजन  के हिसाब से 2 से 4 प्रतिशत तक आहार देना चाहिए. छोटी मछलियों को ज्यादा प्रतिशत में भोजन दिया जाता है. अगर तालाब में 100 किलो मछली है, तो रोज करीब 3 से 4 किलो आहार देना सही रहता है. जब मछली का औसत वजन 500 ग्राम तक हो, तो 3 प्रतिशत आहार काफी होता है. 500 ग्राम से ज्यादा होने पर आहार 2 प्रतिशत कर देना चाहिए. और जब मछली 1 किलो से ऊपर पहुंच जाए, तो करीब 1.5 प्रतिशत भोजन ही पर्याप्त होता है.

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Published: 3 Feb, 2026 | 11:30 PM

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