खुरपका बीमारी ने बढ़ाई पशुपालकों की टेंशन, टीकाकरण के बाद भी पशु हो रहे बीमार

गांवों में खुरपका बीमारी के बढ़ते मामलों ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है. टीकाकरण के बावजूद पशुओं के बीमार होने से दूध उत्पादन घटा है. समय पर इलाज और जांच न होने से नुकसान का डर बना हुआ है. पशुपालक जल्द राहत की मांग कर रहे हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 30 Jan, 2026 | 06:41 PM

FMD Disease : गांवों में पशुपालकों के लिए मुश्किलें उस समय बढ़ गईं, जब टीकाकरण के बावजूद खुरपका यानी मुंह-खुर बीमारी फैलने लगी. बागपत के रटौल में कई पशु इस बीमारी की चपेट में आ गए हैं. बीमार पशुओं के मुंह और खुरों में घाव हो गए हैं, जिससे वे न ठीक से खड़े हो पा रहे हैं और न ही चारा खा पा रहे हैं. हालात यह हैं कि पशु दिनभर तड़पते नजर आ रहे हैं, जिसे देखकर पशुपालक काफी परेशान हैं.

दूध उत्पादन घटा, आमदनी पर पड़ा सीधा असर

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बागपत के रटौल में एक साथ 9 पशु खुपरका बिमारी के चपेट में आ गए. खुरपका बीमारी का सबसे बड़ा असर दूध उत्पादन  पर देखने को मिल रहा है. जिन पशुओं से रोजाना अच्छा दूध निकलता था, अब उनमें दूध बेहद कम हो गया है. पशुपालकों का कहना है कि दूध कम होने से घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है. कई परिवारों की रोजी-रोटी पूरी तरह पशुपालन पर निर्भर है, ऐसे में बीमारी ने उनकी आर्थिक कमर तोड़ दी है. पशुओं को दर्द के कारण चलने में भी दिक्कत हो रही है, जिससे उनकी देखभाल और इलाज  पर खर्च बढ़ गया है.

इलाज में देरी से बढ़ रहा खतरा

ग्रामीणों का आरोप है कि समय पर जांच और इलाज न मिलने से बीमारी तेजी से फैल रही है. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि सूचना देने के बावजूद पशु चिकित्सा टीम मौके पर देर से पहुंच रही है. इसी वजह से बीमारी एक पशु से दूसरे पशु में फैल  रही है. कई पशुपालक डर के माहौल में जी रहे हैं कि अगर समय रहते इलाज नहीं हुआ, तो और पशु भी बीमार हो सकते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि गांव में अभी तक कोई विशेष चिकित्सा शिविर नहीं लगाया गया है, जिससे नाराजगी बढ़ती जा रही है.

प्रशासन से विशेष शिविर और दोबारा टीकाकरण की मांग

पशुपालकों ने प्रशासन और पशुपालन विभाग  से मांग की है कि गांव में तुरंत एक विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाया जाए. बीमार पशुओं का मौके पर इलाज किया जाए और बाकी पशुओं की दोबारा जांच कर टीकाकरण किया जाए, ताकि बीमारी पर काबू पाया जा सके. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विभाग की ओर से यह सलाह दी गई है कि जैसे ही किसी पशु में खुरपका के लक्षण दिखें, उसकी तुरंत सूचना दी जाए.

इसके लिए नजदीकी पशु चिकित्सालय या सरकारी हेल्पलाइन नंबर 1962 पर संपर्क कर इलाज कराया जा सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि खुरपका एक संक्रामक बीमारी है, जो तेजी से फैलती है. इसलिए पशुपालकों को साफ-सफाई पर खास ध्यान देना चाहिए, बीमार पशुओं  को अलग रखें और बिना सलाह के कोई घरेलू इलाज न करें. समय पर इलाज और सतर्कता ही इस बीमारी से बचाव का सबसे अच्छा तरीका है.

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