Foot and Mouth Disease: एक किसान के लिए उसका पशु सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि उसके बच्चों की पढ़ाई, घर की मरम्मत और सुख-दुख का साथी होता है. लेकिन सोचिए, अगर कल तक चंगा दिखने वाला आपका पशु अचानक सुस्त हो जाए, चारा छोड़ दे और उसके मुंह से चिपचिपी लार गिरने लगे, तो यह किसी बड़े खतरे की दस्तक हो सकती है. इसे गांवों में खुरहा या मुंहपका-खुरपका (FMD) कहा जाता है. यह बीमारी बिजली की तरह एक पशु से दूसरे पशु में फैलती है और देखते ही देखते पूरे बाड़े को अपनी चपेट में ले लेती है. अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह न केवल पशु को लाचार बना देती है, बल्कि पशुपालक को भी भारी आर्थिक मंदी के गर्त में धकेल सकती है.
बीमारी के लक्षण
खुरपका-मुंहपका बीमारी को पहचानना बहुत आसान है, बस जरूरत है थोड़ा सजग रहने की. सबसे पहले पशु को तेज बुखार आता है और वह कांपने लगता है. इसके बाद उसके मुंह, मसूड़ों और जीभ पर छोटे-छोटे छाले पड़ जाते हैं, जिससे लार बहने लगती है. गौर से देखने पर आपको उसके खुरों (पैरों) के बीच भी घाव नजर आएंगे. दर्द के कारण पशु लंगड़ाकर चलने लगता है और खाना-पीना पूरी तरह बंद कर देता है. अगर आपकी गाय या भैंस दूध दे रही है, तो दूध की मात्रा अचानक गिर जाती है.
क्यों इतना खतरनाक है यह बीमारी?
यह बीमारी एक विषाणु (Virus) से फैलती है, जो हवा, दूषित चारे और पानी के जरिए बहुत तेजी से फैलता है. इसकी सबसे डरावनी बात यह है कि अगर एक पशु बीमार हुआ, तो वह अपने छींकने या लार के संपर्क से बाड़े के बाकी स्वस्थ पशुओं को भी बीमार कर देता है. छोटे बछड़ों के लिए तो यह जानलेवा साबित होती है क्योंकि उनका कोमल शरीर इस तेज बुखार को झेल नहीं पाता. पशु मरता भले ही कम हो, लेकिन वह इतना कमजोर हो जाता है कि उसका दूध उत्पादन फिर कभी पहले जैसा नहीं हो पाता.
बचाव ही असली इलाज है
कहा जाता है कि इलाज से बेहतर बचाव है और यह बात इस बीमारी पर सटीक बैठती है. जैसे ही आपको लगे कि किसी पशु के मुंह से लार गिर रही है, उसे तुरंत बाकी पशुओं से अलग कर दें. बीमार पशु का दाना-पानी और बर्तन भी अलग रखें. बाड़े की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें और वहां फिनाइल या लाल दवा का छिड़काव करें. पशु के घावों को नीम के पानी या फिटकरी के पानी से धोना बहुत फायदेमंद होता है. लेकिन ध्यान रहे, कोई भी घरेलू नुस्खा अपनाने से पहले पशु चिकित्सक को जरूर बुलाएं.
टीकाकरण-सुरक्षा का सबसे मजबूत कवच
इस बीमारी का सबसे पक्का समाधान है-समय पर टीकाकरण (Vaccination). सरकार द्वारा समय-समय पर गांवों में मुफ्त टीकाकरण अभियान चलाए जाते हैं. साल में दो बार अपने पशुओं को एफएमडी का टीका जरूर लगवाएं. यह टीका आपके पशु के चारों ओर एक सुरक्षा कवच बना देता है, जिससे वायरस उस पर हमला नहीं कर पाता. याद रखें, एक टीका न केवल आपके पशु की जान बचाता है, बल्कि आपकी साल भर की मेहनत और कमाई को भी सुरक्षित रखता है.