हैरान कर देगी ये तकनीक..बिना मिट्टी सिर्फ पानी से 7 दिन में तैयार करें चारे का ढेर, बचाएं पैसा

पशुपालन के क्षेत्र में हाइड्रोपोनिक्स तकनीक एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आई है. अब किसान बिना मिट्टी और नाममात्र पानी के साथ अपने घर के भीतर ही महज एक हफ्ते में पौष्टिक हरा चारा उगा सकते हैं. यह तकनीक न केवल चारे की लागत कम करती है, बल्कि पशुओं की दूध देने की क्षमता और स्वास्थ्य में भी जबरदस्त सुधार लाती है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 22 Jan, 2026 | 11:18 AM

Hydroponic Fodder : कल्पना कीजिए, बाहर चिलचिलाती धूप है या कड़ाके की ठंड, खेत सूखे पड़े हैं, लेकिन आपके पशुओं के लिए ताजाा, हरा और रसीला चारा आपके घर के एक छोटे से कमरे में ही तैयार हो रहा है. सुनकर जादू जैसा लगता है ना? लेकिन यह जादू अब हकीकत बन चुका है. आजकल पशुपालन की दुनिया में हाइड्रोपोनिक्स तकनीक की खूब चर्चा हो रही है, जिसे किसान भाई प्यार से हरा सोना कह रहे हैं. यह तकनीक उन पशुपालकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जिनके पास जमीन कम है या जो सूखे की मार झेल रहे हैं.

क्या है यह बिना मिट्टी वाली जादुई खेती?

सरल शब्दों में कहें तो हाइड्रोपोनिक्स का मतलब है-बिना मिट्टी के सिर्फ पानी  में खेती करना. इस तकनीक में मक्का, जौ या जई के दानों को ट्रे में बिछा दिया जाता है और उन पर हल्के पानी का छिड़काव किया जाता है. हैरानी की बात यह है कि जो चारा खेत में तैयार होने में 45 से 50 दिन लेता है, वही चारा इस तकनीक से महज 7 से 8 दिनों में घुटनों तक ऊंचा और पोषक तत्वों  से भरपूर हो जाता है. यह चारा इतना मुलायम होता है कि पशु इसे जड़ समेत बड़े चाव से खाते हैं, जिससे बर्बादी भी शून्य होती है.

कम खर्चा, ज्यादा मुनाफा- पशुपालकों की मौज

आजकल चारे और भूसे के दाम आसमान छू रहे हैं. ऐसे में हाइड्रोपोनिक्स तकनीक पशुपालकों की जेब का बोझ हल्का कर रही है. इसमें न तो ट्रैक्टर से जुताई का खर्चा है, न खाद की जरूरत और न ही कीटनाशकों का झंझट. सिर्फ एक किलो मक्का से आप लगभग 7 से 8 किलो हरा चारा तैयार कर सकते हैं. सबसे बड़ी राहत पानी की बचत में है, पारंपरिक खेती  के मुकाबले इसमें 90 फीसदी कम पानी खर्च होता है. यानी कम लागत में आपके पशुओं को फाइव स्टार होटल जैसा खाना मिल रहा है.

सेहतमंद पशु और दूध की बाढ़

जब पशुओं को साल के 365 दिन ताजा और प्रोटीन युक्त चारा मिलता है, तो उसका सीधा असर उनकी सेहत और आपके मुनाफे पर पड़ता है. इस हरे सोने में विटामिन और एंजाइम्स की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जिससे पशुओं की पाचन शक्ति बढ़ती है. कई किसानों का अनुभव है कि हाइड्रोपोनिक्स चारा  खिलाने से पशुओं के दूध उत्पादन में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है. साथ ही, दूध की फैट क्वालिटी भी सुधरती है, जिससे बाजार में दूध के अच्छे दाम मिलते हैं.

छोटे किसानों के लिए आत्मनिर्भर बनने का रास्ता

इस तकनीक की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसे शुरू करने के लिए आपको बहुत बड़े ताम-झाम की जरूरत नहीं है. आप अपने घर के एक खाली कमरे, बरामदे या छोटे से शेड में बांस के रैक बनाकर इसकी शुरुआत कर सकते हैं. सरकार भी अब इस तकनीक को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी दे रही है. यह उन युवाओं के लिए भी बेहतरीन मौका है जो गांव में रहकर ही खेती को आधुनिक और मुनाफे का सौदा बनाना चाहते हैं.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

सर्दियों में गुड़ का सेवन क्यों अधिक किया जाता है?