दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए 2.5 हजार करोड़ की योजना शुरू, एमपी सरकार का NDDB के साथ करार

मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य को मिल्क कैपिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए 2.5 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इससे किसानों और पशुपालकों को फायदा मिलेगा, आय बढ़ेगी और डेयरी सेक्टर को मजबूती मिलेगी. योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होने की उम्मीद है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Updated On: 27 Apr, 2026 | 12:08 PM

Dairy Development: दावा है कि अब दूध की नदियां सिर्फ कहावत नहीं रहेंगी, बल्कि हकीकत बनने की ओर बढ़ रही हैं. मध्य प्रदेश सरकार ने एक बड़ा लक्ष्य तय किया है- प्रदेश को देश का मिल्क कैपिटल बनाना. इसके लिए सरकार न सिर्फ करोड़ों रुपये खर्च करने जा रही है, बल्कि किसानों और पशुपालकों को मजबूत बनाने पर भी खास ध्यान दे रही है. राज्य सरकार ने . डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना  के तहत गांवों में रोजगार बढ़ेगा, किसानों की आमदनी बढ़ेगी और दूध उत्पादन में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है.

दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए बड़ी योजना

राज्य सरकार के बयान के अनुसार मध्य प्रदेश अभी देश का तीसरा सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक  राज्य है. वर्तमान में प्रदेश में करीब 21.32 मिलियन टन दूध उत्पादन हो रहा है, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 8.91 प्रतिशत है. अब सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर करीब 25.58 मिलियन टन तक पहुंचाना है. इसके लिए राज्य सरकार करीब 2.5 हजार करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी कर रही है. खास बात यह है कि किसान कल्याण  वर्ष के तहत दूध उत्पादन को 20 प्रतिशत तक बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. इससे प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता भी बढ़ेगी और आम लोगों को सस्ता और ज्यादा दूध मिल सकेगा.

पशुपालन और डेयरी सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा

सरकार पशुपालन को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं चला रही है. डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना  (Dr. Bhimrao Ambedkar Kamdhenu Scheme) के तहत डेयरी खोलने के लिए किसानों को अनुदान दिया जा रहा है. वहीं, मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना के तहत राज्य डेयरी फेडरेशन ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ समझौता किया है. प्रदेश में लगभग 3 हजार गोशालाएं चल रही हैं, जहां 4.75 लाख गौवंश की देखभाल की जा रही है. इसके अलावा मुख्यमंत्री गो सेवा योजना के तहत 2203 गोशालाओं में 2.11 लाख पशुओं का पालन हो रहा है. सरकार ने गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नई नीति भी बनाई है, जिसमें जैविक खाद, पंचगव्य और बायोगैस उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा.

दूध उत्पादन की स्थिति

राज्य दूध उत्पादन (मिलियन टन) हिस्सेदारी (%)
उत्तर प्रदेश 38.79 16.21%
राजस्थान 34.72 14.51%
मध्य प्रदेश 21.32 8.91%
गुजरात 18.30  7.65%
महाराष्ट्र  16.04 6.71%

किसानों को सीधा फायदा और बढ़ेगी आय

इस योजना का सबसे बड़ा फायदा किसानों और पशुपालकों को मिलेगा. सरकार ने गोवंश के आहार के लिए मिलने वाले अनुदान को 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये प्रति दिन कर दिया है. इससे पशुपालकों का खर्च कम होगा और मुनाफा बढ़ेगा. इसके अलावा पशुओं के संवर्धन के लिए 620 करोड़ रुपये से ज्यादा और पशुपालन विकास योजना के लिए 250 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है. मध्य प्रदेश  सरकार के अनुसार, करीब 2.90 करोड़ दुधारू पशु हैं, जिनमें 58.69 प्रतिशत देशी गायें और 35.46 प्रतिशत भैंसें हैं. इससे साफ है कि दूध उत्पादन बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं.

दूसरे राज्यों से मुकाबला और भविष्य की तैयारी

देश में दूध उत्पादन  के मामले में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है, जहां 16.21 प्रतिशत हिस्सेदारी है. राजस्थान दूसरे स्थान पर है, जबकि मध्य प्रदेश तीसरे नंबर पर है. अब सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत तक पहुंचाई जाए, जिससे वह देश का नंबर एक राज्य बन सके. मध्य प्रदेश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 707 ग्राम है, जो देश में छठवें स्थान पर है. सरकार का मानना है कि उत्पादन बढ़ने से यह आंकड़ा भी तेजी से बढ़ेगा. इससे पोषण स्तर सुधरेगा और डेयरी उद्योग को नई ताकत मिलेगी.

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Published: 27 Apr, 2026 | 12:06 PM
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